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'पाक सहयोग' ने पाक में भी बटोरी सुर्खियां
Updated Mon, 02 Mar 2015 02:48 PM IST
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भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री के शपथ लेने की खबर को भारत के साथ-साथ पाकिस्तान के अख़बारों ने फ्रंट पेज, संपादकीय और कार्टून के जरिए छापा है। भारत में नई दुनिया ने पहले पेज पर खबर लगाई, ‘मुख्यमंत्री बनते ही मुफ्ती के बदले सुर’।
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अखबार ने लिखा है कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव के लिए पाकिस्तान, चरमपंथियों और अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस का आभार जताया। मुफ्ती के हवाले से अख़बार लिखता है कि उन्होंने कहा कि इनकी मदद के बगैर शांतिपूर्ण चुनाव नहीं हो सकता था।
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भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत इस पर अपनी असहमति जता दी। उनसे साफ कहा कि वह अपने सहयोगी दल के नेता से इस मुद्दे पर इत्तेफाक नहीं रखती।
'पाकिस्तान का शुक्रिया'
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मुफ्ती मोहम्मद सईद के बयान पर ट्वीट कर कहा, 'भाजपा यह बताए कि इन चुनावों में सुरक्षा बलों और चुनाव आयोग के कर्मचारियों की क्या भूमिका रही है।
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क्या भाजपा कार्यकर्ता भी पाकिस्तान को धन्यवाद कह रहे हैं?' हिंदुस्तान टाइम्स की खबर है कि भाजपा ने साफ किया कि राज्य पुलिस, सुरक्षा बलों और चुनाव आयोग की वजह से ही शांतिपूर्ण चुनाव हो सके।
ऐतिहासिक मौक़ा
नवभारत टाइम्स के मुताबिक, सईद ने कहा कि कश्मीर अब तक के सभी प्रधान मंत्रियों के लिए समस्या रही है। इतिहास ने यह मौका दिया है कि इस स्थिति को बदला जाए।
अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने लिखा है कि साझा न्यूनतम कार्यक्रम पूरी तरह दोनों दलों के बीच लेन देन पर आधारित है।
द इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि दोनों दल धारा 370 को जस का तस बनाए रखने पर राजी हैं तो अफस्पा पर विचार करने पर सहमत हैं।
जम्मू-कश्मीर के अखबार
जम्मू-कश्मीर के अखबारों में भी गठबंधन सरकार को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए गए हैं।
उर्दू अखबार कश्मीर उज्मा ने लिखा है कि पीडीपी अफस्पा के मुद्दे पर नरम पड़ गई है तो ग्रेटर कश्मीर ने अपने संपादकीय में कहा है कि मुफ्ती सरकार को पहले की तरह ही अपने अच्छे काम करने होंगे वर्ना सूबे की स्थिति बदतर हो जाएगी।
कश्मीर रीडर ने लिखा है कि यह तो नई बोतल में पुरानी शराब है और राज्य में नया कुछ नहीं होने को है।
श्रीनगर टाइम्स ने एक मजेदार कार्टून छापा है। इसमें दिखाया गया है कि मुफ्ती एक गमले में पानी डाल रहे हैं और उस गमले में कमल का फूल खिल रहा है। कमल भारतीय जनता पार्टी का चुनाव चिह्न है।
पाकिस्तानी अखबारों की सुर्खियां
पाकिस्तानी अखबार नवाए वक्त ने पहले पन्ने पर जम्मू कश्मीर में सरकार बनने की खबर को सुर्खी लगाई - 'गवर्नर राज खत्म, पाकिस्तानी सहयोग के बिना चुनाव मुमकिन नहीं थे: नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री'
शपथग्रहण समारोह और नए मंत्रिमंडल के ब्यौरे के अलावा अखबार ने मुफ्ती मोहम्मद सईद के इस बयान को भी प्रमुखता दी है - 'बड़ी संख्या में लोगों ने वोट डाले, हम समझते है कि पाकिस्तान और कश्मीर के हथियारबंद और गैर हथियारबंद रहनुमाओं ने इस प्रक्रिया को होने दिया, वो चाहते तो इसमें बाधा डाल सकते थे।'
एक्सप्रेस ने भी अपने अंतरराष्ट्रीय पन्ने पर यही हेडलाइन दी है, 'पाकिस्तानी सहयोग के बिना कश्मीर में चुनाव नामुमकिन थे।'
दैनिक खबरें लिखता है, 'मुफ्ती सईद ने कठपुतली मुख्यमंत्री की शपथ ले ली। दो महिलाओं समेत 25 सदस्य मंत्रिमंडल में होंगे।'
उम्मत की खबर में कश्मीरी लोगों की इस आलोचना को भी जगह दी गई है कि पीडीपी ने भाजपा के साथ गठजोड़ कर धोखा दिया है।
अखबार लिखता है कि 'भारत समर्थक पीडीपी ने सत्ता की खातिर उस हिंदूवादी पार्टी को भी गले लगा लिया जिससे उसकी सोच नहीं मिलती है।'