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Jammu News: सरकारी जमीनों से बेदखल करना किसानों से नाइंसाफी
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रियासी में राष्ट्रीय मानव अधिकारी और नेशनल कांफ्रेंस ने उठाई आवाज
संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। वर्षों से जिन किसानों के पास सरकारी जमीनें हैं, उनसे किसानों को बेदखल करने का फैसला जनहित में नहीं है। सरकार के इस फैसले से कई किसान सड़कों पर आ जाएंगे। कई किसानों के पास कमाने के लिए स्रोत नहीं रहेगा। यह बात शनिवार को जनाना पार्क में राष्ट्रीय मानव अधिकारी और नेशनल कांफ्रेंस की संयुक्त प्रेसवार्ता में मौजूद लोगों ने कही।
कहा कि निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने किसानों को सरकारी जमीनें छोड़ने को कहा है। डीसी रियासी ने कई किसानों को नोटिस जारी किया है। राजस्व विभाग ने कार्रवाई करना शुरू कर दिया है। किसानों के पास वर्षों से जमीनें हैं। उन पर वह खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। कुछ किसान उसी जमीन पर मकान बना कर रहते हैं, व बची जमीन पर हल चलाते हैं।
कहा कि कार्रवाई की चपेट में आने से उनका कोई ठिकाना नहीं रहेगा। एलजी व स्थानीय प्रशासन को अगर कार्रवाई करनी ही है तो वह पहले रसूखदारों और नेताओं पर करें। उनके पास मौजूद सरकारी जमीनों को खाली करवाया जाए। बाद में गरीब किसानों पर कार्रवाई हो। सभी ने एकजुट होकर कहा कि अगर सरकार ने फैसले को वापस नहीं लिया तो किसान इसके विरोध में सड़कों पर उतर आएंगे। मौके पर तारिक भट्ट, जावेद अहमद भट्ट, देव राज खजूरिया, गंधर्व सिंह, कृष्ण लाल, बेली राम ने अपनी बात रखी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। वर्षों से जिन किसानों के पास सरकारी जमीनें हैं, उनसे किसानों को बेदखल करने का फैसला जनहित में नहीं है। सरकार के इस फैसले से कई किसान सड़कों पर आ जाएंगे। कई किसानों के पास कमाने के लिए स्रोत नहीं रहेगा। यह बात शनिवार को जनाना पार्क में राष्ट्रीय मानव अधिकारी और नेशनल कांफ्रेंस की संयुक्त प्रेसवार्ता में मौजूद लोगों ने कही।
कहा कि निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने किसानों को सरकारी जमीनें छोड़ने को कहा है। डीसी रियासी ने कई किसानों को नोटिस जारी किया है। राजस्व विभाग ने कार्रवाई करना शुरू कर दिया है। किसानों के पास वर्षों से जमीनें हैं। उन पर वह खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। कुछ किसान उसी जमीन पर मकान बना कर रहते हैं, व बची जमीन पर हल चलाते हैं।
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कहा कि कार्रवाई की चपेट में आने से उनका कोई ठिकाना नहीं रहेगा। एलजी व स्थानीय प्रशासन को अगर कार्रवाई करनी ही है तो वह पहले रसूखदारों और नेताओं पर करें। उनके पास मौजूद सरकारी जमीनों को खाली करवाया जाए। बाद में गरीब किसानों पर कार्रवाई हो। सभी ने एकजुट होकर कहा कि अगर सरकार ने फैसले को वापस नहीं लिया तो किसान इसके विरोध में सड़कों पर उतर आएंगे। मौके पर तारिक भट्ट, जावेद अहमद भट्ट, देव राज खजूरिया, गंधर्व सिंह, कृष्ण लाल, बेली राम ने अपनी बात रखी।
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