चुनाव के लक्ष्य के साथ जनता के बीच पहुंच रहीं पार्टियां
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सरकार गठन पर संशय बरकरार रहने के बीच सियासी दलों ने जनाधार में सेंधमारी की व्यूह रचना पर काम करना शुरू कर दिया है। दरअसल रियासत के सियासी परिदृश्य में खंडित जनादेश के मुक्ति पाने के लिए सियासी दल सदस्यता और अन्य अभियानों के माध्यम से जनाधार बढ़ाना चाहते हैं।
पीडीपी ने कश्मीर घाटी के बाद चार मार्च से जम्मू में भी सदस्यता अभियान जोर-शोर से चलाकर अपना जनाधार बढ़ाने के कार्यक्रम को अंतिम रूप दे दिया है।
महबूबा चार मार्च को जम्मू में और पांच मार्च को सांबा में सदस्यता अभियान शुरू करवाएगी। इसी तरह भाजपा ने कश्मीर में अपने जनाधार पर फोकस करना शुरू कर दिया है। नेकां और कांग्रेस के नेता भी जनाधार बढ़ाने के लिए सक्रियता से काम कर रहे हैं।
क्या चुनाव के मूड में है पीडीपी?
पीडीपी नेताओं की मानें तो सरकार गठन पर फंसे पेंच के बीच पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर में सदस्यता अभियान का बिगुल फूंकने के बाद अब जम्मू में सदस्यता अभियान को पुरजोर तरीके से चार मार्च से शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं।
हर जिले में सदस्यता अभियान के आगाज पर महबूबा मौजूद रहा करेंगी। नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री व मुख्यमंत्री रहे डा. फारूक अब्दुल्ला, कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भी जनाधार बढ़ाने के लिए सक्रियता बढ़ा दी है।
पार्टी में लोगों को शामिल करने की कवायद चल रही है। कांग्रेस ने भी अपनी गतिविधियों को बढ़ाया हुआ है। प्रदेशाध्यक्ष गुलाम अहमद मीर आए दिन जन रैलियों को संबोधित कर रहे हैं।
सरकार गठन पर भाजपा-पीडीपी की चुपी साधी
भाजपा ने भी जम्मू में सक्रियता बढ़ाने के साथ-साथ कश्मीर में पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन के साथ मिलकर घाटी में अपनी सक्रियता को बढ़ा दिया है। भाजपा कश्मीर में करीब डेढ़ लाख नए सदस्य बना चुकी है। कुल मिलाकर दस लाख से ज्यादा सदस्य पार्टी ने रियासत मे बनाए हैं।
वहीं रियासत में सरकार गठन पर पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की ओर से हाल ही के दिनों में चुप्पी तोड़ने और सरकार गठन की गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल रियासत में विश्वास बहाली करने के शर्त रखने के एक पखवाड़ा से ज्यादा बीतने के बाद भी सरकार गठन की गुत्थी सुलझ नहीं पाई है।
वर्तमान में महबूबा नई दिल्ली में संसद सत्र में हिस्सा ले रही है। दोनों दलों के नेता फिलहाल सरकार गठन पर चुप्पी साधे हुए हैं। पीएमओ में केंद्रीय राज्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. जितेंद्र सिंह भी इस मुद्दे पर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।