{"_id":"5c530094bdec224bc356eaac","slug":"martyred-nazir-ahmed-wani-wife-said-she-will-motivate-children-to-go-on-right-path-in-kashmir","type":"story","status":"publish","title_hn":"आतंक का रास्ता छोड़ देश के लिए शहीद हुए नजीर की पत्नी बोलीं घाटी में बच्चों को दिखाएंगे सही रास्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आतंक का रास्ता छोड़ देश के लिए शहीद हुए नजीर की पत्नी बोलीं घाटी में बच्चों को दिखाएंगे सही रास्ता
Thu, 31 Jan 2019 07:35 PM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 31 Jan 2019 07:35 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
- राष्ट्रपति के हाथों अशोक चक्र लेकर लौटीं शहीद की पत्नी महजबीन पहुंची जम्मू
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
शोक चक्र विजेता लांस नायक नजीर अहमद वानी की पत्नी महजबीन
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
आतंक का दामन छोड़कर देश के लिए शहीद होने वाले अशोक चक्र विजेता लांस नायक नजीर अहमद वानी की पत्नी महजबीन का कहना है कि उन्हें अपने पति की शहादत पर फख्र है। शिक्षक होने के नाते स्कूली बच्चों तथा युवाओं को सही रास्ता दिखाने का उनका अभियान जारी रहेगा।दिल्ली में राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पाने के बाद पेशे से शिक्षक महजबीन इन दिनों जम्मू में हैं। महजबीन ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि बच्चों-युवाओं को सही रास्ता दिखाने के उनके अभियान के रास्ते में कई दुश्वारियां भी हैं। कई लोग इसे गलत समझते हैं। इसके बावजूद वह अपने गांव तथा स्कूल के बच्चों को लगातार प्रेरित करती रहेंगी कि वे गलत रास्ते पर न जाएं। मन लगाकर पढ़ाई करें और अपना करियर बेहतर बनाएं। हिंसा के रास्ते पर चलने से कुछ नहीं मिलने वाला है।
भटके युवाओं के लिए आदर्श हैं नजीर
महजबीन का कहना है कि नजीर आतंक की राह पर भटके युवाओं के लिए आदर्श हैं। वह हमेशा राज्य में शांति बहाली के बारे में सोचा करते थे। राष्ट्र के प्रति उनके हृदय में काफी सम्मान था। यही वजह है कि वे आतंक का रास्ता छोड़कर सेना में शामिल हुए। उन्होंने सेना में रहते हुए कई चुनौतियों का सामना किया। वे दूसरे के लिए प्रेरणा स्रोत भी बने। वह एक बहादुर सैनिक थे। हमेशा चुनौतीपूर्ण मिशन के लिए तैयार रहते थे। कई मौकों पर जान को खतरे में डालकर कर्तव्य का निर्वहन किया।
अब सारा ध्यान परिवार पर
उनका कहना है कि अब उनका पूरा ध्यान मां-बाप, देवर-देवरानी तथा बच्चों पर है। दो बच्चे अतहर और शाहिद क्रमश: कक्षा 12 और नौ में पढ़ रहे हैं। छोटा बेटा शाहिद कोटा में तो अतहर श्रीनगर में पढ़ाई कर रहा है। मिडिल स्कूल में शिक्षक महजबीन बच्चों को कश्मीरी व उर्दू की शिक्षा देती हैं। आवश्यकतानुसार गणित भी पढ़ाती हैं।