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घराना वेंटलैंड मामले को लेकर सरपंचों के एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम से मिला

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घराना मामले के वारे सरपंच एसडीएम को जानकारी देते हुए - फोटो : RSPURA
आरएस पुरा। ब्लॉक सुचेतगढ़ के सरपंचों कर एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को एसडीएम से मुलाकात कर घराना वेटलैंड को लेकर किसानों की जमीनों को अधिग्रहण किए जाने का मुद्दा उनके समक्ष रखा। भाजपा पंचायती राज सेल के सह संयोजक तथा सरपंच सुजीत चौधरी की अध्यक्षता में मिले इस प्रतिनिधिमंडल ने कहा की घराना वेटलैंड विस्तार में गांव के जिन किसानों की भूमि आ रही है उन किसानों को भूमि के बदले भूमि दी जानी चाहिए तथा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक सुरक्षा पैकेज दिया जाए।
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प्रतिनिधिमंडल में शामिल सरपंचों ने कहा कि किसानों के साथ किसी तरह की नाइंसाफी सहन नहीं की जाएगी। अगर सरकार ने किसानों से जबरदस्ती जमीन छीनने का प्रयास किया तो ब्लॉक सुचेतगढ़ के सभी सरपंच किसानों के समर्थन में आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि घराना वेटलैंड का विस्तार होना चाहिए और पूरे सरपंच इसके समर्थन में हैं, लेकिन किसानों को उजाड़ कर अगर सरकार ने पक्षियों का वसेरा वनाने का प्रयास किया तो सरपंच इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेंगे।
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सरपंच विजय चौधरी, सरपंच दर्शन चौधरी तथा रजनी चौधरी ने कहा कि सरकार को गांव के लोगों के साथ बैठक करके इस समस्या का समाधान करने की जरूरत है । उन्होंने कहा कुछ राजनीतिक लोग लोगों को गुमराह भी कर रहे हैं जिनसे लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। प्रतिनिधिमंडल में सरपंच देवराज चौधरी, सरपंच ओंकार सिंह, सरपंच मनोहर लाल, सरपंच गारा राम, सरपंच तथा किसान सलाहकार बोर्ड की सदस्य बलवीर कौर सहित प्रतिनिधि मंडल में अन्य लोग भी शामिल थे।
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किसानों से सरकारी भूमि वापस लिए जाने से रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। राजस्व विभाग की ओर से किसानों से रोशनी, सरकारी व कस्टोडियन भूमि वापिस लिए जाने पर किसानों में रोष है। किसान इसको लेकर सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
किसान हंस राज, बलबीर चंद, अजीत राज, देसराज आदि ने बताया कि वह 70 वर्ष से सरकारी जमीन पर खेती पर परिवार का पालन-पोषण करते आ रहे हैं। अधिकतर किसानों के पास सरकारी व कस्टोडियन भूमि ही है, जिस पर वह खेती करते आ रहे हैं। अब राजस्व विभाग की ओर से सरकारी भूमि को खाली कराया जा रहा है। विभागीय कर्मचारी उन्हें भूमि छोड़ने के निर्देश जारी कर रहे हैं। ऐसे में किसान कहां जाएंगे। उनके पास वही भूमि है, जिससे उनकी गुजर बसर चलती है। उन्होंने कहा कि यदि विभाग ने उनसे भूमि छीनने पर जबरदस्ती की, तो किसान आंदोलन का रास्ता पकड़ लेंगे।
उनका कहना था कि किसान पहले से ही काफी परेशान है। अब सरकार ने उनकी रोजी रोटी के साधन को ही बंद कर दिया है। ऐसे में किसान आत्महत्याएं नहीं करेंगे तो क्या करेंगे। सनद रहे कि कांग्रेस के शासन काल में रोशनी एक्ट के अधीन सरकारी भूमि को मालिकाना हक दिया गया था। बाद में इस बारे में न्यायालय में मामला दायर कराया गया। अब सरकार की ओर से किसानों से रोशनी, सरकारी व कस्टोडियन भूमि को छुड़ाने की मुहिम चलाई गई है। किसानो के साथ विभिन्न राजनीतिक संगठनों ने भी आंदोलन की चेतावनी दी है।

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न्यायालय के आदेश मुताबिक ही रोशनी एक्ट की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा रहा है। सरकारी आदेश का उन्हें पालन करना है। सरकारी भूमि छुड़ाने के उन्हें आदेश मिले, जिस पर उनके कर्मचारी काम कर रहे हैं।
-राम पाल शर्मा, तहसीलदार, सांबा
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