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Jammu News: प्रदेश में आत्महत्या के मामले, पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम
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-जम्मू-कश्मीर में 236, पंजाब 2229, दिल्ली 2905 और हिमाचल प्रदेश में 813 मामले
-एनसीआरबी के आंकड़ों में प्रदेश की आत्महत्या दर पड़ोसी राज्यों से कम
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। प्रदेश में आत्महत्या के मामलों की संख्या पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के मुकाबले काफी कम है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में कुल 236 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। वहीं पंजाब में 2229, हिमाचल प्रदेश में 813 और दिल्ली में 2905 रहा। हालांकि अलग-अलग राज्यों की आबादी में बड़ा अंतर होने के कारण सिर्फ मामलों की संख्या से तुलना करना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। आत्महत्या की दर के हिसाब से भी जम्मू-कश्मीर इन तीनों से नीचे है।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर में आत्महत्या की दर 1.7 प्रति एक लाख आबादी रही। इसके मुकाबले पंजाब में यह दर 7.2, हिमाचल प्रदेश में 10.8 और दिल्ली में 13.3 प्रति एक लाख आबादी दर्ज की गई। देशभर में 2024 के दौरान कुल 1,70,746 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए और राष्ट्रीय आत्महत्या दर 12.2 प्रति एक लाख आबादी रही।
आंकड़ों की तुलना करें तो जम्मू-कश्मीर में दर्ज मामलों की संख्या पंजाब के मुकाबले करीब नौ गुना कम, हिमाचल प्रदेश के मुकाबले करीब साढ़े तीन गुना कम और दिल्ली के मुकाबले करीब 12 गुना कम है। वहीं दर के लिहाज से भी जम्मू-कश्मीर सबसे नीचे है। पंजाब की दर जम्मू-कश्मीर से चार गुना से अधिक, हिमाचल प्रदेश की करीब छह गुना और दिल्ली की करीब आठ गुना है।
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रिपोर्ट के मुताबिक देश में आत्महत्या के मामलों के पीछे सबसे बड़ा कारण पारिवारिक समस्याएं रहा, जो कुल मामलों में 33.5 प्रतिशत था। इसके बाद बीमारी 17.9 प्रतिशत, नशे की लत 7.6 प्रतिशत, वैवाहिक समस्याएं पांच प्रतिशत, प्रेम संबंध 4.6 प्रतिशत और दिवालियापन या कर्ज 4.4 प्रतिशत मामले रहे।
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आत्महत्या की रोकथाम परिवार और समाज की साझा जिम्मेदारी है। परिवार व समाज व्यक्ति को बिना जज किए सुने, समझे और भावनात्मक सहारा दे। करुणा, खुला संवाद और समय पर पेशेवर सहायता एक मजबूत सुरक्षा-जाल बना सकते हैं। टेली-मानस (14416) भारत सरकार की राष्ट्रीय टेली-मानसिक स्वास्थ्य सेवा है। मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद या भावनात्मक संकट के समय यहां सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।
-डॉ. रोमेश शर्मा, मनोवैज्ञानिक
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-एनसीआरबी के आंकड़ों में प्रदेश की आत्महत्या दर पड़ोसी राज्यों से कम
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। प्रदेश में आत्महत्या के मामलों की संख्या पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के मुकाबले काफी कम है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में कुल 236 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। वहीं पंजाब में 2229, हिमाचल प्रदेश में 813 और दिल्ली में 2905 रहा। हालांकि अलग-अलग राज्यों की आबादी में बड़ा अंतर होने के कारण सिर्फ मामलों की संख्या से तुलना करना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। आत्महत्या की दर के हिसाब से भी जम्मू-कश्मीर इन तीनों से नीचे है।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर में आत्महत्या की दर 1.7 प्रति एक लाख आबादी रही। इसके मुकाबले पंजाब में यह दर 7.2, हिमाचल प्रदेश में 10.8 और दिल्ली में 13.3 प्रति एक लाख आबादी दर्ज की गई। देशभर में 2024 के दौरान कुल 1,70,746 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए और राष्ट्रीय आत्महत्या दर 12.2 प्रति एक लाख आबादी रही।
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आंकड़ों की तुलना करें तो जम्मू-कश्मीर में दर्ज मामलों की संख्या पंजाब के मुकाबले करीब नौ गुना कम, हिमाचल प्रदेश के मुकाबले करीब साढ़े तीन गुना कम और दिल्ली के मुकाबले करीब 12 गुना कम है। वहीं दर के लिहाज से भी जम्मू-कश्मीर सबसे नीचे है। पंजाब की दर जम्मू-कश्मीर से चार गुना से अधिक, हिमाचल प्रदेश की करीब छह गुना और दिल्ली की करीब आठ गुना है।
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रिपोर्ट के मुताबिक देश में आत्महत्या के मामलों के पीछे सबसे बड़ा कारण पारिवारिक समस्याएं रहा, जो कुल मामलों में 33.5 प्रतिशत था। इसके बाद बीमारी 17.9 प्रतिशत, नशे की लत 7.6 प्रतिशत, वैवाहिक समस्याएं पांच प्रतिशत, प्रेम संबंध 4.6 प्रतिशत और दिवालियापन या कर्ज 4.4 प्रतिशत मामले रहे।
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आत्महत्या की रोकथाम परिवार और समाज की साझा जिम्मेदारी है। परिवार व समाज व्यक्ति को बिना जज किए सुने, समझे और भावनात्मक सहारा दे। करुणा, खुला संवाद और समय पर पेशेवर सहायता एक मजबूत सुरक्षा-जाल बना सकते हैं। टेली-मानस (14416) भारत सरकार की राष्ट्रीय टेली-मानसिक स्वास्थ्य सेवा है। मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद या भावनात्मक संकट के समय यहां सहायता और मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।
-डॉ. रोमेश शर्मा, मनोवैज्ञानिक