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Jammu News: झूठ की सियासत पर यमदूत ने तोड़ा राजा का अभिमान
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नटरंग ने संडे थिएटर शृंखला में रविवार को नाटक यमराज का निमंत्रण का मंचन किया। यह अहंकारी राजा की कहानी है, जो झूठी प्रशंसा सुनने का आदी है। उसे लगता है कि अगर वह नहीं रहेगा तो प्रजा अनाथ हो जाएगी, लोग पागल हो जाएंगे। नाटक की शुरुआत राजा अभिमान सिंह के दरबार से होती है, जहां वे मंत्री से जानना चाहते हैं कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। वह रानी से पूछता है कि वह राजा को किस तरह का आदमी मानती है। राजसी पंडित गुणगानी से जानना चाहता है कि वह कैसा राजा है? तीनों खूब तारीफ करते हैं। इस पर अभिमान सिंह कहते हैं - उन्हें सौ वर्षों तक राज्य पर शासन करना चाहिए। इसके साथ ही अदालत स्थगित कर दी जाती है।
इसी बीच एक रात को राजा यमदूत के आने से चौंक जाता है। यमदूत से पूछता है कि वह मृत्यु के चंगुल में कैसे फंस गया। यमदूत बताते हैं कि यमराज के आदेश पर उन्हें नरक ले जाने आए हैं। इस पर राजा कहता है कि वह ही पृथ्वी पर प्रजापाल, लोकपाल, महिपाल, दंडपाल और महाकाल है। लेकिन यमदूत राजा के गले में रस्सी डालकर उसे ले जाने लगते हैं।
अंत में यमदूत और राजा इस बात पर सहमत हो जाते हैं कि यदि तीनों लोग राजा से प्रेम करेंगे तो उन्हें छोड़ देंगे। इसके बाद यमदूत राजा को लेटने के लिए कहते हैं और ऊपर सफेद चादर डालते हैं। रानी, मंत्री और राज पुरोहित को अलग-अलग बुलाया जाता है। रानी कहती है कि राजा की मृत्यु के बाद बेटा दरबार संभालनेगा और वह राजमाता बनेगी। मंत्री और पंडित संतुष्ट हो गए कि अब उन्हें झूठ नहीं बोलना पड़ेगा। इन विचारों को सुनने के बाद राजा यमदूत से यमलोक ले जाने का अनुरोध करता है। इस तरह राजा अपने झूठ से बाहर आता है और वास्तविक दुनिया से अवगत होता है।
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युवा कलाकारों में संकेत भगत, विशाल शर्मा, चैतन्य शेखर, वंदना ठाकुर और कुशल भट्ट शामिल थे। नाटक का निर्देशन, रोशनी और संगीत का संचालन नीरज कांत जबकि शो का संचालन मोहम्मद यासीन ने किया।
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जम्मू। नटरंग ने संडे थिएटर शृंखला में रविवार को नाटक यमराज का निमंत्रण का मंचन किया। यह अहंकारी राजा की कहानी है, जो झूठी प्रशंसा सुनने का आदी है। उसे लगता है कि अगर वह नहीं रहेगा तो प्रजा अनाथ हो जाएगी, लोग पागल हो जाएंगे। नाटक की शुरुआत राजा अभिमान सिंह के दरबार से होती है, जहां वे मंत्री से जानना चाहते हैं कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। वह रानी से पूछता है कि वह राजा को किस तरह का आदमी मानती है। राजसी पंडित गुणगानी से जानना चाहता है कि वह कैसा राजा है? तीनों खूब तारीफ करते हैं। इस पर अभिमान सिंह कहते हैं - उन्हें सौ वर्षों तक राज्य पर शासन करना चाहिए। इसके साथ ही अदालत स्थगित कर दी जाती है।
इसी बीच एक रात को राजा यमदूत के आने से चौंक जाता है। यमदूत से पूछता है कि वह मृत्यु के चंगुल में कैसे फंस गया। यमदूत बताते हैं कि यमराज के आदेश पर उन्हें नरक ले जाने आए हैं। इस पर राजा कहता है कि वह ही पृथ्वी पर प्रजापाल, लोकपाल, महिपाल, दंडपाल और महाकाल है। लेकिन यमदूत राजा के गले में रस्सी डालकर उसे ले जाने लगते हैं।
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अंत में यमदूत और राजा इस बात पर सहमत हो जाते हैं कि यदि तीनों लोग राजा से प्रेम करेंगे तो उन्हें छोड़ देंगे। इसके बाद यमदूत राजा को लेटने के लिए कहते हैं और ऊपर सफेद चादर डालते हैं। रानी, मंत्री और राज पुरोहित को अलग-अलग बुलाया जाता है। रानी कहती है कि राजा की मृत्यु के बाद बेटा दरबार संभालनेगा और वह राजमाता बनेगी। मंत्री और पंडित संतुष्ट हो गए कि अब उन्हें झूठ नहीं बोलना पड़ेगा। इन विचारों को सुनने के बाद राजा यमदूत से यमलोक ले जाने का अनुरोध करता है। इस तरह राजा अपने झूठ से बाहर आता है और वास्तविक दुनिया से अवगत होता है।
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युवा कलाकारों में संकेत भगत, विशाल शर्मा, चैतन्य शेखर, वंदना ठाकुर और कुशल भट्ट शामिल थे। नाटक का निर्देशन, रोशनी और संगीत का संचालन नीरज कांत जबकि शो का संचालन मोहम्मद यासीन ने किया।