सैन्य खुफिया तंत्र पस्त कर रहा दहशतगर्दों के मंसूबे, पढ़ें- वो चार मामले जिनसे हिली आतंकी जमीन
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जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के मंसूबों पर सेना के खुफिया तंत्र की सटीक सूचनाएं भारी पड़ रही हैं। हाल के दिनों में एक के बाद एक कर आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों का भंडाफोड़ किया जा चुका है। इसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस के पास ऐन मौके पर सेना की ओर से सूचनाएं पहुंचीं, जिस पर आतंकियों के सफाए से लेकर आतंकियों को पकड़ने और विस्फोट व हथियार बरामद करने में कामयाबी मिल पाई। सैन्य सूचनाओं ने कई बड़ी वारदातों को टाल दिया।
हाल की घटनाओं में सेना के खुफिया तंत्र ने अपनी सक्रियता को दर्शाया है, लेकिन पुलिस तंत्र के सामने कुछ सवाल भी खड़े किए हैं। खासकर चिनाब घाटी के किश्तवाड़, डोडा और रामबन जिलों में एक आतंकी ने 12 आतंकियों का नेटवर्क खड़ा कर दिया, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाई। किश्तवाड़ में आतंक को दोबारा जिंदा करने वाला 50 साल से अधिक आयु वाला आतंकी मोहम्मद अमीन उर्फ जहांगीर सरूरी अभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है।
पढ़ें यह चार मामले जिनसे हिली आतंकी की जमीन
केस 1
29 मई को भारतीय सेना ने परमंडल के पास सैन्य कैंप की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करते हुए दो संदिग्धों को दबोचा। जो बाद में पूछताछ करने पर पाकिस्तान में बैठे हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों के लिए जासूसी करने वाले निकले। इनके साथ काम करने वाले छह और लोग पकड़े गए।
केस 2
बिलावर के टेड़ फिंतर गांव से भारतीय सेना के इनपुट पर ही 40 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।
केस 3
1 अक्टूबर 2019 को सेना के ही इनपुट पर जम्मू के बस स्टैंड के पास निजी बस से 15 किलो विस्फोटक बरामद किया गया।
केस 4
सेना के ही इनपुट पर ही कठुआ के लखनपुर में एक महीना पहले तीन आतंकियों को दबोचा गया। जिनके पास से हथियार और गोला बारूद बरामद हुआ।