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‘सरकारी दफ्तर का एक दिन’ में टूटा अनुशासन
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Mon, 27 Oct 2014 10:26 AM IST
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नटरंग थियेटर ने संडे थियेटर संस्करण के तहत रविवार को ‘सरकारी दफ्तर का एक दिन नाटक’ का मंचन किया। लक्ष्मीकांत वैष्णव द्वारा लिखे गये नाटक का निर्देशन नीरजकांत ने किया। नाटक में कलाकारों ने सरकारी दफ्तरों में कार्य करने वाले सरकारी मुलाजिमों की कार्य प्रणाली और अन्य दृश्यों को बड़ी बखूबी के साथ चित्रित किया।
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नाटक में कलाकारों ने दिखाया कि किस तरह से सरकारी कार्यालयों में मुलाजिम बिना अनुशासन और डर के कार्य कर रहे हैं। दूसरी ओर अगर किसी मुलाजिम की गलती भी हो तो वह भाई भतीजावाद का सहारा लेकर अपना काम निकलवा लेते हैं।
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नाटक की कहानी एक ऐसे सरकारी दफ्तर के इर्द गिर्द घूमती है जिसमें हर मुलाजिम अपने तौर तरीके से काम करना पसंद करते हैं साथ ही अपनी मनमर्जी के आधार पर अपने दफ्तर में हाजिरी लगाते हैं।
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नाटक की कहानी आगे बढ़ती है तभी विजीलेंस आफिसर दफ्तर में छापा मारकर गैरहाजिर कर्मचारियों को सस्पेंड कर देते हैं। नाटक में सुशील रैना, राजन थकयाल, सचिन बांबा, अभिशेक खजूरिया, शेखर शर्मा, रविंद्र मन्हास, अमित रैना ने मुख्य भूमिका निभायी।