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शरणार्थी रोहिंग्याओं की मदद कर रहे जम्मू-कश्मीर के तीन मदरसे

Sat, 21 Jan 2017 11:23 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Sat, 21 Jan 2017 11:23 AM IST
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madarsa's helping rohingya community in jammu and kashmir
विधानसभा में बोलते विधायक सत शर्मा - फोटो : FILE PHOTO

जम्मू कश्मीर में 5743 रोहिंग्या जम्मू और सांबा इलाके में रहते हैं। तीन मदरसों की ओर से इन्हें सहायता प्रदान की जाती है। नरवाल बाला, गोल मस्जिद और बाड़ी ब्राह्मणा रेलवे स्टेशन के पास चल रहे इन मदरसों में 24 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें स्थानीय शिक्षकों के साथ ही म्यांमार के भी लोग हैं। 

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विधायक सत शर्मा के प्रश्न के  लिखित जवाब में गृह मंत्री की ओर से बताया गया कि रियासत में रोहिंग्या अपने से आए हैं और विभिन्न स्थानों पर रह रहे हैं। 322 विदेशी रियासत में रहते हैं। 38 रोहिंग्याओं के खिलाफ 17 प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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शखावत, एसआर इंस्टीट्यूट आफ डेवलपमेंट, दाजी और सेव द चिल्ड्रेन सामाजिक संस्थाओं की ओर से रोहिंग्याओं की मदद की जाती है। सरकार की ओर से इनकी गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जाती है।  

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रात साढ़े सात बजे तक चली विधानसभा

madarsa's helping rohingya community in jammu and kashmir
जम्मू-कश्मीर विधानसभा - फोटो : FILE PHOTO

जम्मू कश्मीर की राज्य विधानसभा में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के ग्रांट पर रिकार्ड चर्चा चली। लगभग साढ़े सात घंटे तक 46 विधायकों ने चर्चा में भाग लिया। सदन की कार्यवाही रात साढ़े 10 बजे खत्म हुई। इससे पहले भी कई बार विधानसभा की कार्यवाही देर रात तक चली है। खासकर पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के कार्यकाल में। 

रात साढ़े आठ बजे सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की ओर से चर्चा के लिए समय बढ़ाए जाने की मांग उठाई गई, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि पहले भी ग्रांट पर चर्चा दो सीटिंग में होती रही है। रात के 11 बजे तक चर्चा चली है।

ग्रांट पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की सराहना की गई। खासकर कश्मीर में हिंसा के दौरान जिस प्रकार से डाक्टरों तथा पैरा मेडिकल स्टाफ ने दिन रात मेहनत की। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को सराहा गया कि अब देर रात भी लोगों की बात सुनी जा रही है।

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