जम्मू बंद ने रोकी शहर की रफ्तार, लोगों को हुई परेशानी
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रियासत में गठबंधन सरकार बनने के बाद पहली बार आयोजित जम्मू बंद ने शहर की रफ्तार रोक दी। शहर के ज्यादातर बाजार बंद रहे। सड़कों से कामर्शियल वाहन नदारद रहे। इससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रेन यातायात पर बंद का कोई असर नहीं रहा, लेकिन वाहन न चलने के कारण यात्री परेशान रहे।
बैंक खुले, लेकिन बंद के कारण रौनक नजर नहीं आई। सरकारी दफ्तरों और शैक्षणिक संस्थानों में उपस्थिति न के बराबर रही। निजी स्कूलों ने पहले ही छुट्टी घोषित कर दी थी। रियासत की सबसे बड़ी होलसेल अनाज मंडी वेयर हाउस पूरी तरह से बंद रही। बार एसोसिएशन जम्मू के हड़ताल में शामिल होने के कारण अदालती कामकाज भी प्रभावित हुआ।
हालांकि, बंद के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन, डोगरा चौक पर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियों को पुलिस ने लाठियां भांजकर खदेड़ा। कई स्थानों पर सरकार के पुतले फूंककर रोष जताया गया। सांबा, कठुआ और उधमपुर में भी बंद का असर देखने को मिला।
जम्मू को मिले आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) को कश्मीर शिफ्ट करने के विरोध में चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज की ओर से बंद का आह्वान किया गया था।
सरकार ने बंद पर चुप्पी साधी
बंद को कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस, पैंथर्स पार्टी सहित कई सामाजिक संगठनों, ट्रांसपोर्टरों और व्यापारिक संगठनों ने समर्थन दिया। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद और गठबंधन सरकार में शामिल भाजपा की ओर से बंद पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
बंद को बजरंग दल, शिवसेना का भी समर्थन रहा, लेकिन उनमें एकजुटता नहीं दिखी। सभी दल अपने-अपने ढंग से अलग प्रदर्शन करते रहे। बजरंग दल ने पीडीपी और भाजपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शाम लाल शर्मा ने विशाल विरोध रैली निकाली।
इसमें चैंबर प्रेसीडेंट राकेश गुप्ता और नेकां नेता भी शामिल हुए। पैंथर्स नेता हर्षदेव सिंह ने स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टी एम्स को किसी भी हालत में जम्मू से कश्मीर नहीं जाने देगी। ज्वाइंट चैंबर आफ एलओसी ट्रेडर्स के प्रेसीडेंट वाईवी शर्मा ने सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की।
शाम को बाजार खुले
देर शाम ज्यादातर बाजारों में दुकानें खुल गईं। तमाम सिनेमाघरों में शो जारी रहे। सड़कों पर वाहन भी उतरे, लेकिन उनकी संख्या कम रही। बंद के आह्वान को देखते हुए सुरक्षा के तगड़े प्रबंध किए गए थे। प्रमुख चौराहों पर सुरक्षाकर्मी तैनात थे।
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बंद के चलते बस स्टैंड में फंसे मुसाफिर
ट्रांसपोर्टरों, चैंबर आफ कॉमर्स और राजनीतिक संगठनों के बंद के आह्वान पर शुक्रवार को पूरा जम्मू बंद रहा। जम्मू संभाग में बसें नहीं चलने के कारण जनरल बस स्टैंड में सैकड़ों मुसाफिर को एक बार फिर से रुकने के लिए मजबूर होना पड़ा है। बस स्टैंड में फंसे मुसाफिरों में श्रीनगर, कटड़ा, राजोरी, पुंछ, डोडा, रामबन, किश्तवाड़, बनिहाल और श्रीनगर जाने वाले यात्री थे।
बूढ़े, बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं सहित करीब 300 के करीब मुसाफिर फंसे थे, जिन्हें बस सेवा बहाल होने के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ा है। शुक्रवार सुबह से ट्रांसपोर्टरों ने वाहनों को नहीं निकाला। रेलवे स्टेशन के एसआरटीसी टिकट काउंटर पर टिकट के लिए मारामारी होती रही है। हर कोई पहले टिकट लेने की जद्दोजहद में लगा हुआ था।
अस्पतालों, सिनेमाघरों पर रहा असर
जम्मू बंद का अस्पतालों और सिनेमाघरों पर असर रहा। अस्पतालों की ओपीडी में आम दिनों के मुकाबले कम मरीज पहुंचे। इमरजेंसी में ही गंभीर मरीजों की भीड़ रही। यात्री वाहनों के बंद रहने से स्टाफ को एंबुलेंस से लाना और छोड़ना पड़ा। इस दौरान दूर से पहुंचने वाला स्टाफ नहीं आ सका।
