कल मोदी-मुफ्ती मुलाकात के बाद जारी होगा CMP
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जम्मू कश्मीर में सरकार गठन को लेकर छाए बादल आखिरकार छटने को हैं। आज पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती सईद और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मुलाकात होनी है। इस मुलाकात में गठबंधन सरकार का खाका तय कर लिया जाएगा, इसी दौरान सीएमपी को भी अंतिम रूप दिया जाएगा।
इसके बाद सीएमपी पर बुधवार को प्रधानमंत्री अमित शाह और पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद की मुलाकात होगी। सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात के बाद सीएमपी को जारी कर दिया जाएगा। सीएमपी में विवादित मुद्दों को छेड़ने से दोनों ही पार्टी परहेज कर रही हैं ऐसे हालात में मानवीयता और संविधान के अनुसार कार्यवाही करने की बात कही जा रही है।
बहरहाल सूत्रों का कहना है कि बुधवार को पीडीपी-भाजपा गठबंधन का ऐलान किया जाएगा और मुफ्ती मोहम्मद सईद की इच्छा के अनुसार एक मार्च को शपथ ग्रहण की घोषणा भी की जा सकती है। पीडीपी सूत्रों का कहना है कि मुफ्ती एक मार्च को ही शपथ ग्रहण समारोह करना चाहते हैं।
महबूबा और शाह के बीच अंतिम दौर की वार्ता
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात आज होनी है। पहले यह वार्ता सोमवार को होने वाली थी, लेकिन, बाद में इसे एक दिन आगे बढ़ा दिया गया। महबूबा और शाह के बीच अंतिम दौर की वार्ता में न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) के कुछ मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। घाटी के विवादास्पद मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन, पीडीपी विवादास्पद मुद्दों पर और सफाई चाहती है। सीएमपी के दस्तावेज को सार्वजनिक करने से पहले पीडीपी कश्मीरियों के हितों की गारंटी चाहती है।
नई सरकार के शपथ ग्रहण के लिए पहले 27 फरवरी की तिथि तय हुई थी, लेकिन, अब यह एक मार्च तक संभव हो सकेगा। पीडीपी ने हुर्रियत को भी आश्वस्त किया है कि जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जा के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है कि, भ्रम के बादल छंट गए हैं। अब कुछ मुद्दों को और स्पष्ट किया जाना है। यह दो दिन में पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद सरकार के गठन के लिए विधिवत ऐलान कर दिया जाएगा।
दोनों दलों में तालमेल पहले ही हो चुका है। सरकार का गठन पूरे छह साल के लिए होगा इसलिए मुद्दों पर आधारित गठबंधन जरूरी है। यही कारण है कि सीएमपी पर दो महीने तक लंबी बातचीत के बाद सहमति बनी है। विधानसभा चुनाव के नतीजे 23 दिसंबर को आने के बाद से ही स्थायी सरकार के लिए भाजपा और पीडीपी ने साथ आने की जरूरत महसूस की थी। हालांकि पहले भाजपा ने नेशनल कांफ्रेंस के साथ भी एक दौर की बातचीत की थी लेकिन वह सफल नहीं हो सकी।