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Pahalgam Attack: 'हमारी कश्मीरियत पर लगा दाग किसी तरह हट जाए', हमले के बाद कश्मीर की अवाम के दिल में ये सवाल

Sat, 26 Apr 2025 03:34 PM IST
शाहरुख खान अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 26 Apr 2025 03:34 PM IST
सार

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद कश्मीर की अवाम के दिल में एक ही सवाल है। हमारी कश्मीरियत पर लगा दाग किसी तरह हट जाए।

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Pahalgam Terror Attack Kashmiris Seek to Heal Stain on Their Heritage Inside Story News in Hindi
लाल चौक पर शुक्रवार को भीड़ कम रही - फोटो : बसित जरगर

विस्तार

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग ज़िले के पहलगाम में निहत्थे पर्यटकों पर आतंकवादियों द्वारा किये गए बर्बरतापूर्ण हमले को लेकर कश्मीर के हर वर्ग की ओर से निंदा की जा रही है। उनके अनुसार इस्लाम भी किसी निहत्थे बेगुनाह का खून बहाने की इजाजत नहीं देता और जैसी किसी ने भी ऐसा किया है वो इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन है।
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यहां की अवाम के दिल में बस एक ही सवाल पनप रहा है कि यह आतंकवादी हमला जो सदियों से चली आ रही कश्मीरियत पर दाग लगा गया उसे कैसे मिटाया जाए। लाल चौक के घंटाघर के पास सुबह के 10 बजे थे और वहां बेंच पर कुछ लोग एक साथ बैठे कुछ बाते कर रहे थे। 
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ध्यान से सुना तो कश्मीरी में कह रहे थे “असि क्या हेको करियिथ येमी सीथ भरोस हैको जीनिथ” (ऐसा क्या करें जिससे पर्यटकों का भरोसा जीत सकें), और वह आपस में यह भी कह रहे थे कि जिस भाईचारे और कश्मीरियत के लिए हमारी यह सरजीम मानी जाती थी उस पर दाग लगा गए हमलावर। 
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इनमें से एक मोहम्मद रफीक जू से जब बात की तो उन्होंने रिपोर्टर को पहले पर्यटक समझते हुए कहा - “आप डरना नहीं यहां सब सुरक्षित है”, लेकिन बाद में पता चलने पर कहा कि हमारा कश्मीर इंसानियत और कश्मीरियत के साथ-साथ मेहमाननवाज़ी के लिए जाना जाता रहा है लेकिन पर्यटकों के साथ जो हुआ हम सबको इसका दुख है। 

अब हम सिर्फ चाहते हैं कि जो हमलावरों ने दाग लगाया है उसे कैसे हटाएं क्योंकि उन हैवानों की हरकत के कारण सभी कश्मीरियों को एक नज़र से देखा जा रहा है। कुछ तो यह भी मान रहे हैं कि अगर दोनों देशों के बीच रिश्तों में सुधार हो जाए तो जो यह खून की नदियां यहां बहती हैं उन पर लगाम कस जाएगी। 

 

'...जो जम्मू कश्मीर में खून बहता है उस पर रोक लग सके'
एक अन्य स्थानीय निवासी जावेद अहमद ने कहा कि जो कुछ भी हुआ वो बहुत गलत हुआ ऐसा नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को चाहिए कि वो पाकिस्तान के साथ रिश्तों में सुधार लाए ताकि जो जम्मू कश्मीर में खून बहता है उस पर रोक लग सके। 

 

'घटना से मेहमाननवाज़ी पर बड़ा ज़ख्म पहुंचा है'
कश्मीरी हमेशा मेहमाननवाज़ रहा है और रहेगा लेकिन इस घटना से मेहमाननवाज़ी पर बड़ा ज़ख्म पहुंचा है, मुझे लगता है कि इस ज़ख्म पर मरहम लगाना जरूरी है जो केंद्र और प्रदेश सरकार मिलकर करेगी। सरकारों को आपसी रिश्तों में भी सुधार लाने की जरूरत है। कश्मीर की धरती पर खून की होली न खेली जाए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा जब तक यहां से हाथ नहीं बढ़ाया जाएगा तब तक हालात ऐसे ही बने रहेंगे।

गौरतलब है कि लगातार प्रदर्शनों के दौर में कई कश्मीरी लोग तो यह भी कहते सुनाई दिए कि हम पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का समर्थन नहीं करते हैं। और जिस किसी ने भी हमले को अंजाम दिया उन्हें घंटाघर के सामने फांसी दी जाए।

तीसरे दिन भी लाल चौक में दिखी कम चहल पहल ...
श्रीनगर का दिल कहलाए जाने लाल चौक के घंटाघर के आसपास तीसरे दिन भी कम रौनक देखने को मिली। सुबह से ही पर्यटकों की चहल पहल से खचाखच भरा रहने वाले घंटाघर के पास कुछ ही पर्यटक फोटो हुए सेल्फी लेते दिखाई दिए। इस बीच कुछ प्रदर्शनकारी दूसरे दिन भी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए वहां इकट्ठा हुए। लेकिन मीडिया का काफी ज़्यादा जमावड़ा लाल चौक में लोगों से प्रतिक्रियाएं लेता दिखाई दिया जिसमें टीवी चैनलों की दिल्ली से आई टीमें ज़्यादा थीं।

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