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Jammu News: चंद मिनट में जल गई जमा पूंजी, बचा तो सिर्फ तन पर कपड़ा, लोहे की टिनें
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-पेड़ों के नीचे बैठकर गुजार रहे वक्त, सबकुछ जल जाने से रोजी रोटी के भी लाले
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बच्चे राख में कुछ ढूंढ रहे थे। शायद घर में रखे चंद सिक्के ही मिल जाएं। महिलाएं भी बचा खुचा सामान तलाश रही थीं। हर जगह सिर्फ राख ही राख नजर आ रही थी। कहीं कुछ भी नहीं बचा। कुछ बचा है तो सिर्फ लोहे की टिनें। यह दृश्य त्रिकुटा नगर स्थित मराठा बस्ती का है जहां रविवार देर शाम को आग लग गई।
पास मौजूद पेड़ों की छांव में कुछ लोग बैठे थे। सबके चेहरों पर उदासी थी। यही चिंता खाए जा रही थी कि अब आगे क्या? सबकी जुबान पर एक ही बात है कि कहीं कुछ नहीं बचा। सबकुछ जलकर राख हो गया। सिर्फ कुछ बचा है तो राख में लिपटी टेढ़ी-मेढ़ी हो चुकी टिनें और तन पर पहने कपड़े। यहां रविवार देर शाम को आग लगने से 10 मिनट में ही बस्ती में बनी 40 झुग्गियां जलकर राख हो गईं। किसी तरह से लोगों ने भाग कर अपनी जान बचाई। इन झुग्गियों में रहने वाले तमाम लोग अब बेघर हैं। जो पेड़ों के नीचे बैठ कर अपना समय निकाल रहे हैं। सब इस पशोपेश में हैं कि आगे क्या होगा।
2800 किराया देता था, कूलर-एलईडी सब राख हो गया
हरियाणा का रहने वाला किरण कुमार अपने छह बच्चों के साथ मराठा बस्ती में रहता है। वह झुग्गी के लिए 2800 रुपये प्रति माह किराया भी देता था। किरण का कहना है कि वह पेंटर है। सबसे बड़ी झुग्गी उसी ने बना रखी थी। जिसमें कूलर, दो एलईडी, फ्रिज समेत काफी सामान था। शाम के छह बजे हुए थे। अचानक से आग झुग्गी में लग गई। किसी तरह से वह अपनी तीन बेटियों और बेटों को पत्नी के साथ बाहर निकला। बीती रात खुली छत के नीचे गुजारी थी। अब आगे समझ नहीं आ रहा, क्या होगा।
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एक सिलाई मशीन ही बची
हसीना सिंजाली लोहे की टिन को उठाकर इसके नीचे दबी एक सिलाई मशीन लेकर आ रही थी। हसीना ने बताया कि पूरे सामान में से सिर्फ एक यहीं बची है। इसका भी लोहे का हिस्सा बचा हुआ है। बाकी तो सब जल गया। तारिक और मोहम्मद रफीक ने बताया कि उनका परिवार और वे लोग साथ ही थे। एकदम से आग आई। किसी तरह से वे जान बचाकर बाहर भागे।
कोई नहीं आया मदद करने के लिए
मराठा बस्ती में 40 झुग्गियां थीं। स्थानीय निवासी कहते हैं कि यह लोग अवैध रूप से बसाए गए हैं। कुछ लोग रोहिंग्या हैं। कुछ पंजाब और हरियाणा के मजदूर। आग में सबकुछ गंवाने वाले लोगों की मदद के लिए कोई नहीं पहुंचा। किसी तरह से लोग अपना गुजारा कर रहे हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बच्चे राख में कुछ ढूंढ रहे थे। शायद घर में रखे चंद सिक्के ही मिल जाएं। महिलाएं भी बचा खुचा सामान तलाश रही थीं। हर जगह सिर्फ राख ही राख नजर आ रही थी। कहीं कुछ भी नहीं बचा। कुछ बचा है तो सिर्फ लोहे की टिनें। यह दृश्य त्रिकुटा नगर स्थित मराठा बस्ती का है जहां रविवार देर शाम को आग लग गई।
पास मौजूद पेड़ों की छांव में कुछ लोग बैठे थे। सबके चेहरों पर उदासी थी। यही चिंता खाए जा रही थी कि अब आगे क्या? सबकी जुबान पर एक ही बात है कि कहीं कुछ नहीं बचा। सबकुछ जलकर राख हो गया। सिर्फ कुछ बचा है तो राख में लिपटी टेढ़ी-मेढ़ी हो चुकी टिनें और तन पर पहने कपड़े। यहां रविवार देर शाम को आग लगने से 10 मिनट में ही बस्ती में बनी 40 झुग्गियां जलकर राख हो गईं। किसी तरह से लोगों ने भाग कर अपनी जान बचाई। इन झुग्गियों में रहने वाले तमाम लोग अब बेघर हैं। जो पेड़ों के नीचे बैठ कर अपना समय निकाल रहे हैं। सब इस पशोपेश में हैं कि आगे क्या होगा।
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2800 किराया देता था, कूलर-एलईडी सब राख हो गया
हरियाणा का रहने वाला किरण कुमार अपने छह बच्चों के साथ मराठा बस्ती में रहता है। वह झुग्गी के लिए 2800 रुपये प्रति माह किराया भी देता था। किरण का कहना है कि वह पेंटर है। सबसे बड़ी झुग्गी उसी ने बना रखी थी। जिसमें कूलर, दो एलईडी, फ्रिज समेत काफी सामान था। शाम के छह बजे हुए थे। अचानक से आग झुग्गी में लग गई। किसी तरह से वह अपनी तीन बेटियों और बेटों को पत्नी के साथ बाहर निकला। बीती रात खुली छत के नीचे गुजारी थी। अब आगे समझ नहीं आ रहा, क्या होगा।
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एक सिलाई मशीन ही बची
हसीना सिंजाली लोहे की टिन को उठाकर इसके नीचे दबी एक सिलाई मशीन लेकर आ रही थी। हसीना ने बताया कि पूरे सामान में से सिर्फ एक यहीं बची है। इसका भी लोहे का हिस्सा बचा हुआ है। बाकी तो सब जल गया। तारिक और मोहम्मद रफीक ने बताया कि उनका परिवार और वे लोग साथ ही थे। एकदम से आग आई। किसी तरह से वे जान बचाकर बाहर भागे।
कोई नहीं आया मदद करने के लिए
मराठा बस्ती में 40 झुग्गियां थीं। स्थानीय निवासी कहते हैं कि यह लोग अवैध रूप से बसाए गए हैं। कुछ लोग रोहिंग्या हैं। कुछ पंजाब और हरियाणा के मजदूर। आग में सबकुछ गंवाने वाले लोगों की मदद के लिए कोई नहीं पहुंचा। किसी तरह से लोग अपना गुजारा कर रहे हैं।