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कश्मीर घाटी में दरकी महबूबा मुफ्ती की जमीन, अब अपना किला बचाने की चुनौती

Sun, 16 Apr 2017 01:27 PM IST
बृ़जेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू
बृ़जेश कुमार सिंह, अमर उजाला/जम्मू Updated Sun, 16 Apr 2017 01:27 PM IST
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mehbooba mufti loosing political grounds in jammu and kashmir
महबूबा मुफ्ती - फोटो : फाइल फोटो

श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव में सीट खोकर पीडीपी को भारी झटका लगा है। पार्टी प्रमुख तथा मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की किरकिरी होने के साथ ही श्रीनगर में पार्टी की जमीन भी दरकी है। मत प्रतिशत घट गया है। भाजपा के साथ गठबंधन के बाद मिली पहली करारी हार से पार्टी ठिठक गई है।

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पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन से रिक्त अनंतनाग विधानसभा सीट पर महबूबा मुफ्ती की शानदार जीत से शुरू हुआ विजय अभियान थमने से पार्टी में मंथन शुरू हो गया है। भाजपा के साथ गठजोड़ के फायदे-नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
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साथ ही अब अपने गढ़ अनंतनाग को बचाने की रणनीति बनाई जाने लगी है।  वर्ष 2014 के चुनाव में पीडीपी प्रत्याशी तारिक हमीद कर्रा को 50.58 फीसदी मत मिले थे, जबकि नेकां प्रत्याशी फारूक अब्दुल्ला को 37.04 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे। इस तरह कर्रा चुनाव जीते थे।

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पीडीपी पर लगा RSS का एजेंडा लागू करने का आरोप

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महबूबा मुफ्ती - फोटो : FILE PHOTO

2017 के उपचुनाव में नेकां को 54.02 और पीडीपी को 42.03 फीसदी मत हासिल हुए। यानी पीडीपी को लगभग आठ प्रतिशत कम मत मिले और नेकां को 17 प्रतिशत मतों का फायदा हुआ। राजनीतिज्ञ पंडितों का मानना है कि यह बदलाव गंभीर संकेत है।

यह भाजपा के साथ गठबंधन के प्रति अवाम के गुस्से का इजहार तो है ही, कश्मीर में आए दिन हो रहे बवाल के प्रति भी नकारात्मक वोटिंग है। कश्मीर हिंसा के बाद कर्रा की पीडीपी नेतृत्व से दूरियां बढ़ती गईं। भाजपा के साथ गठबंधन का उन्होंने पुरजोर विरोध किया। महबूबा से मतभेद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी और संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

2017 के उपचुनाव में उन्होंने खुलकर पीडीपी का विरोध किया। इतना ही नहीं कश्मीर हिंसा के दौरान कश्मीरियों की मौत के लिए गठबंधन सरकार पर हमले किए। पीडीपी के जरिये घाटी में आरएसएस का एजेंडा लागू किए जाने का प्रचार किया। 

भाजपा के साथ गठबंधन का है रिजेक्शन

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प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती - फोटो : FILE PHOTO

विपक्ष का मानना है कि पीडीपी की हार भाजपा के साथ गठबंधन का रिजेक्शन है। जनता ने इस गठबंधन को नकार दिया है। नेकां विधायक देवेंद्र सिंह राणा कहते हैं कि अब पीडीपी की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अवाम ने पार्टी को नकारना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में पीडीपी को और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। 

श्रीनगर में हार से रियासत में भाजपा के साथ गठबंधन पर असर पड़ सकता है। कहा जा रहा है कि पीडीपी अपनी दरकती जमीन को बचाने के लिए गठबंधन पर पुनर्विचार कर सकती है, ताकि अवाम का दोबारा विश्वास हासिल किया जा सके।

हालांकि, पीडीपी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी। जो कुछ भी पार्टी को मजबूती देने के लिए करना होगा, वह सब उपाय किए जाएंगे।

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