{"_id":"5bb0cff1867a557f6b0b9528","slug":"menace-of-monkeys-in-udhampur-jammu-kashmir-can-become-big-issue-for-municipal-elections","type":"story","status":"publish","title_hn":"J&K: बंदरों का आतंक निकाय चुनाव में बन सकता है मुद्दा, झुंड में आते हैं और घरों में मचाते हैं उत्पात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
J&K: बंदरों का आतंक निकाय चुनाव में बन सकता है मुद्दा, झुंड में आते हैं और घरों में मचाते हैं उत्पात
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sun, 30 Sep 2018 07:00 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : फाइल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उधमपुर के रामनगर में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। हालत यह है कि लोगों का घर से निकलना मुहाल हो गया है। सभी चौक-चौराहों सहित प्रमुख स्थानों पर सुबह शाम बंदरों के झुंड लगे रहते हैं। इसकी वजह से लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। निकाय चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है।
इन दिनों निकाय चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। बड़े राजनीतिक दल के प्रत्याशी पार्टी की उपलब्धियों को गिनाकर लोगों से जुड़ाव कर रहे हैं। दूसरी निर्दलीय लोगों की समस्याएं सुधारने का दावा कर रहे हैं। लोगों की समस्याएं बिजली पानी, सफाई आदि तो है लेकिन इससे बड़ी समस्या बंदरों की है। जो झुंड में आते हैं और घरों में उत्पात मचाते हैं। साथ ही नगर के चौक चौराहों पर भी बैठे रहते हैं। बंदरों द्वारा लोगों को काटने की घटनाएं भी लगातार बढ़ती ही जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों की संख्या अब पहले से कई गुना बढ़ गई है और अक्सर बच्चों और बुजुर्गों को अपना शिकार बनाते हैं। हॉस्पिटल रोड, टाउन हॉल, नत्था सिंह पार्क सहित जितने भी प्रमुख स्थान हैं यहां से निकलना कठिन हो जाता है। स्थानीय निवासी रमेश कुमार गगन सिंह का कहना है कि बंदरों को पकड़ने की मांग कई वष से की जा रही है, लेकिन म्यूनिसिपल कमेटी ने इस समस्या को हल करने के लिए कोई भी गंभीर कदम नहीं उठाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों की समस्या निकाय चुनाव में भी एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इन दिनों निकाय चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। बड़े राजनीतिक दल के प्रत्याशी पार्टी की उपलब्धियों को गिनाकर लोगों से जुड़ाव कर रहे हैं। दूसरी निर्दलीय लोगों की समस्याएं सुधारने का दावा कर रहे हैं। लोगों की समस्याएं बिजली पानी, सफाई आदि तो है लेकिन इससे बड़ी समस्या बंदरों की है। जो झुंड में आते हैं और घरों में उत्पात मचाते हैं। साथ ही नगर के चौक चौराहों पर भी बैठे रहते हैं। बंदरों द्वारा लोगों को काटने की घटनाएं भी लगातार बढ़ती ही जा रही हैं।
विज्ञापन
स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों की संख्या अब पहले से कई गुना बढ़ गई है और अक्सर बच्चों और बुजुर्गों को अपना शिकार बनाते हैं। हॉस्पिटल रोड, टाउन हॉल, नत्था सिंह पार्क सहित जितने भी प्रमुख स्थान हैं यहां से निकलना कठिन हो जाता है। स्थानीय निवासी रमेश कुमार गगन सिंह का कहना है कि बंदरों को पकड़ने की मांग कई वष से की जा रही है, लेकिन म्यूनिसिपल कमेटी ने इस समस्या को हल करने के लिए कोई भी गंभीर कदम नहीं उठाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों की समस्या निकाय चुनाव में भी एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।
विज्ञापन