इसी तरह शुक्रवार को शहर के सिनेमाघरों में नए शो शुरू होने थे। बंद के चलते सिनेमाघरों में सुबह टिकट काउंटर खोलने को लेकर असमंजस रही। लेकिन शो के पहला दिन होने के कारण अधिकांश सिनेमाघरों को खोला गया। मगर बंद के चलते पहले दिन के शो फीके ही रहे।
लखनपुर से श्रीनगर तक नहीं दौड़े बीस हजार वाहन
नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा बन टोल प्लाजा में यात्री वाहनों से वसूल किए जा रहे टैक्स के विरोध में आल जेएंडके ट्रांसपोर्ट वेलफेयर से एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को लखनपुर से श्रीनगर तक बीस हजार वाहन नहीं चले। मांग पर अड़े ट्रांसपोर्टरों ने जम्मू संभाग में वाहनों का चक्का जाम रखा।
एसोसिएशन के चेयरमैन टीएस वजीर के नेतृत्व में ट्रांसपोर्टरों ने प्रेस क्लब से रैली निकाली, जो कि पूरे शहर में होते हुए वापस प्रेस क्लब के बाहर संपन्न हुई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट कारोबार पहले ही घाटे में चल रहा है। सरकार उनकी समस्याओं को हल नहीं कर रही है।
मांगों को लेकर प्रस्तावित बंद के चलते ट्रांसपोर्टरों ने लखनपुर से लेकर श्रीनगर तक यात्री वाहनों का चक्का जाम रखा। बीस हजार वाहनों में बस, मेटाडोर, टैक्सी और आटो भी शामिल हैं। महासचिव विजय कुमार के मुताबिक उनकी मांग में बन टोल प्लाजा पर यात्री वाहनों को टैक्स न लिया जाए प्रमुख है।
बन टोल बनते वक्त भी उन्होंने नेशनल हाईवे अथॉरिटी का विरोध किया था, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई थी। एक ट्रिप बस से 375 रुपये, मेटाडोर से 200 रुपये और टैक्सी से 175 रुपये लिए जाते हैं, जबकि इतने पैसे बचते नहीं है कि टोल टैक्स को भुनाया जा सके।
उन्होंने 13 अप्रैल को चक्का जाम करना था, लेकिन पीडब्ल्यूडी मंत्री ने 18 अप्रैल को मीटिंग बुलाने की बात कही थी, लेकिन नहीं बुलाई गई, जिसके बाद उन्होंने प्रस्तावित ऐलान के बाद चक्का जाम किया है।
बंद से ट्रांसपोर्ट कारोबार को 2 करोड़ की चपत
मांगों के लिए बंद का आह्वान तो कामयाब हो गया, लेकिन इसके साथ ही पहले से घाटे में चल रहे ट्रांसपोर्टरों ने चक्का जाम करके दो करोड़ रुपये की चपत सहन की है। बीस हजार वाहनों के खड़े रहने के कारण उक्त पैसा जुट नहीं सका है। खासतौर पर चालक और सह चालकों के लिए काफी मुश्किलें बढ़ गईं।
हजारों लोगों को इन दिक्कतों से गुजरना पड़ा है। ट्रांसपोर्टरों ने बंद का आह्वान करके चक्का जाम को तो सफल बना लिया, लेकिन रोज कमाकर खाने वाले चालक, सह चालक, स्वीपर, मेकैनिक आदि को परेशानी उठानी पड़ी है। प्रति बस, मेटाडोर और टैक्सी अगर ऑन रोड होती है तो कम से कम एक हजार रुपये की बचत कर लेती है।
इसी तरह से आटो चालक भी ढाई सौ रुपये से पांच सौ रुपये प्रति ऑन रोड होने पर बचाते हैं। इनमें से कुछ वाहन ऐसे है जो कि कर्ज पर चल रहे हैं प्रति दिन के हिसाब से उन्हें अपना कर्ज भी चुकाना होता है, लेकिन शुक्रवार को ऐसा नहीं होने से उनका बजट अवश्य बिगड़ गया है।
बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से कटड़ा के लिए बसें, टैक्सी नहीं चलने के कारण जम्मू पहुंचे श्रद्धालुओं को भी खासी परेशानियां झेलनी पड़ी हैं। सरकारी बसों पर निर्भर रहते हुए यात्रियों को कटड़ा तक अपना रास्ता तय करना पड़ा। बस स्टैंड में दुकानें बंद थी, खाने के सामान से लेकर मोबाइल अन्य सभी शाप पर ताले जड़े थे।
बंद को सफल बनाने में कूदे राजनीतिक दल
जम्मू बंद को सफल बनाने में विभिन्न राजनीतिक संगठनों ने सहयोग दिया। इसमें पैंथर्स पार्टी, नेकां, डोगरा फ्रंट, शिवसेना आदि दलों के कार्यकर्ताओं ने शहर और आसपास के इलाकों में रैलियां निकाल बंद करवाया। प्रदर्शनकारियों ने राज्य की गठबंधन सरकार की नई भर्ती नीति, टोल प्लाजा का विरोध करने के साथ जम्मू में एम्स की मांग की।
इस दौरान राज्य सरकार के पुतलों को आग के हवाले किया गया। प्रदर्शनी मैदान के बाहर से सुबह जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चेयरमैन हर्षदेव सिंह और प्रधान बलवंत सिंह मनकोटिया के नेतृत्व में रैली निकाली। सिंह और मनकोटिया ने कहा कि भाजपा के बिना भी बंद सफल रहा है।
