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बड्डाल में मातम: हमारे बच्चे कैसे मरे? हर आंख में आंसू... दिलों में गुस्सा और सवाल, कातिल कौन; प्रशासन मौन
Thu, 16 Jan 2025 03:04 PM IST
शाहरुख खान
जगमोहन शर्मा, अमर उजाला, राजोरी
जगमोहन शर्मा, अमर उजाला, राजोरी
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 16 Jan 2025 03:04 PM IST
सार
जम्मू के बड्डाल गांव में एक और बच्ची ने दम तोड़ दिया है। अब तक पंद्रह लोगों की मौत हो चुकी है। गांव में रहस्यमयी तरीके से हो रही मौतों से डॉक्टर भी हैरान हैं।
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mysterious death
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजोरी के बड्डाल में हर आंख में आंसू है, तो दिलों में गुस्सा। जुबां पर ढेरों सवाल हैं। हमारे बच्चे कैसे मरे? अगर बीमारी ने नहीं, तो किसने मारा? पुलिस ने अभी तक जांच क्यों नहीं की? इस तरह के तमाम सवाल उठाते हुए महिलाएं बिलख पड़ती हैं। पुरुष किसी तरह से आंसू तो रोक लेते हैं, मगर उनकी आंखों में गुस्सा साफ झलकता है।
किसी बाहरी के आने का पता चलते ही लोग एक-एक कर इस उम्मीद में जुटना शुरू हो जाते हैं कि उनके बच्चों की मौत से पर्दा उठाने वाला कोई आया होगा। आने वालों के पास भी कोई जवाब नहीं होता और लोग प्रशासन पर भड़क उठते हैं।
मोहम्मद रशीद और मोहम्मद मजीद सहित अन्य लोगों का यही कहना है कि हमारी आंखों के सामने एक-एक कर जनाजा उठ रहा है। स्वास्थ्य विभाग हो या प्रशासन के अधिकारी, सब एक ही बात कह रहे हैं कि जांच चल रही है। एक साथ लोग सवाल दागते हैं कि ये कैसी जांच है, जो 38 दिन से पूरी ही नहीं हो रही है। हमें कोई कुछ तो बता दे कि हमारे बच्चे कैसे मर रहे हैं?
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मोहम्मद रशीद कहते हैं, जाना तो एक दिन सबने (सबको) है, लेकिन मौतों के पीछे कुछ तो वजह होगी। कारण तो पता चलना चाहिए। हमारे बच्चों के शव देने में कई-कई घंटे लगा दिए जा रहे हैं। कह रहे हैं कि पोस्टमार्टम हो रहा है।
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किसी बाहरी के आने का पता चलते ही लोग एक-एक कर इस उम्मीद में जुटना शुरू हो जाते हैं कि उनके बच्चों की मौत से पर्दा उठाने वाला कोई आया होगा। आने वालों के पास भी कोई जवाब नहीं होता और लोग प्रशासन पर भड़क उठते हैं।
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मोहम्मद रशीद और मोहम्मद मजीद सहित अन्य लोगों का यही कहना है कि हमारी आंखों के सामने एक-एक कर जनाजा उठ रहा है। स्वास्थ्य विभाग हो या प्रशासन के अधिकारी, सब एक ही बात कह रहे हैं कि जांच चल रही है। एक साथ लोग सवाल दागते हैं कि ये कैसी जांच है, जो 38 दिन से पूरी ही नहीं हो रही है। हमें कोई कुछ तो बता दे कि हमारे बच्चे कैसे मर रहे हैं?
