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फर्जी एनकाउंटर के फैसले पर पर क्या बोले उमर
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 13 Nov 2014 04:15 PM IST
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माच्छिल फर्जी एनकाउंटर मामले में रियासत के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करते हुए सेना के फैसले का स्वागत किया है। उमर ने सेना द्वारा दिए गए फैसले के बाद अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा, यह एक ऐतिहासिक पल है, सेना ने माच्छिल 2010 फर्जी एनकाउंटर में कमांडिंग ऑफिसर समेत सात लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई है।
इस फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए। कश्मीर घाटी में किसी को भरोसा नहीं था कि इस मामले में पीड़ितों को कभी इनसाफ मिल भी पाएगा या नहीं। इस मामले के बाद से घाटी में सेना का विरोध और तेज हो गया था। लोगों का सेना के साथ ही कानून पर से भी भरोसा उठ गया था और लगा था कि कभी न्याय नहीं मिलेगा। मैं उम्मीद करता हूं की घाटी में माच्छिल फर्जी एनकाउंटर जैसी कोई भी घटना कभी ना हो और जिन लोगों के चलते ऐसा हुआ है यह फैसला उनके लिए एक चेतावनी है।
बता दें कि फर्जी एनकाउंटर मामले में 30 अप्रैल 2010 को सेना के दो अधिकारियों ने नौ जवानों के साथ मिलकर तीन कश्मीरी युवकों की हत्या करके उन्हें पाकिस्तानी आतंकी घोषित कर दिया था। जब मामले की जांच हुई तो पता चला की तीनों के परिजनों ने 27 अप्रैल को ही तीनों की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसके बाद तीनों के शवों को कब्र से निकाला गया और घर वालों ने उनकी शिनाख्त की।
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जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सेना के अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। मामले में सेना ने भी कोर्ट ऑफ इंक्वायरी सैटअप की थी। सेना की जांच में दो अधिकारी समेत पांच जवानों को दोषी पाया गया और सभी आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है।
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इस फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए। कश्मीर घाटी में किसी को भरोसा नहीं था कि इस मामले में पीड़ितों को कभी इनसाफ मिल भी पाएगा या नहीं। इस मामले के बाद से घाटी में सेना का विरोध और तेज हो गया था। लोगों का सेना के साथ ही कानून पर से भी भरोसा उठ गया था और लगा था कि कभी न्याय नहीं मिलेगा। मैं उम्मीद करता हूं की घाटी में माच्छिल फर्जी एनकाउंटर जैसी कोई भी घटना कभी ना हो और जिन लोगों के चलते ऐसा हुआ है यह फैसला उनके लिए एक चेतावनी है।
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बता दें कि फर्जी एनकाउंटर मामले में 30 अप्रैल 2010 को सेना के दो अधिकारियों ने नौ जवानों के साथ मिलकर तीन कश्मीरी युवकों की हत्या करके उन्हें पाकिस्तानी आतंकी घोषित कर दिया था। जब मामले की जांच हुई तो पता चला की तीनों के परिजनों ने 27 अप्रैल को ही तीनों की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसके बाद तीनों के शवों को कब्र से निकाला गया और घर वालों ने उनकी शिनाख्त की।
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जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सेना के अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। मामले में सेना ने भी कोर्ट ऑफ इंक्वायरी सैटअप की थी। सेना की जांच में दो अधिकारी समेत पांच जवानों को दोषी पाया गया और सभी आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है।