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जम्मू-कश्मीर: आतंकी सेना, बीएसएफ और सीआरपीएफ की वर्दी पहन कर रहे हैं घुसपैठ और हमले
Mon, 31 Dec 2018 12:31 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Priyesh Mishra
Updated Mon, 31 Dec 2018 12:31 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रहे आतंकवादी हमलों में आतंकी सेना, बीएसएफ और सीआरपीएफ की वर्दी पहने हुए नजर आ रहे हैं। रविवार को बारामुला में मारे गए दो पाकिस्तानी सेना के जवान भी बीएसएफ की वर्दी पहनकर भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे। इसके साथ ही शनिवार को जम्मू में रतनूचक पर स्थित सेना के कैंप पर भी जिन आतंकियों ने हामला किया था वह सेना की वर्दी में थे।
जम्मू रतनूचक में सुबह आतंकी हमले के दौरान सेना के संतरी ने फायरिंग कर बड़े हमले की साजिश का नाकाम कर दिया। सेना के कैंप में अचानक गोलियां चलने के बाद जवान सतर्क हो गए। सेना के संतरी ने भी कहा कि दो संदिग्ध देखे गए हैं। वह सेना की वर्दी में थे। दोनों ने कुछ फायर किए। इसके जवाब में उसने भी गोलियां चलाईं। इसके बाद दोनों संदिग्ध फरार गए।
पुलिस को इसकी सूचना दी गई और एसओजी मौके पर पहुंची। एसओजी ने घटनास्थल का दौरा किया। घटनास्थल पर सेना, आईबी, एनआईए, एसओजी और गंग्याल पुलिस ने भी जांच की है। मौके से खून के धब्बे नहीं मिले हैं। फायरिंग का भी कोई निशान नहीं मिला। सुबह छह बजे हुए संदिग्ध हमले के बाद फोरेंसिक लैब की टीम भी पहुंची थी। टीम ने कुछ महत्वपूर्ण सुराग जुटाए हैं। हालांकि यह भी बताया जा रहा है कि संतरी ने हड़बड़ी में गोलियां चलाई हैं। इसकी पुष्टि सेना और पुलिस के किसी भी अधिकारी ने नहीं की है।
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सैन्य प्रवक्ता के अनुसार सेना कैंप अक्सर आतंकियों के निशाने पर रहते हैं। रतनूचक में ही करीब 15 साल पहले फिदायीन हमला हुआ था। तब क्वार्टरों में रहने वाले लोगों का नुकसान हुआ। रतनूचक और कालू चक में सेना के विशेष केंद्र हैं। यह केंद्र हमेशा आतंकियों के निशाने पर रहते हैं। आतंकी किसी भी समय इसमें घुसपैठ कर सकते हैं।
सैन्य प्रवक्ता के अनुसार सेना ने पहले से ही अपनी गश्त बढ़ाई है और चौकस जवान किसी भी संदिग्ध हरकत का जवाब देने के काबिल हैं। मामला पुलिस को सौंप दिया गया है और पूरे मामले की छानबीन जारी है। छानबीन के बाद यही पाया गया कि संदिग्ध मौके से फरार हो गए हैं। पुलिस अनुसार फायरिंग किए जाने के कारणों का पता किया जा रहा है। घटनास्थल पर पूरी जांच के बाद भी खून के धब्बे नहीं मिले। गेट के पास गोलियां के निशान भी नहीं हैं और गोली किसने चलाई इसकी जांच जारी है।
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जम्मू रतनूचक में सुबह आतंकी हमले के दौरान सेना के संतरी ने फायरिंग कर बड़े हमले की साजिश का नाकाम कर दिया। सेना के कैंप में अचानक गोलियां चलने के बाद जवान सतर्क हो गए। सेना के संतरी ने भी कहा कि दो संदिग्ध देखे गए हैं। वह सेना की वर्दी में थे। दोनों ने कुछ फायर किए। इसके जवाब में उसने भी गोलियां चलाईं। इसके बाद दोनों संदिग्ध फरार गए।
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पुलिस को इसकी सूचना दी गई और एसओजी मौके पर पहुंची। एसओजी ने घटनास्थल का दौरा किया। घटनास्थल पर सेना, आईबी, एनआईए, एसओजी और गंग्याल पुलिस ने भी जांच की है। मौके से खून के धब्बे नहीं मिले हैं। फायरिंग का भी कोई निशान नहीं मिला। सुबह छह बजे हुए संदिग्ध हमले के बाद फोरेंसिक लैब की टीम भी पहुंची थी। टीम ने कुछ महत्वपूर्ण सुराग जुटाए हैं। हालांकि यह भी बताया जा रहा है कि संतरी ने हड़बड़ी में गोलियां चलाई हैं। इसकी पुष्टि सेना और पुलिस के किसी भी अधिकारी ने नहीं की है।
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सैन्य प्रवक्ता के अनुसार सेना कैंप अक्सर आतंकियों के निशाने पर रहते हैं। रतनूचक में ही करीब 15 साल पहले फिदायीन हमला हुआ था। तब क्वार्टरों में रहने वाले लोगों का नुकसान हुआ। रतनूचक और कालू चक में सेना के विशेष केंद्र हैं। यह केंद्र हमेशा आतंकियों के निशाने पर रहते हैं। आतंकी किसी भी समय इसमें घुसपैठ कर सकते हैं।
सैन्य प्रवक्ता के अनुसार सेना ने पहले से ही अपनी गश्त बढ़ाई है और चौकस जवान किसी भी संदिग्ध हरकत का जवाब देने के काबिल हैं। मामला पुलिस को सौंप दिया गया है और पूरे मामले की छानबीन जारी है। छानबीन के बाद यही पाया गया कि संदिग्ध मौके से फरार हो गए हैं। पुलिस अनुसार फायरिंग किए जाने के कारणों का पता किया जा रहा है। घटनास्थल पर पूरी जांच के बाद भी खून के धब्बे नहीं मिले। गेट के पास गोलियां के निशान भी नहीं हैं और गोली किसने चलाई इसकी जांच जारी है।