लॉकडाउन के बीच 100 से अधिक मजदूर पैदल ही निकल पड़े यूपी, प्रशासन ने रोक कर घर भेजा
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देशव्यापी लॉकडाउन का तीसरा चरण शुरू होने के बीच उत्तर प्रदेश के 100 से अधिक प्रवासी मजदूर अपने गांव जाने के लिए सोमवार को यहां से पैदल ही रवाना हो गए। स्थानीय प्रशासन ने हस्तक्षेप कर उन्हें उनके किराये के आवास में भेजा। तीन अलग समूहों में चल रहे मजदूरों को पुलिस ने त्रिकुटा नगर क्षेत्र में रोका। साइंस कॉलेज के पास किराये के मकानों में रहने वाले इन मजदूरों को अपने आवास पर लौटने को कहा गया। उन्हें आश्वासन दिया गया कि जल्दी ही उन्हें उनके घर पहुंचाने का प्रबंध किया जायगा।
जम्मू के अतिरिक्त उपायुक्त ताहिर फि रदौस दत्ता ने बताया कि प्रवासी मजदूरों ने स्वयं पैदल घर जाने का निर्णय लिया। हमने उन्हें उनके आवास पर लौटने को कहा। साथ आश्वासन दिया कि जब तक उनके गृह राज्य जाने का प्रबंध नहीं हो जाता तब तक पर्याप्त मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जाएगा। सूचना मिलने पर उन्होंने मौके पर जाकर मजदूरों से बात की तथा उन्हें आश्वासन दिया। दत्ता ने बताया कि जम्मू में लगभग 75 हजार प्रवासी मजदूर हैं और सरकार उन्हें मुफ्त राशन देने का पूरा प्रयास कर रही है।
गोरखपुर के निवासी सेमन दुर्बल ने कहा कि निराशा में उन्होंने यह कदम उठाया क्योंकि लॉकडाउन का कोई अंत नजर नहीं आ रहा। हम लोग पिछले 40 दिन से साझा कमरे में बेकार बैठे हैं और हमें रोज के खाने का प्रबंध करने जैसी कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। हमारा अस्तित्व संकट में है। सरकार ने पहले 10 किलो गेहूं और चावल भेजा था उसके बाद कुछ नहीं भेजा।
ऐसे नहीं जी सकते और अब हमने निर्णय लिया है कि पैदल चलकर घर जाएंगे
उन्होंने कहा कि हम ऐसे नहीं जी सकते और अब हमने निर्णय लिया है कि पैदल चलकर घर जाएंगे। उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर निवासी एक अन्य मजदूर रमेश ने कहा कि उन्हें गैस सिलिंडर, खाने का सामान नहीं मिल रहा है और पैसे भी समाप्त हो गए हैं।
कहा कि सरकार ने दो हजार रुपये दिए और राशन का किट भी दिया। 50 दिन के लिए क्या यह पर्याप्त है? एक अन्य मजदूर ने कहा कि सरकार ने उनकी जो सहायता की वह पर्याप्त नहीं है । वह रोजाना 300 से 350 रुपये कमाता था, लेकिन पिछले डेढ़ महीने से कमाई बिल्कुल ठप है। ऐसे में सरकार उनकी सुरक्षित वापसी का रास्ता प्रशस्त करे। ज्ञात हो कि रविवार को कठुआ से भी राजस्थान के लिए मजदूर परिवार के साथ पैदल ही निकल गए थे।