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कभी शिवरात्रि के रंग में रंग जाती थी कश्मीर घाटी

Sat, 07 Feb 2015 07:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Sat, 07 Feb 2015 07:25 PM IST
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news story on kashmiri mahashivratri festival

महाशिवरात्रि का पर्व कश्मीरी पंडितों के लिए सबसे बड़ा पर्व है। कभी महाशिवरात्रि पर्व की कश्मीर की वादियों में अपनी खास पहचान थी। शिवरात्रि पर्व से 15 दिन पहले ही पूरी घाटी शिवरात्रि के रंग में रंगी हुई नजर आती थी।

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अखरोट की बिक्री कई गुणा बढ़ जाती थी। अब यह दिन कश्मीरी पंडितों के लिए यादें बन चुके हैं। करीब 19 वर्ष से कश्मीरी पंडित परिवार कश्मीर की हवा की खुशबु को सरकारी क्वार्टरों और शिविरों में महसूस करने को मजबूर हैं।
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शादी लाल पंडिता ने बताया कि महाशिवरात्रि के पर्व में पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों का सबसे अधिक महत्व है। अब यह बर्तन जम्मू और अन्य राज्यों में नहीं मिलते हैं। कश्मीर में इन बर्तनों को बनाने के लिए कारीगरों को महाशिवरात्रि से पहले ही आर्डर दे दिया जाता है।
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वटक नाम के बर्तनों में अखरोट भिगोए जाते थे। तीन दिन तक घरों में शिवरात्रि पूजन चलता था। हालांकि अब भी क्वार्टरों में रहने के बावजूद पूरे रीति-रिवाज के साथ शिवरात्रि  पर्व मनाते हैं, लेकिन वह आनंद अब नहीं रहा।

 
अभी शिवरात्रि के लिए घरों की सफाई में लोग जुटे हैं। सफाई पूरी करने के बाद पूजन का सामान रखेंगे और साथ ही वर्तनों में अखरोट भिगोकर रखे जाएंगे। पूजन समाप्त होने के बाद अखरोट को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। जम्मू में तो कश्मीर की तरह बर्तन नहीं मिलेंगे। इसलिए सभी पीतल के बर्तनों को पूजन में इस्तेमाल करेंगे।

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