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मोहम्मद रशीद कहते हैं, जाना तो एक दिन सबने (सबको) है, लेकिन मौतों के पीछे कुछ तो वजह होगी। कारण तो पता चलना चाहिए। हमारे बच्चों के शव देने में कई-कई घंटे लगा दिए जा रहे हैं। कह रहे हैं कि पोस्टमार्टम हो रहा है।
कोई तो बताए... पोस्टमार्टम में आ क्या रहा है। हमारे घरों में पीने तक के लिए पानी नहीं है। हफ्तों तक पानी नहीं आता। अब अधिकारी आए हैं तो वाटर सप्लाई विभाग वाले पानी की कुछ टंकियां भरकर चले गए हैं। हम पर विपत्ति आन पड़ी है और हमारी महिलाएं बावलियों से पानी भरने के लिए जा रही हैं। कोई हमारी तड़प को महसूस करने वाला नहीं है। हमारे बच्चों से पहले तो अधिकारियों की रूह मर चुकी है।
पानी भी मयस्सर नहीं
लोगों ने कहा कि हमारे लिए तो विभाग ने कुछ टंकी पानी का इंतजाम कर दिया है, लेकिन हमारे पशु एक हफ्ते से प्यासे हैं। आखिर इन बेजुबानों का क्या कुसूर है? इनके पीने के लिए लोग घर में बनाए टैंकों में पानी स्टोर करके रखते थे। अब वो भी खत्म हो चुका है। अधिकारी आते हैं और अपना दौरा बनाकर चले जाते हैं। करते कुछ नहीं हैं।
लोगों ने कहा कि हमारे लिए तो विभाग ने कुछ टंकी पानी का इंतजाम कर दिया है, लेकिन हमारे पशु एक हफ्ते से प्यासे हैं। आखिर इन बेजुबानों का क्या कुसूर है? इनके पीने के लिए लोग घर में बनाए टैंकों में पानी स्टोर करके रखते थे। अब वो भी खत्म हो चुका है। अधिकारी आते हैं और अपना दौरा बनाकर चले जाते हैं। करते कुछ नहीं हैं।
किसी संक्रामक बीमारी की नहीं हुई पुष्टिः स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि बड्डाल से लिए गए नमूनों की अब तक की जांच में कोई गंभीर या संक्रामक बीमारी नहीं पाई गई है। देश की प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं में भेजे गए लगभग सभी सैंपलों के टेस्ट नेगेटिव आए हैं। अगर कोई संक्रामक बीमारी होती, तो दूसरी जगह भी फैलती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। यह अलग से जांच का विषय है। पुलिस जांच कर रही है।
स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि बड्डाल से लिए गए नमूनों की अब तक की जांच में कोई गंभीर या संक्रामक बीमारी नहीं पाई गई है। देश की प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं में भेजे गए लगभग सभी सैंपलों के टेस्ट नेगेटिव आए हैं। अगर कोई संक्रामक बीमारी होती, तो दूसरी जगह भी फैलती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। यह अलग से जांच का विषय है। पुलिस जांच कर रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने युद्धस्तर पर काम किया। बड्डाल में 3500 लोगों की घर-घर जाकर जांच की गई। खाद्य पदार्थों, पानी सहित अन्य जरूरी सैंपल लिए गए। बाहर से भी विशेषज्ञों को बुलाया गया। नई दिल्ली व पुणे स्थित आईसीएमआर के साथ ही एनसीडीसी, ग्वालियर डिफेंस रिसर्च डवलपमेंट, माइक्रोबायोलॉजी चंडीगढ़, आईसीएमआर जम्मू में भी कई सैंपल भेजे, लेकिन किसी में भी वायरस या वैक्टीरिया की पुष्टि नहीं हुई।
कब-कब हुई मौतें
- 8 दिसंबर- जीएमसी राजोरी में फजल हुसैन (40, पिता) की मौत हुई, बेटी-फरमाना (7), रबिया कौसर (14) की राजोरी से जम्मू रेफर करते समय रास्ते में मौत, परिवार के एक अन्य बच्चे रुक्सान अहमद (10) की एसएमजीएस अस्पताल जम्मू में मौत।
- 12 दिसंबर- रफ्तार अहमद (4, मृतक फजल का बेटा) की एसएमजीएस अस्पताल जम्मू में मौत।
- 12 दिसंबर - बड्डाल के एक अन्य मोहम्मद रफीक परिवार से उसकी बेटी नाजिया कौसर (7) की राजोरी में मौत, इसी परिवार के मोहम्मद इश्तियाक (10) की राजोरी से एसएमजीएस जम्मू में शिफ्ट करते समय रास्ते में मौत।
- 18 दिसंबर मोहम्मद रफीक के बेटे इशफाक अहमद (12) की एसएमजीएस से पीजीआई चंडीगढ़ ले जाते समय रास्ते में मौत
- 23 दिसंबर-जीएमसी राजोरी में मोहम्मद रफीक की गर्भवती पत्नी राजिम बेगम की मौत
- 12 जनवरी 2025-बड्डाल के मोहम्मद असलम की बेटी नवीना कौसर (9) और बेटे जहूर अहमद (14) की एसएमजीएस अस्पताल जम्मू में मौत।
- 13 जनवरी मोहम्मद असलम के तीसरे बच्चे मोहम्मद मारूफ (10) की एसएमजीएस अस्पताल जम्मू में मौत।
- 14 जनवरी मो. असलम की बेटी सफीना कौसर (12) की मौत
- 15 जनवरी मो. असलम की ही बेटी जबीना (10) की मौत