सीमांत गांवों के लिए कड़वी यादें छोड़ गया 2014
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वर्ष 2014 सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कई कड़वी यादें दे गया। 11 वर्षों के बाद लोग दहशत के साये में घर छोड़ने को मजबूर हुए और अब भी दहशत में रह रहे हैं। पाकिस्तान ने इस साल संघर्ष विराम की बड़ी उल्लंघना करते हुए रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया।
जो क्षेत्र पाकिस्तानी गोलाबारी की चपेट में नहीं आ सके, वहां पाकिस्तान ने राकेट और मोर्टार दागे। इसकी वजह से करीब दो दर्जन लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हो गए। ऐसे में लोग दुआ कर रहे हैं कि नया साल उनके लिए शांति लेकर आए।
वर्ष 2013 में अंतर्राष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर 347 मामले संघर्ष विराम के सामने आए थे। इनमें से 199 नियंत्रण रेखा पर ही हुए। लेकिन इस साल संघर्ष विराम के करीब 400 मामले सामने आ चुके हैं। इसकी चपेट में नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा दोनों ही आई।
2003 में सीमा पर संघर्ष विराम की घोषणा हुई थी। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। पिछले दो वर्षों से संघर्ष विराम की उल्लंघना काफी बढ़ गई है। इस साल पाक ने सारी हदें तोड़ते हुए रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया।
नहीं भूलेगा अरनिया का हमला
इस साल पहली बार आरएसपुरा क्षेत्र में आतंकी हमला हुआ। इसे लोग कभी नहीं भूल पाएंगे। लोगों ने आतंकियों को देखा भी। इस हमले में पांच सिविल लोगों की मौत हो गई थी। गांव के कुलदीप राज का कहना है कि यह हमला ताउम्र याद रहेगा। इस हमले ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है, क्योंकि यह इलाका कभी प्रभावित नहीं हुआ। बीएसएफ की सतर्कता से कभी असुरक्षित महसूस नहीं किया, लेकिन अब सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों के इंटरनेशनल बार्डर पर पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का जोरदार उल्लंघन किया। रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। अक्तूबर महीने में आरएसपुरा, रामगढ़, हीरा नगर, अरनिया आदि में पाक ने मोर्टार के गोले दागे और राकेट लांचर तक चलाए। इसमें 20 लोगों की जान चली गई। करीब 30 हजार लोगों को घर छोड़ कर विस्थापित कैंपों में रहना पड़ा।
रियासत के उड़ी, राजोरी, पुंछ, कुपवाड़ा, बारामुला की एलओसी पर इस साल जमकर संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ। पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों के रिहायशी इलाकों में मोर्टार के गोले दागे। करीब एक दर्जन लोगों की मौत हुई। कई लोग घायल हुए। बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़कर दूसरे स्थानों पर जाना पड़ा।
नए वर्ष में पाक को मिले सद्बुद्धि
राजोरी की एलओसी, मांजाकोट सेक्टर के राजधानी में रहने वाले शकूर का कहना है कि इस साल पाक की तरफ से उनके घरों को निशाना बनाया गया।
इसकी वजह से उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। दुआ करते हैं कि इस साल पाक को सद्बुद्धि मिले और वह ऐसी नापाक हरकतें नहीं करे।
आरएसपुरा के अंतर्राष्ट्रीय बार्डर पर स्थित अब्दुल्ल्यिं गांव के नायब सरपंच नरेश चौधरी का कहना है कि वर्ष 2014 यहां रहने वाले लोगों के लिए दहशत भरा रहा। इतनी गोलाबारी और ऐसे हालात कभी नहीं देखे। इस साल ऐसा नहीं होना चाहिए।