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Kashmir: अब कश्मीर की वादियों में गूंजेगी आदि अष्टकम की स्वर लहरी, देशभर के कलाकार देंगे नृत्य सेवा
Tue, 31 Mar 2026 01:22 PM IST
Nikita Gupta
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: Nikita Gupta
Updated Tue, 31 Mar 2026 01:22 PM IST
सार
आदि शंकराचार्य की जयंती पर 21 अप्रैल को कश्मीर के टैगोर हाल में देशभर के कलाकार ‘आदि अष्टकम’ की स्वर लहरियों और नृत्य सेवा प्रस्तुत करेंगे।
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कार्यक्रम क्यूरेटर उषा आरके।
- फोटो : स्वयं
विस्तार
देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को नई ऊर्जा देने की दिशा में एक और पहल सामने आई है। काशी में गूंजने के बाद अब शंकराचार्य की ओर से रचित ‘आदि अष्टकम’ की स्वर लहरियां कश्मीर की वादियों में भी सुनाई देंगी। आदि शंकराचार्य की जयंती पर 21 अप्रैल को टैगोर हाल में पांच अष्टकम पर देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकार नृत्य सेवा देंगे।
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इस पहल को आध्यात्मिक एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश के संस्कृति विभाग और सेवा शारदा कमेटी कश्मीर (पंजीकृत) की ओर से इसका आयोजन होगा। कार्यक्रम की क्यूरेटर हैं बंगलूरू निवासी मास्को में भारतीय दूतावास के जवाहरलाल नेहरू सांस्कृतिक केंद्र की पूर्व निदेशक उषा आरके। उषा कहती हैं कि आदि अष्टकम जो भारतीय सनातन परंपरा का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र माना जाता है।
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इसे कश्मीर के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में आध्यात्मिक विरासत को जोड़ना और नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराना है। इस कड़ी में पांच कलाकार पहले टैगोर हाल और अगले दिन टीटवाल के शारदा मंदिर में नृत्य सेवा देंगे। सेवा शारदा समिति के रविन्द्र पंडिता कहते हैं कि काशी से कश्मीर तक ‘आदि अष्टकम’ की यह यात्रा भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक विरासत को नया आयाम देने की एक कोशिश है।
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पांच अष्टकम की प्रस्तुतियां देंगे
श्रेयांशी गोपीनाथ- शारदा भुजंगा अष्टकम पर प्रस्तुति देंगी। गंगा अष्टकम पर नम्रता मेहता, कालभैरव अष्टकम पर मिथुन श्याम,पांडुरंगा अष्टकम पर स्याली काने और अरुधंती पटवर्धन गुरु अष्टकम पर प्रस्तुति देंगी। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित अष्टकम (आठ श्लोकों वाली स्तुति) स्तोत्र साहित्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित है।