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बचपन से बड़े बलिदान की बातें करते थे कर्नल संतोष

Thu, 19 Nov 2015 01:59 PM IST
Updated Thu, 19 Nov 2015 01:59 PM IST
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martyr santosh wants to be sacrifise his life for nation from his childhood

कुपवाड़ा में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद होने वाले कर्नल संतोष बचपन से ही देश के लिए सर्वोच्च बलिदान की बातें किया करते थे। उनके स्कूल के सहपाठी प्रशांत पाटिल ने उनकी शहीदी पर सैन्य कर्मियों को लिखे संदेश में कहा, ‘सर्वोच्च बलिदान।

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नि:संदेह। वह इसी के लिए पैदा हुआ था। स्कूल के दिनों से ही यह अत्यंत उत्साहित लड़का सर्वोच्च बलिदान की बातें किया करता था।’ उनका कहना है कि छोटे से शहर के मिल्कमैन का बेटा था।
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पहलवान, लेकिन विनम्र स्वभाव। दूध बेचने के परिवार के पुस्तैनी धंधे को छोड़ उसने सैनिक स्कूल सतारा में दाखिला लिया। मानसिक रूप से शांत। आचरण से कोमल और उसके दिल में कुछ करने का तूफान था।
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स्कूल का सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज, स्टेट स्कूल फुटबाल टीम का बेस्ट गोलकीपर और पागलों की तरह दौड़ने वाला धावक। जिम में जब भी कड़ी मेहनत करता था तो उसके चेहरे पर मुस्कान होती थी। जिम में घंटों मेहनत करता था।

जब मुक्केबाजी में हारे दोस्त

martyr santosh wants to be sacrifise his life for nation from his childhood

मुक्केबाजी के एक मुकाबले से पहले मैंने उसे कहा था कि संटू भले ही तुम अच्छे मुक्केबाज हो, लेकिन इस बार मैं तुम्हें हरा कर छोड़ूगा। उसने मेरी बात पर सिर्फ मुस्कान बिखेरी।

लेकिन मैं उससे हार गया। मुकाबले के बाद जब मैंने उसके पिता की मौजूदगी मैं उसे बधाई दी तो उसके पिता ने कहा, ‘तुमने अपने मेडल बॉक्सर को बचा लिया। मैरे बेटे का यह बेहतरीन मुकाबला नहीं था।

उसकी असली लड़ाई सीमा पर होगी, जब वह राष्ट्र की सुरक्षा में तैनात होगा। मेरा बेटा हमेशा विजयी रहेगा।’ क्लास 11वीं का स्टूडेंट होने के नाते मुझे बार्डर और सैन्य आपरेशन के बारे कुछ ज्ञान नहीं था।

लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान से लग रहा था कि उसके पिता ने दिल की बात कह दी हो। 17 नवंबर को संटू एक सच्चे सैनिक की तरह लड़ा। उसने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान किया।

उसने अपने पिता और हम सभी का गर्व से सिर ऊंचा कर दिया। उसकी मुस्कान के संस्मरण हमारे मन में प्रतिध्वनि कर रहे हैं कि ‘वह हमेशा विजयी रहेगा।’

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