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सरकारों ने जम्मू-कश्मीर को बनाया जंग का मैदान: उमर अब्दुल्ला

Sun, 11 Jun 2017 10:38 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली,अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली,अमर उजाला/श्रीनगर Updated Sun, 11 Jun 2017 10:38 PM IST
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omar abdullah targets government for non action in jammu and kashmir
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला - फोटो : File Photo

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रियासत की गठबंधन सरकार पर हमले करते हुए कहा कि सरकार ने इसे जंग का मैदान बना दिया है। केंद्र के मंत्री कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर जंग का मैदान है जहां कमांडर को खुली छूट है। सरकार को यह सोचना चाहिए इसे जंग का मैदान किसने बनाया। 

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उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में श्रीनगर से 35-40 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया तो क्या ये जंग का मैदान था। 2014 और 2017 में ऐसा क्या बदला कि आज केंद्र के मंत्रियों को जम्मू कश्मीर जंग का मैदान नजर आता है। रियासत को जंग का मैदान गठबंधन सरकार ने बनाया है। सियासत के फायदे के लिए दो ऐसी पार्टियां साथ आईं, जिन्हें कभी मिलना ही नहीं चाहिए था।
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जनता ने इसे स्वीकार नहीं किया। अनंतनाग चुनाव का रद्द होना सामान्य बात नहीं है। उन्होंने कहा कि 1990 से लेकर आज तक हमेशा हुर्रियत की रियासत में चुनाव न कराने की कोशिश रही है। जब भी चुनाव घोषित हुए हुर्रियत ने बायकॉट की कॉल दी, लेकिन हमने उसका मुकाबला किया। यह पहली बार हुआ कि हुर्रियत के आगे सरकार झुकी और चुनाव बहिष्कार के कॉल पर दिल्ली को चुनाव रद्द करना पड़ा।

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'पहली बार सड़कों पर उतरी हैं लड़कियां'

omar abdullah targets government for non action in jammu and kashmir
उमर अब्दुल्ला - फोटो : File Photo

उमर ने कहा कि ढाई साल हो गए, लेकिन एक वादा पूरा नहीं हुआ। एजेंडा आफ एलायंस पर काम नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि हम उनसे बात नहीं करेंगे जो संविधान के दायरे से बाहर हो। अगर ऐसा ही करना था तो एजेंडा आफ एलायंस में सभी पक्षकारों से बातचीत किए जाने की बात क्यों लिखी गई।

पहली बार ऐसा हुआ है कि स्कूल, कालेज जंग का मैदान बने हैं। उन्हें याद नहीं कि पिछले 30 साल में कभी लड़कियां सड़क पर उतरी हों। लड़कियां बुलेट प्रूफ गाड़ियों को लात मार रही हैं। यह जानते हुए भी जिस पर गोली का असर नहीं होता है उस पर लात का क्या असर होगा लेकिन यह गुस्सा है।

उन्होंने कहा कि महबूबा ने लड़कियों के लिए ट्रेन चलाई, स्कूटियां दीं, लेकिन इन सब का क्या फायदा जब वे इनसे बात तक नहीं करतीं। यदि वे सीएम होते तो महिला कालेज में जाकर लड़कियों से बात करते और समस्या समाधान की कोशिश करते। 

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