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बदले की भावना से काम कर रही भाजपा, जम्मू-कश्मीर में इमरजेंसी जैसे हालातः नेशनल कांफ्रेंस

Thu, 21 Nov 2019 04:24 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 21 Nov 2019 04:24 PM IST
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National Conference said situation like Emergency in Jammu Kashmir, BJP working in spirit of revenge
जम्मू कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस - फोटो : सोशल मीडिया

नेशनल कांफेंस ने कहा कि भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में 1975 में लगी इमरजेंसी जैसे हालात बना दिए हैं। विपक्षी राजनीतिक नेताओं को नजरबंद किया गया है। सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर से पाबंदियां नहीं हटाई गई हैं। नेकां ने संसद के शीतकालीन सत्र में डॉ. अब्दुल्ला को शामिल करने की मांग की। कहा, भाजपा बदले की भावना से काम कर रही है। जम्मू-कश्मीर भी इमरजेंसी से गुजर रहा है। भाजपा के जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने के दावों की पोल खुल रही है।

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नेकां प्रवक्ता ने पार्टी सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला समेत अन्य राजनीतिक नेताओं की हिरासत को न्यायोचित ठहराने के लिए जम्मू कश्मीर के हालात और आपातकाल की तुलना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। यह केंद्र की ओछी मानसिकता और पाखंड को दर्शाता है।
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संसद सत्र में अब्दुल्ला को हिस्सा लेने की इजाजत देने की विपक्ष की मांग पर पूछे जाने पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने संसद में एक बयान में कहा कि कांग्रेस ने आपातकाल के दौरान 30 सांसदों को हिरासत में रखा था। नेकां ने कहा कि यह तुलना और राजनीतिक नेताओं की हिरासत को न्यायोचित ठहराना हास्यास्पद है।

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जम्मू-कश्मीर आपातकाल के बुरे दौर से गुजर रहाः नेशनल कांफ्रेंस प्रवक्ता

प्रवक्ता ने कहा कि गृह राज्यमंत्री की टिप्पणी से साफ है कि जम्मू-कश्मीर आपातकाल के बुरे दौर से गुजर रहा है। ऐसे बयान भारत के विचारों के साथ विश्वासघात हैं। गृह राज्य मंत्री का दावा अपने ही गृह मंत्री अमित शाह के बयान का खंडन कर रहा है जो कह रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य है।

प्रवक्ता ने पूछा कि अगर स्थिति सामान्य है तो संचार माध्यमों पर रोक क्यों है, राजनीतिक नेताओं को हिरासत में क्यों रखा गया है। वहीं पीडीपी प्रवक्ता फिरदोस टाक ने कहा कि भाजपा दोहरी भाषा बोल रही है। सौ दिन से विपक्षी नेताओं को नजरबंद करके रखा गया हैै। जम्मू-कश्मीर में कोई संविधानिक गारंटी नहीं है। अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद भाजपा की ओर से किसी के कुछ बोलने पर उसे जेल में डालने की धमकी दी जाती थी। कश्मीर में हालात सामान्य होने के दावों पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है।

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