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जज के घर में काम कर रहा नाबालिग बच्चा गायब

Thu, 21 May 2015 12:24 PM IST
Updated Thu, 21 May 2015 12:24 PM IST
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minor domestic help goes missing from house of judge

बाल श्रमिक के बहुचर्चित मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (सिट) बनाने के लिए दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जांच अधिकारी को रिपोर्ट के साथ तलब किया है। बठिंडी इलाके में रहने वाले जज के घर से उक्त घरेलू नौकर रहस्यमय ढंग से लापता है। एडवोकेट दीपिका सिंह राजवत ने मामले की सिट से जांच करवाने के लिए हाईकोर्ट में आवेदन किया है।

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जस्टिस हसनैन मसूदी और जस्टिस जनक राज कोतवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि न तो सीनियर एएजी स्टेटस रिपोर्ट के साथ पेश हुए और न ही जांच अधिकारी उपस्थित हैं। खंडपीठ ने सीनियर एएजी को आदेश दिए कि अब तक हुई जांच के आधार पर स्टेटस रिपोर्ट 25 मई, 2015 तक अदालत में रखी जाए और जांच अधिकारी को केस डायरी के साथ अदालत में पेश होने को कहा।
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केस की जांच के लिए सिट बनाने को लेकर दायर आवेदन में कहा गया कि बठिंडी में रहने वाले राजोरी के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) के घर में काम करने वाला 15 वर्षीय रफीक चौधरी 12 अप्रैल 2015 से लापता है।

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कहा था बच्चे को स्कूल भेजूंगा

minor domestic help goes missing from house of judge

आवेदन में कहा गया कि तीन साल पहले घरेलू काम के लिए रफीक को रखा गया, जो बाल श्रमिक अधिनियम 1986 का उल्लंघन है। आवेदन में कहा गया कि न्यायिक अफसर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के भी निर्देश दिए जाएं। आवेदन में कहा गया कि याचिकाकर्ता को 10 मई 2015 की सुबह भरोसेमंद सूत्र का फोन कॉल आया, जिसने बताया कि सीजेएम के घर से 15 वर्षीय रफीक अहमद (निवासी रगूड़ा, नगरोटा) रहस्यमय ढंग से लापता है।

जो घरेलू कामकाज के लिए रखा गया था। इसके बाद याचिकाकर्ता सीधे बालक के गांव पहुंचीं और उसके गरीब मां-बाप ने बताया कि उनका बेटा पिछले तीन साल से न्यायिक अफसर के घर में काम करता रहा। पहले उन्होंने बच्चे को स्कूल भेजने का आश्वासन दिया, बाद में उसे घरेलू काम में लगा लिया।

अभिभावकों ने बताया कि अफसर और उनकी पत्नी ने उनके लापता बच्चे के बारे में कुछ भी नहीं बताया और अपने घर के द्वार उनके लिए बंद कर दिए। साथ ही खुद को न्यायिक अफसर बताते हुए धमकी भी दी।
जेएनएफ

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