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बच्चों के भविष्य पर पाक गोलों का साया
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 06 Jan 2015 01:11 AM IST
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सांबा के विस्थापित शिविर से।
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तीन जनवरी को जब पाकिस्तान सांबा सेक्टर में गोले बरसा रहा था तब यहां रहने वाला ग्यारहवीं कक्षा का छात्र दीपक कुमार टी 1 की परीक्षा की तैयारी कर रहा था। रात भर उसने पढ़ाई की और अगले दिन परीक्षा देने जाना था, लेकिन सुबह होते ही पाकिस्तान की तरफ से गोलों की बरसात होने लगी।
जैसे तैसे दीपक अपने परिवार के साथ गांव से भागा। उसकी तरह ही गांव के 15 अन्य विद्यार्थियों की भी परीक्षा थी। नतीजतन सब विद्यार्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। सीमावर्ती बैनगलाड़ गांव के विद्यार्थी भी पढ़ाई और अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। पाक गोलाबारी से हर दूसरे तीसरे महीने उन्हें घर छोड़ना पड़ता है जिससे पढ़ाई बाधित होती है।
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तीन जनवरी को पाकिस्तान ने सांबा सेक्टर के 15 गांव को अपने गोलों का निशाना बनाया। इसकी वजह से गांववासियों को विस्थापित शिविरों में जाना पड़ा। यहां रहने वाले लोगों में सबसे ज्यादा चिंतित विद्यार्थी वर्ग है। दीपक की ही तरह 11वीं के छात्र राहुल, दसवीं कक्षा के आशु, नौंवी कक्षा के शम्मी ने अमर उजाला को बताया गोलाबारी से वे परीक्षा की सही ढंग से तैयारी नहीं कर पा रहे।
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पिछले छह महीने से कभी अपने घर तो कभी रिश्तेदारों और कभी विस्थापित शिविरों में रहना पड़ रहा है। इसकी वजह से पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहे। इससे अच्छे अंक नहीं ले पाएंगे। अच्छे अंक नहीं होंगे तो नौकरी भी नहीं मिलेगी। सांबा सेक्टर के करीब 15 गांव के लोगों को विस्थापित शिविरों में ठहराया गया है। इन गांव के हजारों विद्यार्थियों की परीक्षाओं पर पाक गोलाबारी का सबसे अधिक असर पड़ रहा है।