जम्मू में सोशल डिस्टेंसिंग हुई तार-तार, आईजीपी बोले- पेंशन लेने आए लोगों को मना नहीं कर सकते, पुलिस भेजी है
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कोरोना वायरस के प्रकोप को खत्म करने के लिए जम्मू-कश्मीर में पुलिस और सेना मुस्तैदी से जुटी हुई है। इसी क्रम में लगातार प्रशासन की ओर से लोगों को कोरोना वायरस से बचाव के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उधर, आज यानी कि शुक्रवार को जम्मू संभाग के आरएस पुरा से ऐसी तस्वीर सामने आई है जो काफी चिंताजनक है।
यहां बैंक के बाहर लोगों की कतार लगी है। सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन लोगों की तरफ से नहीं किया गया। हैरानी वाली बात तो यह है कि बैंक के बाहर लगी इस भीड़ के बारे में पुलिस अनजान रही।
वहीं जब पुलिस के अधिकारियों से इस संबंध में बात की गई तो आईजीपी जम्मू, मुकेश सिंह ने कहा कि ये लोग पेंशन लेने के लिए आए हैं। इनको मना नहीं कर सकते हैं लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूरी है। इसके लिए पुलिस को मौके पर भेजा गया है।
जम्मू-कश्मीर में व्यापक स्तर पर कांटेक्ट ट्रेसिंग शुरू
वहीं, कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर में व्यापक स्तर पर कांटेक्ट ट्रेसिंग शुरू की गई है। इसके तहत कोरोना के पॉजिटिव मरीजों के संपर्क में आए अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। जम्मू-कश्मीर के एक अधिकारी ने बताया कि जम्मू कश्मीर में लगभग 2000 ऐसे लोग हैं जो कोरोना पॉजिटिव मरीजों के संपर्क में आए थे।
अधिकारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के जिन इलाकों में ज्यादा संक्रमण फैला है उन्हें आइसोलेट करने सहित सील कर दिया है और वहां पर आवाजाही पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। कश्मीर संभाग के सभी प्रमुख मार्गों को आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। सुरक्षाबलों के जवान लगातार आने जाने वाले की जांच कर रहे हैं। सभी सार्वजनिक स्थानों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
बुधवार को मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिए थे कि कांटेक्ट ट्रेसिंग के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जाए और संक्रमितों के संपर्क में आए सभी लोगों को क्वारंटीन कर उनके सैंपल लिए जाएं। उन्होंने ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही को भी बंद करने के लिए कहा था।
क्या होती है कांटेक्ट ट्रेसिंग
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कांटेक्ट ट्रेसिंग बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसमें कोरोना पॉजिटिव पाए गए व्यक्ति से पूछताछ के बाद व्यापक स्तर पर जांच होती है। इसमें पॉजिटिव व्यक्ति कहां गया था। कितने लोगों से मिला, इसकी सूची बनाई जाती है। इसके बाद उसके संपर्क में आए सभी लोगाें को क्वारंटीन किया जाता है, ताकि पता चल सके कि वह लोग भी तो कोरोना से संक्रमित तो नहीं हैं।