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मवेशियों को मौत के साये में छोड़ने को मजबूर

Mon, 13 Oct 2014 10:42 PM IST
Updated Mon, 13 Oct 2014 10:42 PM IST
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pak firing at indian border

रविवार की रात से पाकिस्तान की ओर से आरएस पुरा सेक्टर में गोलाबारी नहीं होने से सीमावर्ती ग्रामीणों को काफी हद तक राहत मिली है। हालांकि, उनमें भय है पाकिस्तान कुछ दिन ठहरकर फिर गोलाबारी कर सकता है।

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पाकिस्तानी गोलाबारी से आरएस पुरा सेक्टर में सीमा से सटे अधिकतर गांव खाली हैं। घर के कुछ ही सदस्य सुबह गांवों में पहुंचते हैं। मवेशियों को चारा-पानी देने और दूध निकालने के बाद शाम को वह फिर शिविरों में लौट जाते हैं।
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महिलाएं तो अभी गांवों की ओर कतई नहीं जा रही हैं। सीमांत गांव अब्दुल्लिया के सरपंच चौधरी बचन लाल, मंगाराम, रमेश लाल, अवतार सिंह का कहना है कि पाकिस्तान पिछले चार माह से रुक-रुककर संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है।
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गोलाबारी के चलते मुसीबतें झेल रहे सीमावर्ती लोग

pak firing at indian border

इसके चलते उन्हें बार-बार गांव पलायन करना पड़ता है। मवेशियों को उन्हें गांव में ही छोड़ना पड़ता है। परिवार का खर्च दूध बेचने से ही चलता है। ऐसे में सुबह वह मवेशियों की देखभाल करने गांव आ जाते हैं।

उन्होंने कहा कि आरएस पुरा सेक्टर में गोलाबारी रविवार को थम जरूर गई, लेकिन खतरा टला नहीं है। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पांच-पांच मरले के प्लाट दिए जाएं। यह मांग उनकी लंबे समय से है।

गोलियों से नहीं, गोलों से लगता है डर

pak firing at indian border

सुचेतगढ़ के सरपंच स्वर्ण लाल भगत कहना है कि गांव के 90 प्रतिशत लोगों को शिविरों में भेज दिया गया है। गांव के लोग पाकिस्तानी गोलियों से नहीं डरते, लेकिन गोलों के आगे वह पस्त हो जाते हैं। गोला गिरने से अधिक नुकसान होता है और जान जाने का अधिक खतरा रहता है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की ओर से कई बार गोलियां उस समय दागी गईं, जब वह ग्रामीण खेतों में काम कर रहे थे। अब तो पाकिस्तान रेंज बढ़ाकर बड़े-बड़े गोले दाग रहा है।

बौखलाया हुआ है पाकिस्तान

सुचेतगढ़ के बुजुर्ग हवेली राम का कहना है कि वर्ष 1947 से लेकर आज तक उन्होंने सीमा पर कई बार हालत खराब होने के दौर देखे हैं। इस समय पाकिस्तान की हालत काफी खराब है, जिससे वह बौखलाया हुआ है।

इस कारण अब रेंजर्स और सेना द्वारा मिलकर गोलाबारी की जा रही है। अब बड़े गोले दागे जा रहे हैं। जान जाने के डर से गांव खाली कर दिया गया है।

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