अलगाववादियों का मन रखने के लिए महबूबा मुफ्ती ने बदला अपनी सरकार के कद्दावर मंत्री का विभाग
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मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती मिशन उप चुनाव में जुट गईं हैं। मंत्रिमंडल विस्तर में शिक्षा मंत्री नईम अख्तर के मंत्रालय में फेरबदल को भी इसी मिशन का हिस्सा माना जा रहा है। नईम से शिक्षा विभाग लेकर उन्हें पीडब्ल्यूडी सौंपे जाने के निर्णय को अलगाववादियों के प्रति नरम रुख के इजहार की संज्ञा दी जा रही है।
शिक्षा मंत्री के रूप में नईम अख्तर के कामकाज की सभी पक्षों से सराहना मिल रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह तक ने कश्मीर हिंसा के बावजूद दसवीं और बारहवीं की परीक्षा के शांतिपूर्ण आयोजन के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार की पीठ थपथपाई, लेकिन, इस क्रम में नईम से अलगाववादी और आतंकी संगठन नाराज हो गए।
आतंकी संगठनों ने नईम अख्तर को अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। स्कूल खोले जाने पर जोर और बंद हड़ताल के लगातार विरोध पर अलगाववादियों ने भी नईम को चेताया था।
कश्मीर हिंसा के दौरान 35 स्कूल जलाए गए
कश्मीर हिंसा के दौरान 35 स्कूल जलाए गए और कुल 133 भवनों को क्षतिग्रस्त किया गया था। उपद्रवी तत्वों ने स्कूल खोले जाने और परीक्षाओं के खिलाफ अभियान चलाया। पीएम नरेंद्र मोदी और राज्यपाल एनएन वोहरा ने स्कूलों में पठन-पाठन शुरू करने के लिए नईम के प्रयासों की सराहना की थी।
दरअसल, श्रीनगर को नेशनल कांफ्रेंस का मजबूत किला समझा जाता है। अलगाववादियों का भी इस संसदीय क्षेत्र पर खासा प्रभाव रहा है। पिछले चुनाव में बदलाव की लहर में नेेंका के फारूक अब्दुल्ला पीडीपी के तारिक हमीद कर्रा से चुनाव हार गए थे। अब कर्रा बगावत कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं और अलगाववादी पीडीपी -भाजपा गठबंधन सरकार से खफा हैं।
सूत्रों का कहना है कि नईम से शिक्षा मंत्रालय लेकर अमीराकदल के अल्ताफ बुखारी को यह जिम्मा देने से एक साथ दो लक्ष्य साधने की कोशिश हुई। अलगाववादियों को नईम से मंत्रालय लेने का संदेश दिया गया और श्रीनगर इलाके को मंत्रिमंडल में अहम मंत्रालय सौंपकर संतुष्ट करने की भी कोशिश हुई।
महबूबा ने श्रीनगर उप चुनाव को प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाया
महबूबा ने श्रीनगर उप चुनाव को प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाया है। वे बगावत करने वाले कर्रा को चुनाव में सबक सिखाना चाहती हैं। इसलिए मुख्यमंत्री के तमाम सियासी फैसले इसी लक्ष्य के तहत हो रहे हैं। उन्हें लगता है कि भाई तसद्दुक को अनंतनाग से उतारने पर मुफ्ती मोहम्मद के प्रति सहानुभूति के कारण उस सीट को जितना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा।
अनंतनाग को पीडीपी का गढ़ भी माना जाता है। श्रीनगर की जंग ज्यादा जटिल होने वाली है। लिहाजा, वीरवाह में उमर अब्दुल्ला से कम मतों से हारने वाले कांग्रेस के नाजिर अहमद वानी को पीडीपी में शामिल किया। वे मुफ्ती के सहयोगी रहे पूर्व मंत्री मो. सरफराज वानी के पुत्र हैं।
वीरवाह के ही पूर्व विधायक शफी अहमद वानी को पीडीपी में कोषाध्यक्ष बना दिया गया है। साथ ही नेकां छोड़कर आए पीडीपी के प्रवक्ता महबूब बेग को राजनीतिक मामलों की समिति में जगह दी गई। कर्रा की रणनीति को मात देकर फतह श्रीनगर मिशन के तहत यह व्यूहरचना की गई है।