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जम्मू-कश्मीर पहुंचे पहलवान रवि दाहिया: बोले- मेहनत से साकार होते हैं सपने, युवाओं को दिया जीत का ये मंत्र
Mon, 23 Aug 2021 04:12 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Trainee Trainee
Updated Mon, 23 Aug 2021 04:12 PM IST
सार
रवि दाहिया आदर्श एनक्लेव त्रिकुटा नगर में एक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने युवाओं को रजत पदक जीतने के बारे में विस्तार में बताया।
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रजत पदक विजेता रवि दाहिया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
टोक्यो ओलंपिक में कुश्ती के 57 किलोग्राम वेट कैटेगरी में देश को रजत पदक दिलाने वाले पहलवान रवि कुमार दहिया शारीरिक प्रशिक्षण के साथ मानसिक मजबूती को जीत का मंत्र मानते हैं। सोमवार को जम्मू में अपने स्पोर्ट्स मोटीवेटर विक्रांत महाजन से मिलने जम्मू पहुंचे रवि ने कहा कि मानसिक मजबूती ने उन्हें देश के लिए ओलंपिक पदक जीतने में सक्षम बनाया। यह मानसिक मजबूती जम्मू के विक्रांत महाजन के संपर्क में रहने से मिली। वे चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी भी देश के लिए मेडल लाएं।
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रवि दहिया ने कहा कि ओलंपिक जैसे बड़े खेल मंचों पर बेहतर प्रदर्शन और पदक जीतने के लिए खिलाड़ियों को मानसिक रूप से तैयार करने की ज्यादा जरूरत है। देश के लिए पदक जीतना हर खिलाड़ी का सपना होता है। ढाई साल पहले दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में उनकी विक्रम से मुलाकात हुई थी। इसके बाद से विक्रांत उन्हें प्रतिदिन आधा घंटा असाधारण और विपरीत परिस्थितियों में पदक जीतने के लिए प्रेरित करते थे।
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रवि दहिया ने कहा कि खिलाड़ी के जीवन में बेहतर करने की प्रेरणा की बड़ी भूमिका होती है। यह प्रेरणा निराशा के वातावरण से व्यक्ति को बाहर निकालने में मदद करती है। रवि ने कहा - कोरोना के समय से लेकर ओलंपिक में पदक जीतने तक विक्रांत महाजन ने हमेशा मेरी तैयारी को दिशा दिखाई। मुझे सिर्फ इस बात का मलाल है कि मैं देश के लिए स्वर्ण नहीं जीत सका। अपनी मेहनत पर विश्वास है कि अगली प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतूंगा। खिलाड़ी के पदक जीतने में कोच और फेडरेशन का योगदान तो होता ही है, लेकिन स्पोर्ट्स मोटिवेटर की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण होती है।
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प्रतिदिन आधे घंटे की व्हाट्सएप कॉल से मजबूत की जीत की नींव
देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतने में रवि दहिया की मेहनत के साथ जम्मू के स्पोर्ट्स मोटिवेटर विक्रांत महाजन का बड़ा योगदान है। विक्रांत ढाई साल से रवि को मानसिक रूप से तैयार करने के साथ-साथ उन्हें स्वर्ण पदक जीतने के लिए प्रेरित कर रहे थे। विक्रांत की प्रेरणा और रवि की मेहनत ने देश को कुश्ती में पदक दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
विक्रांत महाजन जम्मू के त्रिकुटा नगर के रहने वाले हैं। वह लंबे समय से गोललीट कार्यक्रम चला रहे हैं। गोललीट गोल और एथलीट से बना शब्द है। विक्रांत ने 2019 से रवि दहिया को मोटिवेशनल ट्रेनिंग देनी शुरू की थी। विक्रांत ने मोेटिवेशन पर कई पुस्तकें भी लिखी हैं। उन्होंने कहा कि रवि से ढाई वर्ष पहले छत्रसाल स्टेडियम में मुलाकात हुई थी। जब कोरोना ने हमें घरों में बंद किया तो मैं रवि से व्हाट्सएप कॉल से जुड़ा। रोज तकरीबन आधे घंटे रवि से बात होती थी। इसमें हर उस विषय पर चर्चा होती, जिसमें हमें लगता कि वह हमारे मेडल जीतने में अड़चन बन सकती है। मैं उन्हें विश्व के ऐसे एथलीट की कहानी बताता था, जिन्होंने असाधारण और विपरीत परिस्थितियों में अपने देश के लिए मेडल जीते।
उन्होंने कहा कि रवि ढाई साल पहले भी अपने खेल के प्रति उतना ही जुनून रखते थे, जितना हमने उन्हें ओलंपिक में देखा। विक्रांत ने कहा कि ओलंपिक से पहले मैंने छह पदक जीतने का एक लक्ष्य बनाकर केंद्रीय खेल विभाग के समक्ष रखा था, लेकिन सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद मैंने इस पूरी प्रक्रिया को खुद से आगे बढ़ाया और बिना किसी वित्तीय मदद इसे जारी रखा। सरकार को अब स्पोर्ट्स मोटिवेटर की भूमिका को पहचानना होगा। विक्रांत महाजन ने कहा - मेरा लक्ष्य 2024 के ओलंपिक के लिए खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत करना है, ताकि देश पांच से अधिक स्वर्ण पदक जीत सके।