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जम्मूः खाद्य पदार्थों की बिक्री में हो रही जमकर मुनाफाखोरी, होलसेल से रिटेल तक में मनमानी

Sat, 16 May 2020 02:48 PM IST
प्रशांत कुमार संजीव दुबे, जम्मू
संजीव दुबे, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 16 May 2020 02:48 PM IST
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lockdown in Jammu Kashmir (J&K) news in Hindi, High profiteering in sale of food items in Jammu
राशन - फोटो : सोशल मीडिया

महामारी और लॉकडाउन से जम्मू-कश्मीर में हजारों की संख्या में परिवारों पर जहां रोजगार छिनने से रोजी रोटी का संकट हैं, वहीं मुश्किल घड़ी में जरूरी पदार्थों की बिक्री करने वाले दुकानदार व व्यापारी मुनाफाखोरी कर तिजोरिया भर रहे हैं। आलम यह है कि लॉकडाउन से पहले तक जो जीवन रक्षक दवाइयों के दुकानदार हर दवाई पर 15 से 60 फीसदी तक डिस्काउंट देते थे, वह भी अब बंद कर अधिकतम बिक्री मूल्य पर बिक्री कर रहे हैं।

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जम्मू शहर में प्रत्येक किराना की दुकान पर दालों के भाव अलग-अलग हैं। राजमा की ही बात करें, तो किसी दुकान पर सौ तो किसी पर 200 रुपये है। कहीं इससे भी ज्यादा रेट पर मिल रहे हैं। यही हालत अन्य दालों के मामले में भी है। सब्जी का भी यही हाल है। होलसेल या फिर रिटेल हर जगह मनमानी चल रही हैं। लोग इंसानियत छोड़ जेब भरने में लगे हैं।
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मजदूरों, ट्रांसपोर्टरों, पुजारियों के सामने बना रोजी-रोटी का संकट  
दूसरी ओर लॉकडाउन और कोरोना वायरस ने दिहाड़ीदार मजदूरों, रेहड़ी वालों, पर्यटन से जुड़े लोगों, ट्रांसपोर्टरों, मंदिरों के पुजारियों, पंडितों आदि के परिवार के लिए रोजी रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। स्पेशल टूरिस्ट टैक्सी एसोसिएशन के अध्यक्ष इंद्रजीत शर्मा के अनुसार जम्मू में 1350 के करीब टैक्सी हैं। श्री माता वैष्णो देवी तीर्थ स्थल के लिए पर्यटकों को ले जाना व वापस आना टैक्सी आपरेटरों का मुख्य व्यवसाय था।
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इसके अलावा रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट और श्री अमरनाथ यात्रा शुरू होने पर भी टैक्सी वालों का काम खूब चलता था। यह सब खत्म हो चुका है। करीब एक साल टैक्सी वालों को काम पर लौटने की उम्मीद भी नहीं है। सरकार ने अभी तक टैक्सी से जुड़े हजारों लोगों के परिवारों की सुध नहीं ली है।

बिना काम के टैक्सी के लोन की किश्त, इंश्योरेंस, पार्किंग फीस और टैक्सी की देखभाल कैसे करें। कम से कम सरकार एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर टैक्सी का पार्किंग शुल्क जो लाखों में है, उसे छह महीने के लिए माफ कर दे। अन्य ट्रांसपोर्टरों, जिसमें बस आपरेटरों की हालत भी ऐसी ही हैं।


कुछ समझ नहीं आ रहा
दिहाड़ी मजदूर सुरेंद्र कुमार का कहना है कि कंस्ट्रक्शन वर्क बंद होने से रोजी रोटी का संकट बन गया है। क्या करें कुछ समझ में नहीं आ रहा।

 

पुजारियों पर भी छाई तंगहाली

पंडित विशाल शर्मा का कहना है कि पिछले दो महीने से ज्यादा समय से काम नहीं हैं। सरकार को पुजारियों की भी सुध लेनी चाहिए। सरकार को आर्थिक पैकेज पंडितों को भी देना चाहिए।

हर वर्ग का खयाल रखने की जरूरत
कांग्रेस के सचिव नीरज गुप्ता का कहना है कि कुछ लोग लॉकडाउन में मनमानी कर मुनाफाखोरी कर रहे हैं, तो कुछ को रोजी रोटी तक का संकट है। सरकार और प्रशासन को मुनाफाखोरी करने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही हर वर्ग का खयाल रखना चाहिए।

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