आतंकियों के खिलाफ 27 दिन बाद खत्म हुआ कुपवाड़ा आपरेशन
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कुपवाड़ा के जंगलों में आतंकियों के खिलाफ 27 दिन पहले सेना की ओर से शुरू किए गए आपरेशन को बुधवार को सेना ने समाप्त करने की घोषणा कर दी।
श्रीनगर स्थित सेना की 15 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने कहा कि आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे आपरेशन को अनिश्चितकाल के लिए नहीं चलाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि आतंकी जंगल में घात लगाकर बैठे हैं। उन्हें गोली चलाने के लिए कुछ सोचना नहीं पड़ता, पर सेना को तमाम परिस्थितियों का ख्याल रखना पड़ता है।
इस बात का भी ख्याल रखना पड़ता है कि इसमें किसी निर्दोष को नुकसान न पहुंचे और साथ ही आतंकियों की घेराबंदी के दौरान घने जंगल में कहीं जवान गलतफहमी में आपस में ही फायरिंग न कर बैठें।
अब तक चले सबसे लंबे आपरेशनों में से एक
उल्लेखनीय है कि 30 अक्तूबर की रात एलओसी पार से घुसपैठ कर भारतीय क्षेत्र में घुसे आतंकियों से मुठभेड़ में सेना के एक कर्नल और एक जवान शहीद हो चुके हैं। जवानों ने भी हालांकि दो आतंकियों को मार गिराया है।
बुधवार को जीओसी दुआ के द्वारा आपरेशन समाप्त करने की घोषणा के साथ ही आतंकियों के खिलाफ अब तक चले सबसे लंबे आपरेशनों में से एक आपरेशन को समाप्त कर दिया गया।
कुपवाड़ा के जंगलों में आतंकियों के छिपे होने के बारे में जीओसी का कहना था कि हमें अभी तक आतंकी मिले नहीं हैं, पर वे यहीं कहीं छिपे हो सकते हैं। उन्होंने साफ किया कि इलाके में आतंकियों के खिलाफ रूटीन में जो आपरेशन किए जाते हैं वो जारी रहेंगे।
सेना पर लगे ये आरोप
जीओसी ने इस बात को खारिज किया कि सेना द्वारा इलाके के लोगों को रूटीन के काम करने से रोका गया। उन्होंने कहा कि आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई जारी होने के चलते लोगों को सिर्फ जंगल की ओर जाने से रोका गया था।
बांडीपोरा जिले में आतंकियों के खिलाफ जारी आपरेशन के संबंध में जीओसी ने कहा कि वहां आतंकियों की कुछ मूवमेंट दर्ज हुई है, इसके चलते वहां अभी आपरेशन जारी रहेगा।
एलओसी पार से घुसपैठ के संबंध में जीओसी का कहना था कि घुसपैठ पूरी तरह से बंद नहीं हुई है, पर इसमें बड़े पैमाने पर कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि अगर घुसपैठ की20 कोशिशें होती हैं तो इस दौरान कई बार एक-दो आतंकी घुसपैठ में सफल हो जाते हैं, जबकि अधिकतर मारे जाते हैं और कुछ पीछे भाग जाते हैं।