जम्मू संभाग के अधिकांश जिले रह गए प्यासे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मानसून के सक्रिय होने के बाद सूखे से केंद्र सरकार भले ही पल्ला झाड़ रही हो लेकिन रियासत में हालात अभी भी चिंताजनक हैं। यहां किसानों को सीमा पार से हो रही निरंतर गोलीबारी के साथ कमजोर मानसून की मार भी झेलनी पड़ रही है।
जम्मू संभाग के अधिकांश हिस्से अभी प्यासे ही हैं। यही नहीं पुंछ और उधमपुर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में सामान्य से 88 फीसदी तक काम बारिश हुई है। कठुआ जिले के कंडी क्षेत्र में मक्की की फसल लगभग बर्बाद हो चुकी है।
पर्याप्त पानी न मिलने से धान की फसल भी प्रभावित है। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी आफ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नालाजी (स्कास्ट) के आंकड़ों के मुताबिक जून, 2014 से अब तक इंद्रदेव रियासी जिले पर सबसे ज्यादा महरबान रहे हैं।
कमजोर मानसून से मक्का और धान पर असर
तीसरे नंबर पर राजोरी में कुल 432.4 मिमी. पर 267.2 मिमी. बारिश हुई जो सामान्य से 38 फीसदी कम है। संभाग के किसी भी जिले में जून से अब तक सामान्य बारिश नहीं हुई है, जिसका असर सीधा फसलों पर पड़ा है।
जिला कठुआ के कंडी क्षेत्र में समय पर बारिश न होने के कारण मक्की की फसल लगभग तबाह हो गई है। मैदानी इलाकों में भी जुलाई के बाद पर्याप्त बारिश न होने से मक्की की फसल प्रभावित हुई है।
कम बारिश के बाद बिजली कटौती ने रुलाया
इसका बड़ा कारण कम बारिश के साथ बिजली की लंबी कटौती रहा है। इन क्षेत्रों में सिंचाई बिजली की मोटरों पर ही निर्भर है। जिला जम्मू के सीमावर्ती क्षेत्र में भी मक्की और धान की फसल प्रभावित हुई है।
स्कास्ट से एग्रोमेट्रोलाजी के अध्यक्ष प्रो. बीसी शर्मा के अनुसार अगस्त में मानसून थोड़ा सक्रिय हुआ है। इसका फसलों पर असर पड़ेगा। वहीं, जिला प्रशासनिक स्तर पर भी प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार की गई है।
कृषि निदेशक एसएस जंवाल के अनुसार कम बारिश से प्रभावित जिलों में किसानों को राहत देने के लिए केंद्र की ओर से बीज पर सब्सिडी बढ़ाकर 75 फीसदी तक कर दी गई है। अगस्त में अभी तक बारिश ठीक हुई है, जिससे फसलों को लाभ मिलेगा।