ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की जरूरत: महबूबा मुफ्ती
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की जरूरत है, क्योंकि अन्य अर्थव्यवस्था या तो ठहर गई हैं या फिर उन्हें प्रोत्साहित नहीं किया जा रहा है। कृषि तथा इससे जुड़े क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। यदि ठोस प्रयास किए गए तो अगले चार-पांच साल में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
किसान बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि कृषक समुदाय की विश्वास बहाली के लिए कृषि उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग और फसल बीमा मुख्य कुंजी है। इन दोनों सुविधाओं को हर हाल में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सीडीएफ राशि के उपयोग का भी सुझाव दिया।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सूखा, ओलावृष्टि, बाढ़ तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान के डर तथा लचर मार्केटिंग व्यवस्था की वजह से किसानों ने खेती में रुचि दिखाना बंद कर दिया है। कृषि उत्पादों को मंडी तक पहुंचाने में परिवहन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में प्रभावी परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि समय से मंडियों में उत्पाद पहुंच सके।
सीएम ने नई योजनाओं की दी जानकारी
मुख्यमंत्री ने कहा कहा कि सरकार खरीद मंडियां स्थापित कर रही है ताकि किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। उन्होंने जंगली खाद्य पदार्थों तथा जड़ी बूटियों के व्यावसायिक दोहन का सुझाव दिया। साथ ही अनारदाना की व्यावसायिक खेती को प्रोत्साहित करने को कहा।
फूलों की खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बाजार नियंत्रित योजना केवल फलों तक ही सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे फूलों तक भी बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कृषि ऋण माफी का विस्तृत ब्योरा मांगते हुए इसकी कमियों को तत्काल दूर करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने पोलट्री, मछली पालन तथा अन्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की आवश्यकता पर जोर दिया। सीडीएफ का इस्तेमाल करते हुए विधानसभावार पोल्ट्री, दूध, मछली, सब्जियां, बासमती, भेड़पालन में मॉडल विलेज स्थापित करने का सुझाव दिया। बोर्ड के उपाध्यक्ष दलजीत सिंह चिब ने किसानों की योजनाओं पर बारीक नजर रखने के लिए मुख्यमंत्री के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
सहकारिता आंदोलन को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता
एजेंडा आफ एलायंस में भी कृषि क्षेत्र के विकास पर पूरा फोकस है। उन्होंने बोर्ड की नियमित बैठकें आयोजित करने को कहा, ताकि किसानों का फीडबैक सरकार तक पहुंच सके।