बाढ़ राहत के लिए पीएम से मिले सर्वदलीय टीम: उमर
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बाढ़ राहत और पुनर्वास के विशेष पैकेज के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास सर्वदलीय टीम भेजने का प्रस्ताव रखा है। विधानसभा में बाढ़ और बारिश से हुए नुकसान पर विशेष चर्चा के क्रम में उमर ने कहा कि उनका सरकार ने केंद्र के पास 44 हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज के लिए प्रस्ताव भेजा था, जो रियासत को अब तक हासिल नहीं हुआ है।
पिछले साल की बाढ़ ने रियासत की आर्थिक सेहत बिगाड़ दी। हर क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ। इसलिए विशेष पैकेज जरूरी है। इस साल की बारिश ने समस्या बढ़ाई है। उमर ने कहा कि मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद अगर किसी सर्वदलीय टीम के लिए प्रयास शुरू करते हैं तो नेशनल कांफ्रेंस उसमें शिरकत करेगी। नेकां टीम में शामिल होकर पीएम के पास विशेष पैकेज की मांग करेगी।
तमाम समस्याओं के लिए 44 हजार करोड़ का पैकेज ही एकमात्र समाधान है। उस प्रस्ताव में किसी कटौती की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि प्रस्ताव सभी क्षेत्रों के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। केंद्र द्वारा किस्तों में राशि आवंटित करने पर ऐतराज करते हुए उमर ने कहा कि एकमुश्त पैकेज की जरत है। उन्होंने बाढ़ राहत में भेदभाव का भी आरोप लगाया।
किसानों को मिले फसलों का मुआवजा
उमर ने कहा कि राहत का वितरण गलत तरीके से हो रहा है। सत्ताधारी दल अपने वर्करों को फायदा दे रहा है। राहत राशि सीधे पीड़ितों के एकाउंट में जमा कराई जानी चाहिए। उमर ने कहा कि इस बार की बाढ़ के बारे में मंत्रियों के बयान अलग-अलग हैं। कोई मंत्री इसे जल जमाव कह रहे हैं तो कोई इसे बाढ़ की संज्ञा दे रहे हैं।
सरकार को यह बताना चाहिए वह इस बार श्रीनगर में घुसे पानी को बाढ़ मानती है या नहीं। उन्होंने बाढ़ के दृष्टिकोण से संवेदनशील इलाकों में अवैध निर्माण पर कार्रवाई पर भी जोर दिया। वहीं, भाजपा विधायक राजीव जसरोटिया ने कहा कि जम्मू संभाग में भारी बारिश से किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
कठुआ के कई इलाकों में हालत खराब है। किसानों की फसलें तबाह हो गई हैं। उनके सामने जीविका का सवाल खड़ा हुआ है। किसानों को तुरंत मुआवजा दिया जाना चाहिए। कंडी इलाके में हालत और खराब हैं। सरकार को तुरंत कदम उठाकर राहत तेज करनी चाहिए। बाढ़ और बारिश पर विशेष चर्चा में एक दर्जन से अधिक विधायकों ने हिस्सा लिया।
दरकते पहाड़ों के पीड़ित मांग रहे मदद
रामबन क्षेत्र के कई इलाकों में पहाड़ों के दरकने से बेघर हुए लोगों का मामला विधायक नीलम लंगेह ने विधानसभा में जोरदार ढंग से उठाया। लंगेह ने कहा कि बिना छत के मैदानों में रहने को मजबूर लोग सरकार की ओर मदद की आस के साथ देख रहे हैं। सरकार को उन्हें तत्काल मदद करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि रामबन विधानसभा क्षेत्र में 500 से ज्यादा घरों को खाली करवा दिया गया है। कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ठंड के मौसम में लोगों के पास न तो राशन है और न ही कंबल वगैरह। उन्होंने सरकार से मांग की कि मैदानों में समय बिता रहे लोगों को तत्काल टेंट, राशन और कंबल वगैरह मुहैया करवाएं जाएं, ताकि संकट के समय में उन्हें राहत मिल सके।
विधायक ने सदन में कहा कि देसा, शिंकली, मिलान, गुरमुल, गई, ललूर, चिल, गागला, राजगढ़, गढ़ी, कुमेत, धर्मकुंड, धुथन, टंगेर, सरनासर, धर्मकुंड डक, जटकली, अस्सर कोरा पानी जैसे क्षेत्रों में लोगों का बुरा हाल है। उन्होंने सरकार से कहा कि प्रभावितों का जल्द सर्वे करवाकर उन्हें मदद दी जाए। उन्होंने दिवाल कुंड देसा में एक ही परिवार के सात लोगों की मौत पर गहरा दुख जताया।