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आतंक को साफ संदेश: 'कायराना हरकतों से हम नहीं डरने वाले', पहलगाम में पाकिस्तान पर बरसे सीएम उमर अब्दुल्ला

Wed, 28 May 2025 12:13 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 28 May 2025 12:13 AM IST
सार

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पहलगाम में कैबिनेट की बैठक की। उमर सरकार के कार्यकाल में यह पहली बार है जब कैबिनेट की बैठक सामान्य ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर या शीतकालीन राजधानी जम्मू से बाहर हुई है। इसके जरिये पाकिस्तान और आतंकवादियों को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई कि उनके कायराना हरकतों से हम नहीं डरने वाले।

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Omar Abdullah held a cabinet meeting in Pahalgam
उमर सरकार ने पहलगाम में की कैबिनेट बैठक - फोटो : @CM_JnK

विस्तार

जिस पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकियों ने गोलियां बरसाकर 26 बेगुनाहों की जान ली, उसी पहलगाम में उमर अब्दुल्ला सरकार ने मंगलवार को विशेष कैबिनेट बैठक की। यह महज एक बैठक भर नहीं थी, बल्कि इसके जरिये पाकिस्तान और आतंकवादियों को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई कि उनके कायराना हरकतों से हम नहीं डरने वाले।

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उमर सरकार के कार्यकाल में यह पहली बार है जब कैबिनेट की बैठक सामान्य ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर या शीतकालीन राजधानी जम्मू से बाहर हुई है। पहलगाम क्लब को बैठक के लिए चुनने का उद्देश्य पर्यटन नगरी के निवासियों के साथ एकजुटता दिखाना है, जहां आतंकवादी हमले के बाद से पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। हमले में मारे गए 26 लोगों में से अधिकतर पर्यटक थे।

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मुख्यमंत्री कार्यालय ने तस्वीरें पोस्ट कीं
मुख्यमंत्री कार्यालय ने पहलगाम क्लब में आयोजित बैठक की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं। लिखा-आज (मंगलवार को) पहलगाम में एक कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की। यह केवल एक नियमित प्रशासनिक अभ्यास नहीं था, बल्कि एक स्पष्ट संदेश था - हम आतंक के कायराना कृत्यों से भयभीत नहीं हैं। शांति के दुश्मन कभी भी हमारे संकल्प को प्रभावित नहीं कर पाएंगे। जम्मू और कश्मीर दृढ़, मजबूत और निडर है। बाद में पहलगाम में अमरनाथ यात्रियों की भीड़ के बीच पर्यटकों को दिक्कत के सवाल पर उमर ने कहा, मुझे नहीं लगता कि अमरनाथ यात्रा से कश्मीर में पर्यटकों को कोई परेशानी होगी। कश्मीर घाटी में सिर्फ पहलगाम ही नहीं है, और भी जगह हैं घूमने की। श्रीनगर, गुलमर्ग, यूसमर्ग पर्यटकों के लिए खुला है। अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए पूछे गए सवाल के जवाब में उमर ने कहा कि हम चाहेंगे कि यात्रा सकुशल हो, यह हमेशा हमारी कोशिश रही है, आगे भी रहेगी।

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अपने पूर्व के कार्यकाल में उमर कई इलाकों में कर चुके हैं कैबिनेट की बैठकें
अब्दुल्ला ने 2009-14 तक जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री रहने के दौरान उत्तर कश्मीर के गुरेज, माछिल, तंगधार क्षेत्रों और जम्मू क्षेत्र के राजोरी और पुंछ क्षेत्रों जैसे दूरदराज के इलाकों में कैबिनेट की बैठकें की थीं। विशेष कैबिनेट बैठक आयोजित करने का निर्णय अब्दुल्ला ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर पर्यटन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए प्रस्ताव देने के तीन दिन बाद आया।

भरोसा जगेगा...पर्यटन बढ़ेगा
उमर अब्दुल्ला ने इससे पहले केंद्र से पीएसयू को कश्मीर में बैठकें आयोजित करने और संसदीय समिति की यहां बैठकें आयोजित करने का निर्देश देने का भी आग्रह किया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में इसको लेकर अपील की थी। मुख्यमंत्री ने इसके जरिये बताने की कोशिश की थी कि सरकार के इन ठोस प्रयासों से लोगों का डर काफी हद तक कम होगा, सुरक्षा और विश्वास की नई भावना पैदा होगी। इससे कश्मीर घाटी में पर्यटन उद्योग पटरी पर आएगा और आर्थिक राहत मिलेगी।

पीएम ने भी दिया है मदद का भरोसा
सीएम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में टूरिज्म फिर से चालू हो, इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक की। दो दिन पहले नीति आयोग की बैठक में मैंने भी पीएम से पर्यटन को फिर से शुरू करने पर बात की। उन्होंने मदद का भरोसा दिया है। सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बिना सुरक्षा का भरोसा दिए पर्यटन नहीं बढ़ सकता। पर्यटन हमारी जिम्मेदारी है, सुरक्षा केंद्र की। यहां तीन सरकारों को मिलकर काम करना होगा। जम्मू कश्मीर की चुनी हुई सरकार, बिना चुनी सरकार और केंद्र सरकार।

बंद 48 पर्यटन स्थल खोले जाएंगे 
बंद पर्यटन स्थलो के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि यह सवाल सबसे ज्यादा जरूरी है। बायसरन हमले के बाद यह तय किया गया था कि कुछ जगहों का सुरक्षा ऑडिट करना होगा। इस पर पहलगाम में बेताब घाटी सहित कई जगह रोक लगाई गई। श्रीनगर में ट्यूलिप गार्डन पर रोक लगाई। मेरा मानना है कि अगर ट्यूलिप गार्डन पर प्रतिबंध लगाया तो पूरा कश्मीर ही बंद करना पड़ेगा। बंद 48 जगहों में से जिन्हें खोला जा सकता है।

विशेष विधानसभा सत्र से लेकर कैबिनेट बैठक तक..
प्रदेश सरकार ने 28 अप्रैल को जम्मू में एक दिन का विशेष विधानसभा सत्र आयोजित कर सर्वसम्मति से पहलगाम आतंकवादी हमले के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। प्रस्ताव में कहा गया था, जम्मू-कश्मीर की विधानसभा अपने सभी नागरिकों के लिए शांति, विकास और समावेशी समृद्धि का माहौल बनाने और देश और जम्मू-कश्मीर के सांप्रदायिक सद्भाव और प्रगति को बाधित करने की कोशिश करने वालों के नापाक इरादों को दृढ़ता से हराने के लिए अपनी अटूट प्रतिबद्धता जताती है। अब्दुल्ला ने अपने 26 मिनट के भावुक भाषण में कहा था कि वह इस आतंकवादी हमले का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए दबाव बनाने के अवसर के रूप में नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि वह सस्ती राजनीति में विश्वास नहीं करते।

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