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Jammu News: होर्डिंग्स में धांधली, दस साल में 56 करोड़ डकारे, निगम के हाथ खाली

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होर्डिंग्स राजस्व में धांधली, एक ही साल में लगा छह करोड़ का चूना, मेयर ने मांगा पहले का हिसाब,
मेयर ने मांगा अधिकारियों से हिसाब, बोले- कमेटी गठित कर जांच बिठाएंगे शहरी, विकास विभाग प्रमुख से देंगे शिकायत
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- एनबीसीसी के कामकाज पर मेयर नाराज
कहा - मृत पशुओं के लिए शवदाह गृह बनाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर में खंभों पर वर्षों से टंगे होर्डिंग्स की कमाई कहां जमा हुई, इस पर मेयर राजिंदर शर्मा ने जांच बिठाने के लिए नगर निगम को आदेश जारी किए हैं। जांच के लिए कमेटी गठित की जाएगी। उन्होंने खुलासा किया कि एक साल में ही तकरीबन छह हजार होर्डिंग्स का किराया छह करोड़ बनता है। यह राशि नगर निगम के पास जमा ही नहीं हो पाई है। आंकड़ों के मुताबिक दस साल में 56 करोड़ रुपये होर्डिंग्स के बनते थे, लेकिन इस पैसे का कोई हिसाब नहीं है। इस पर जब अधिकारियों से जवाब मांगा गया तो कोई साफ तौर पर नहीं बोल पाया। मेयर ने कहा, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही शिकायत शहरी विकास विभाग प्रमुख से करेंगे।
उन्होंने कहा कि तीन वाई पांच फुट के होर्डिंग का प्रतिदिन 30 रुपये किराया बनता है। एक साल में कितना वसूला गया, कोई पता नहीं। शहरभर में छह हजार से ज्यादा होर्डिंग रिकॉर्ड में हैं। बुधवार को मेयर राजिंदर शर्मा ने कार्यकारी कमेटी की बैठक ली। इसमें अधिकारियों से जवाब मांगा गया, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। यह सीधी धांधली है। मेयर ने यह भी कहा कि एनबीसीसी ने अब तक गैर-जिम्मेदार तरीके से काम किया है। इसके साथ ही उन्होंने मृत पशुओं के अवशेष सम्मानजनक निपटान के निर्देश दिए। कहा कि जल्द ही शहरी स्थानीय निकाय एक पशु शवदाह गृह स्थापित करेगा। शर्मा ने कहा कि हम लोग गाय, सांप, कौवे आदि जानवरों की पूजा करते हैं और उनके अंतिम संस्कार को वर्षों तक उपेक्षित रखा गया था और आज हम इस संबंध में एक शुरुआत करेंगे।
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केंद्रीय खरीद समिति खरीदेगी
अब नगर निगम का सारा सामान
नगर निगम में हर सामान की खरीद के लिए केंद्रीय खरीद समिति (सीपीसी) पर सहमति बनी। पहले पर्सनल विभाग अपनी जरूरत का सामान खुद खरीदता था और विशेष संबंधित फाइलों को स्थानांतरित करता था, लेकिन अब नगर निगम के किसी भी विभाग की ओर जो कुछ भी खरीदा जाना है, उसे सीपीसी के माध्यम से भेजा जाएगा। अलग-अलग विभागों के भाई-भतीजावाद और कमीशन संस्कृति खत्म होगी। सीपीसी में एक प्रमुख सहित चार सदस्य होंगे, लेकिन प्रमुख नगर निगम आयुक्त नहीं होंगे। अब जेएमसी के लिए खरीद में जवाबदेही तय की जाएगी। आयुक्त केवल सीपीसी की ओर से खरीदारी करने के लिए आवश्यक राशि जारी करेंगे।
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