1971 के बाद सीमा पर सबसे ज्यादा गोलाबारी
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मेरा मानना है कि 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद लगातार 45 दिनों तक सीमा पर गोलाबारी नहीं हुई है। 45 दिनों तक गोलाबारी होना एक मायने रखता है।’ उन्होंने कहा कि 17 जुलाई को पहली घटना घटी थी, जब स्नाइपर्सर शाट में एक जवान शहीद हो गया था।
इसके बाद दस दिनों तक गोलाबारी होती रही। चंद दिनों के बाद इस माह में लगातार गोलाबारी होती रही। पिछले साल सितंबर में भी 20-25 दिन तक लगातार गोलाबारी हुई थी, लेकिन इस बार उससे भी ज्यादा सीजफायर का उल्लंघन होता रहा।
आतंकियों को घुसपैठ कराने की साजिश
डायरेक्टर जनरल सीमा पर हालात का जायजा लेने के बाद जम्मू के गवर्नमेंट मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल भी पहुंचे, जहां गोलाबारी में जख्मी होने वाले नागरिकों का इलाज चल रहा है।
आरएस पुरा व अरनियां सेक्टर की पोस्ट को सिर्फ निशाना बनाए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान नई रणनीति के तहत इन क्षेत्रों को निशाना बना रहा है।
इस बारे में अभी कुछ भी कह पाना मुश्किल है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि जम्मू-कश्मीर से लगने वाली भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आतंकियों के 25 से 30 लांचिंग पैड है।
बीएसएफ के डीजी ने किया सीमा का दौरा
आतंकी अकसर अपना ठिकाना बदलते रहते हैँ। कभी वे जंगलों में जमा होते हैं तो कभी सीमावर्ती गांवों में। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की पूर्व व वर्तमान सरकार में कोई अंतर नही है।
पाक रेंजरों द्वारा लगातार भारत के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाए जाने पर पाठक ने कहा कि वे पाक की इन हरकतों को हलके में नहीं ले रहे। उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बीएसएफ के जवानों ने कभी पाक के रिहायशी इलाकों पर गोलाबारी नहीं की। सीमा पर शांति की उम्मीदों पर डायरेक्टर जनरल ने कहा कि यह पाकिस्तान पर निर्भर है।
अधिकारियों को दिए डटकर मुकाबला करने के निर्देश
सीजफायर के उल्लंघन की तमाम घटनाओं के बाद उन्होंने पाक रेंजरों से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। डीजी पाठक ने सीमांत क्षेत्र अब्दुल्लियां पोस्ट पर तैनात जवानों से मिलकर क्षेत्र के हालत का जायजा लिया।
साथ ही गांव में बने बंकरों का निरीक्षण किया। सीजफायर उल्लंघन के बाद पाकिस्तान द्वारा प्रयोग किए हथियारों के बारे में भी जानकारी ली। बाद में उन्होंने इंदेश्वरनगर मीरां साहिब में सीमा सुरक्षा बल के कैंपस में जाकर बल के अधिकारियों से विचार-विमर्श किया।