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Jammu News: नाटक में सरकारी दफ्तर की बदहाल स्थिति पर करारी चोट
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नटरंग की संडे थिएटर शृंखला में रविवार को कलाकारों ने हिंदी नाटक सरकारी दफ्तर का एक दिन प्रस्तुत किया। लक्ष्मीकांत वैष्णव के नाटक का निर्देशन नीरज कांत ने किया। नाटक में सरकारी कार्यालय की वास्तविक स्थिति को चित्रित किया गया और चतुराई से बुराइयों पर प्रकाश डाला गया।
नाटक की शुरुआत सरकारी कार्यालय से होती है, जहां कर्मचारी काम कर रहे होते हैं। उनके पास नौकरी की सुरक्षा है, इसलिए कोई भी समय की पाबंदी बरतने की जहमत नहीं उठाता। चपरासी तक नहीं सुनता, क्योंकि उसे पता है कि कोई भी स्थायी नौकरी से नहीं हटा सकता। यहां तक कि बॉस भी कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर पाता, क्योंकि चपरासी के पास कई रहस्य हैं। ऑफिस में हर किसी की अपनी कमजोरी है और हर कोई निजी एजेंडे को लागू करने के लिए उसका फायदा उठाने में लगा रहता है।
जिद्दी चपरासी से सम्मान पाने वाला एकमात्र व्यक्ति एक अधिकारी है जो मंत्री का रिश्तेदार है। वहीं, विभाग प्रमुख को कार्यालय की ईमानदारी और समय की पाबंदी बनाए रखनी थी, मगर वह कर्तव्यों से भाग जाता है। इसी बीच निगरानी अधिकारी (विजिलेंस अफसर) ने छापा मारा और सभी अनुपस्थित अधिकारियों व कर्मियों को निलंबित करने का आदेश दिया। जब तक नई परिस्थिति सुशासन के प्रति विश्वास स्थापित कर पाती, तब तक निगरानी अधिकारी का छापा सपना साबित हो जाता और सरकारी कार्यालय के काज का हश्र जस का तस रहता। नाटक में भाई-भतीजावाद, पक्षपात, भ्रष्टाचार, अनुपस्थिति और चाटुकारिता जैसी आम बुराइयां पर करारी चोट की गई। कलाकारों में सनी मुजू, विशाल शर्मा, अभिमन्यु चौधरी, सुमित सिंह बंदराल, महक चिब, आनंद वर्मा और मुनीश शामिल थे। लाइट का संचालन नीरज कांत, शो का मोहम्मद यासीन जबकि संगीत कुशल भट्ट ने दिया।
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जम्मू। नटरंग की संडे थिएटर शृंखला में रविवार को कलाकारों ने हिंदी नाटक सरकारी दफ्तर का एक दिन प्रस्तुत किया। लक्ष्मीकांत वैष्णव के नाटक का निर्देशन नीरज कांत ने किया। नाटक में सरकारी कार्यालय की वास्तविक स्थिति को चित्रित किया गया और चतुराई से बुराइयों पर प्रकाश डाला गया।
नाटक की शुरुआत सरकारी कार्यालय से होती है, जहां कर्मचारी काम कर रहे होते हैं। उनके पास नौकरी की सुरक्षा है, इसलिए कोई भी समय की पाबंदी बरतने की जहमत नहीं उठाता। चपरासी तक नहीं सुनता, क्योंकि उसे पता है कि कोई भी स्थायी नौकरी से नहीं हटा सकता। यहां तक कि बॉस भी कुछ कहने की हिम्मत नहीं कर पाता, क्योंकि चपरासी के पास कई रहस्य हैं। ऑफिस में हर किसी की अपनी कमजोरी है और हर कोई निजी एजेंडे को लागू करने के लिए उसका फायदा उठाने में लगा रहता है।
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जिद्दी चपरासी से सम्मान पाने वाला एकमात्र व्यक्ति एक अधिकारी है जो मंत्री का रिश्तेदार है। वहीं, विभाग प्रमुख को कार्यालय की ईमानदारी और समय की पाबंदी बनाए रखनी थी, मगर वह कर्तव्यों से भाग जाता है। इसी बीच निगरानी अधिकारी (विजिलेंस अफसर) ने छापा मारा और सभी अनुपस्थित अधिकारियों व कर्मियों को निलंबित करने का आदेश दिया। जब तक नई परिस्थिति सुशासन के प्रति विश्वास स्थापित कर पाती, तब तक निगरानी अधिकारी का छापा सपना साबित हो जाता और सरकारी कार्यालय के काज का हश्र जस का तस रहता। नाटक में भाई-भतीजावाद, पक्षपात, भ्रष्टाचार, अनुपस्थिति और चाटुकारिता जैसी आम बुराइयां पर करारी चोट की गई। कलाकारों में सनी मुजू, विशाल शर्मा, अभिमन्यु चौधरी, सुमित सिंह बंदराल, महक चिब, आनंद वर्मा और मुनीश शामिल थे। लाइट का संचालन नीरज कांत, शो का मोहम्मद यासीन जबकि संगीत कुशल भट्ट ने दिया।
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