कश्मीर घाटी में पीडीपी से नहीं आरएसएस से लड़ रहा विपक्ष
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घाटी में दो सीटों के लिए हो रहे उपचुनावों में नेकां-कांग्रेस गठजोड़ बनाम पीडीपी के बीच ही सीधा मुकाबला है। भाजपा कहीं भी पिक्चर में नहीं है, लेकिन पूरा विपक्ष संघ तथा भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ रहा है। संघ को केंद्र बिंदु में रखकर पीडीपी पर हमले किए जा रहे हैं।
साथ ही कश्मीरियों को भविष्य के खतरे के प्रति आगाह करते हुए मतों के ध्रुवीकरण की कोशिशें की जा रही हैं। श्रीनगर से नेकां-कांग्रेस गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में नेकां अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला तो अनंतनाग से कांग्रेस अध्यक्ष जीए मीर चुनाव मैदान में हैं।
पीडीपी ने अनंतनाग से पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के पुत्र और मुख्यमंत्री महबूबा के भाई तसद्दुक मुफ्ती और श्रीनगर से नजीर अहमद पर दांव लगाया है। इन दोनों सीटों पर पीडीपी का ही कब्जा रहा था। अब पीडीपी से दोनों सीटें हथियाने के लिए विपक्ष ने साझा प्लेटफार्म तैयार करने के साथ ही संघ को हथियार बनाया है।
लगातार सभाओं में संघ के खिलाफ बोल रहे फारूक अब्दुल्ला
फारूक अब्दुल्ला लगातार सभाओं में संघ के खिलाफ बोल रहे हैं। यह कहा जा रहा है कि पीडीपी ने ही गठबंधन कर घाटी में संघ को पैर पसारने का मौका दिया है। धीरे-धीरे घाटी में भी संघ का एजेंडा लागू कर दिया जाएगा जो कश्मीरियों के लिए खतरे की घंटी होगी।
कांग्रेस की ओर से भी अवाम के बीच ऐसा ही प्रचारित किया जा रहा है। गठबंधन सरकार को आम कश्मीरियों की भावनाओं और हितों के खिलाफ बताकर मतदाताओं को गोलबंद करने की कोशिशें की जा रही हैं।
नेकां के महासचिव अली मोहम्मद सागर का कहना है कि पीडीपी-भाजपा गठबंधन ने आम लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सत्ता की खातिर आरएसएस के सामने घुटने टेक चुकी हैं।