{"_id":"6843515bd3e8c447580d3e56","slug":"nirjala-ekadashi-in-kathua-jammu-news-c-201-1-knt1006-120794-2025-06-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: एकादशी पर निर्जला व्रत रख भक्तों ने की सुख-समृद्धि की कामना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: एकादशी पर निर्जला व्रत रख भक्तों ने की सुख-समृद्धि की कामना
Sat, 07 Jun 2025 02:06 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sat, 07 Jun 2025 02:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कठुआ। जिले में निर्जला एकादशी का पर्व शुक्रवार को धार्मिक आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस दौरान लोग दर्शन के लिए विभिन्न मंदिरों में पहुंचे। महिलाओं ने अन्न, जल, वस्त्र, जल से भरा कलश, फल सहित अन्य मौसमी फल दान किए। व्रत रख परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की।
पर्व के दौरान शहर में भक्तों ने कई जगह छबील लगाई। वहां आने-जाने वाले लोगों को शीतल पेय, ठंडा मीठा पानी, फलों का प्रसाद बांटा गया। इस दौरान कई भक्तों ने पूरा दिन बिना जल ग्रहण किए निर्जला एकादशी का व्रत किया।
गोविंदरसर स्थित नृसिंह देव मंदिर के महंत श्री 108 भगवान दास महाराज ने बताया कि शास्त्रों में निर्जला एकादशी व्रत का जिक्र मिलता है। जगत के पालक भगवान श्री विष्णु के चरणों में स्थान पाने की कामना से नारद मुनि ने सबसे पहले यह व्रत किया।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि पद्मपुराण के अनुसार इस एकादशी का निर्जल व्रत रखते हुए परमेश्वर श्रीविष्णु की भक्तिभाव से पूजा-आराधना करनी चाहिए। इससे प्राणी समस्त पापों से मुक्त होकर बैकुंठ लोक को प्राप्त होता है। बैकुंठ को भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के निवास स्थान विष्णुलोक भी कहते हैं। इस व्रत को देवव्रत भी कहा जाता है क्योंकि सभी देवता, दानव, नाग, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, नवग्रह आदि अपनी रक्षा और श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए एकादशी का व्रत करते हैं।
विज्ञापन
पर्व के दौरान शहर में भक्तों ने कई जगह छबील लगाई। वहां आने-जाने वाले लोगों को शीतल पेय, ठंडा मीठा पानी, फलों का प्रसाद बांटा गया। इस दौरान कई भक्तों ने पूरा दिन बिना जल ग्रहण किए निर्जला एकादशी का व्रत किया।
विज्ञापन
गोविंदरसर स्थित नृसिंह देव मंदिर के महंत श्री 108 भगवान दास महाराज ने बताया कि शास्त्रों में निर्जला एकादशी व्रत का जिक्र मिलता है। जगत के पालक भगवान श्री विष्णु के चरणों में स्थान पाने की कामना से नारद मुनि ने सबसे पहले यह व्रत किया।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि पद्मपुराण के अनुसार इस एकादशी का निर्जल व्रत रखते हुए परमेश्वर श्रीविष्णु की भक्तिभाव से पूजा-आराधना करनी चाहिए। इससे प्राणी समस्त पापों से मुक्त होकर बैकुंठ लोक को प्राप्त होता है। बैकुंठ को भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के निवास स्थान विष्णुलोक भी कहते हैं। इस व्रत को देवव्रत भी कहा जाता है क्योंकि सभी देवता, दानव, नाग, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, नवग्रह आदि अपनी रक्षा और श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए एकादशी का व्रत करते हैं।