राज्य की गठबंधन सरकार की नई भर्ती नीति नौजवानों के खिलाफ है। नेकां कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शनी मैदान के बाहर से रैली निकाली। इसमें महिला कार्यकर्ता भी शामिल रहीं। इन रैलियों में पार्टी के प्रमुख नेता शामिल रहे। वक्ताओं ने जम्मू को एम्स देने, टोल प्लाजा आदि के मुद्दों को उठाया।
हिंदुस्तान शिवसेना के प्रधान डिंपी कोहली के नेतृत्व में निकाली रैली इंदिरा चौक से शुरू होकर शहर और आसपास के क्षेत्रों में गई। रैली में विक्रांत कपूर, जीआई सिंह, राजन गुप्ता आदि शामिल रहे। डोगरा फ्रंट और शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने प्रधान अशोक गुप्ता के नेतृत्व में पुराने शहर के बाजारों में जम्मू में एम्स देने के लिए रैली निकाली।
गुप्ता ने कहा कि जम्मू में एम्स जैसे संस्थान न होने से लोगों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। एनपीएसयू ने बंद को सफल बनाने में सहयोग दिया। विश्वविद्यालय के गेट के बाहर छात्र नेताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जम्मू मेें एम्स की मांग उठाई।
प्रोग्रेसिव यूथ फोरम के सदस्यों ने भी नई भर्ती नीति और जम्मू में एम्स के लिए जीजीएम साइंस कालेज के बाहर प्रदर्शन किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डा. मनोहर लाल ने जम्मू में एम्स न देने के लिए भाजपा को आड़े हाथ लिया। उन्होंने नई भर्ती नीति को भी युवाओं के खिलाफ बताया।
भाजपा, पीडीपी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन
जम्मू में एम्स खोलने की मांग पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सहयोगी संगठन बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने भी शुक्रवार को जम्मू बंद को सफल बनाने में जमकर पसीना बहाया और भाजपा और पीडीपी मुख्यालयों के बाहर प्रदर्शन भी किया।
बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने शहर भर में मोटरसाइकिल पर रोष रैली भी निकाली और खुली दुकानों को बंद भी करवाया और भाजपा को चेतावनी दी कि अगर जम्मू में एम्स खोलने पर जल्द फैसला न हुआ तो जिला स्तर पर आंदोलन शुरू कर भाजपा विधायकों के पुतले जलाए जाएंगे।
विहिप मुख्यालय शक्ति आश्रम से बजरंग दल के प्रांत संयोजक नवीन सूदन की अगुवाई में रोष रैली निकालते हुए कार्यकर्ताओं ने कच्ची छावनी भाजपा मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर मुफ्ती सरकार का पुतला जलाया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय पर जिस तरह से कश्मीर और जम्मू दोनों जगह खोले गए।
उसी तरह एम्स भी जम्मू में खोला जाए। इसके बाद मोटर साइकिल रैली निकालते हुए बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने गांधीनगर स्थित पीडीपी मुख्यालय के बाहर भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में प्रांत सह संयोजक राकेश शर्मा, महानगर संयोजक कार्र्तिक सूदन, सागर शर्मा, रोहित, पवन आदि भी शामिल रहे। बजरंग दल का जम्मू बंद में कूदना भाजपा को झटका भी माना जा रहा है।
डोगरा चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज
जम्मू बंद को सफल बनाने के लिए डोगरा चौक पर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को खदेड़ने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। जम्मू कश्मीर प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष प्रणव शगोत्रा पर भी लाठियां भांजी गईं।
एम्स को जम्मू में खोलने की मांग पर जम्मू बंद करवाने में कूदी कांग्रेस के युवा इकाई के अध्यक्ष प्रणव शगोत्रा की अगुवाई में कार्यकर्ता डोगरा चौक पर सुबह 10:15 बजे के करीब प्रदर्शन कर सड़क पर चल रहे वाहनों को रोकने का प्रयास कर रहे थे।
तभी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया। हालांकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लाठीचार्ज का कड़ा विरोध किया और आरोप लगाया कि शांतिपूर्वक तरीके से प्रदर्शन करने के लोकतांत्रिक अधिकार छीनने का प्रयास किया गया है।
पुलिस ने बिना कोई चेतावनी दिए लाठीचार्ज कर दिया, जो कि निंदनीय है।