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बचाव: झेलम पर बनेगा नया फ्लड चैनल

Wed, 15 Oct 2014 01:33 AM IST
Updated Wed, 15 Oct 2014 01:33 AM IST
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new flood channel will be built on the Jhelum river

झेलम नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद अब सरकार सुरक्षा उपायों में जुट गई है। ताकि भविष्य में यदि ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो तो उससे सफलतापूर्वक निपटा जा सके। सरकार ने रामबाग की तर्ज पर डोंगरीपोरा में नया फ्लड चैनल बनाने की योजना बनाई है। कश्मीर बाढ़ नियंत्रण विभाग के चीफ इंजीनियर जावेद जफर का कहना है कि कश्मीर को झेलम की बाढ़ से बचाने के लिए एक फ्लड चैनल की जरूरत है।

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इस संबंध में प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेजा गया है। नया फ्लड चैनल बनने से भविष्य में बाढ़ के पानी की निकासी की जा सकेगी। रामबाग में पहले से बने फ्लड चैनल की क्षमता 25-30 हजार क्यूसिक पानी की है। जबकि हाल में आई बाढ़ के दौरान 30-35 हजार क्यूसिक पानी की क्षमता होनी चाहिए थी।
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बाढ़ आने का मुख्य कारण अवैध कब्जा और शिल्ट आना रहा। वर्तमान में आई बाढ़ के दौरान क्षमता से 4-8 हजार क्यूसिक पानी ज्यादा था। झेलम की क्षमता 80 हजार क्यूसिक पानी की है। जबकि बाढ़ के समय 1.20 लाख क्यूसिक पानी था।

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झेलम पर 22 जगह टूटा था बांध

new flood channel will be built on the Jhelum river

कश्मीर यूनिवर्सिटी के अर्थ साइंसेज विभाग के एचओडी प्रो. शकील का कहना है कि झेलम पर पानी निकासी के लिए 22 जगह बांध तोड़ा गया था, लेकिन देर से हुई कार्यवाही के कारण यह नुकसानदेह साबित हुआ। प्रो. शकील की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया कि झेलम में पांच सितंबर को दो जगह बांध टूटा।

छह सितंबर को 12 जगह और सात सिंतबर को आठ जगह बांध टूटा। रिपोर्ट के अनुसार कंडजल ब्रिज के पास सरकार ने झेलम के पानी को डायवर्ट करने के लिए बांधों को तोड़ा। यदि यह कार्यवाही पांच सितंबर से पहले की जाती तो बाढ़ को नियंत्रित किया जा सकता था। प्रो. ने स्वीकार किया कि झेलम के आसपास अतिक्रमण भी बाढ़ का कारण रहे।

उन्होंने कहा कि यह अतिक्रमण 20-30 साल से पहले हुए हैं। उन्हें हटाना मुश्किल है। हाल में हुए अतिक्रमण पर कार्रवाई हुई है। गांदरबल जिले में सिंध नाला और अनंतनाग जिले में लिद्दर नदी में पहले ही हदबंदी मुकर्रर की हुई है। इनके आगे-पीछे अतिक्रमण नहीं हो सकता। झेलम की भी हदबंदी करने की जरूरत है।

जो जल्द की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग के पास ड्रैगर (फ्लोटिंग क्रेन) की कमी है। विभाग के पास मौजूद दो ड्रैगर बारामुला में लगाए थे। इसलिए वहां बाढ़ नहीं आई।

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