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जम्मू कश्मीर: भूमिहीनों को जमीन मामले पर विपक्षी पार्टियों ने लाभार्थियों पर सरकार से मांगी स्पष्टता

Sat, 26 Aug 2023 02:13 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Sat, 26 Aug 2023 02:13 PM IST
सार

जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने भूमिहीन लोगों को पट्टे के आधार पर भूमि के आवंटन को मंजूरी दे दी है। केवल केंद्र शासित प्रदेश के निवासी ही इस योजना के लिए पात्र हैं। विपक्षी पार्टियों ने इस पर सरकार से स्पष्टता मांगी है।

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Opposition parties sought clarity on the beneficiaries on the issue of land to the landless
Jammu Kashmir - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कश्मीर में विपक्षी पार्टियों ने शुक्रवार को प्रशासन की भूमिहीन योजना के पात्र लाभार्थियों पर स्पष्टता की मांग करते हुए कहा कि अधिवास का अधिकार केवल प्रदेश के स्थायी निवासियों को दिया जाना चाहिए। जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने भूमिहीन लोगों को पट्टे के आधार पर भूमि के आवंटन को मंजूरी दे दी है। केवल केंद्र शासित प्रदेश के निवासी ही इस योजना के लिए पात्र हैं। राजस्व विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देशों के एक सेट में, प्रशासन ने भूमिहीन पीएमएवाई (जी)/आवास प्लस लाभार्थियों के पक्ष में पट्टे के आधार पर पांच मरला राज्य भूमि के आवंटन को मंजूरी दे दी।

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पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के मुख्य प्रवक्ता सुहैल बुखारी ने योजना के इरादों और निहितार्थों के संबंध में प्रशासन से अधिक पारदर्शिता का आह्वान किया। उन्होंने कहा, यह पूरी नीति रहस्य में डूबी हुई है। जो आवश्यक जानकारी आनी चाहिए थी, वह लोगों से दूर है। प्रारंभ में प्रशासन ने बताया कि दो लाख भूमिहीन परिवार थे। 
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बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि संख्या कम थी। अब दिशा निर्देश जारी किए तो कहा कि इस योजना की पात्रता जम्मू और कश्मीर का अधिवास होगा। हम जानते हैं कि प्रशासन ने कई ऐसे लोगों को अधिवास प्रमाण पत्र जारी किए हैं, जो मूलरूप से जम्मू और कश्मीर के निवासी नहीं हैं। प्रशासन बताएं कि अब तक कितने अधिवास प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं, उनमें से कितने जम्मू-कश्मीर के हैं।


नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा कि यह योजना खराब नहीं है, लेकिन निर्णय निर्वाचित सरकार पर छोड़ देना चाहिए था। ऐसे निर्णय निर्वाचित सरकार द्वारा लिए जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल जो लोग पूछ रहे हैं वह यह है कि क्या ये लाभार्थी अगस्त 2019 (जब अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया) से पहले के निवासी हैं या उसके बाद के। अगर यह बाद की बात है, तो यह पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।

सीपीआई (एम) नेता एमवाई तारिगामी ने कहा कि कई राजनीतिक दलों ने मांग की है कि अधिवास का अधिकार केवल स्थायी निवासियों को दिया जाना चाहिए। यह संवैधानिक और कानूनी रूप से उचित है। हमने यह भी मांग की कि हमारे पास पंचायतें और शहरी स्थानीय निकाय जैसी संस्थाएं हों। भूमि की पहचान करने की जिम्मेदारी पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों को दी जानी चाहिए।  

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