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जम्मू-कश्मीर: सांसदों-विधायकों की तरह डीडीसी के लिए सीडीएफ का उठा मुद्दा, सरकार ने किया संवाद

Tue, 08 Jun 2021 01:01 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 08 Jun 2021 01:01 PM IST
सार

संवाद के दौरान मुख्य सचिव ने आश्वस्त किया कि सरकार उनकी सभी प्रकार की समस्याओं तथा मांगों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। कोशिश है कि ग्रामीण इलाकों में विकास की चाबी उनके हाथों में हो। उन्होंने सभी अधिकारियों को हिदायत दी कि डीडीसी सदस्यों, अध्यक्षों व उपाध्यक्षों को पूरा सम्मान मिले। उनकी हर बातों को तवज्जो मिलनी चाहिए। क्षेत्र में कोई भी काम शुरू करने से पहले उन्हें विश्वास में लिया जाना चाहिए। 

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Like MPs MLAs issue of CDF raised for DDC in Jammu and Kashmir
जम्मू-कश्मीर - फोटो : Social media

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिला विकास परिषद अध्यक्षों के साथ सोमवार को सरकार ने पहली बार सीधा संवाद स्थापित कर उनकी विकास में सहभागिता सुनिश्चित करने की कोशिश की। उनकी समस्याओं के बारे में भी जानकारी हासिल की। सभी डीडीसी अध्यक्षों ने एक राय से सांसदों-विधायकों की तर्ज पर दो करोड़ रुपये सीडीएफ तय करने की मांग रखी। साथ ही 73वां संविधान संशोधन के अनुरूप उन्हें सभी प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराने को कहा। 

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मुख्य सचिव डा. अरुण कुमार मेहता ने सभी डीडीसी अध्यक्ष के साथ वर्चुअल तरीके से संवाद किया। इस दौरान अध्यक्षों ने कहा कि 73वां संविधान संशोधन प्रदेश में लागू कर दिया गया है, लेकिन यह धरातल पर नहीं उतरा है। इसके अनुरूप अध्यक्षों व उपाध्यक्षों को सुविधाएं मिलनी चाहिए। कहा कि सीडीएफ की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि वे सांसदों-विधायकों की तरह अपने क्षेत्र में विकास कार्य सुनिश्चित करा सकें। सभी अध्यक्ष व उपाध्यक्षों को सरकारी वाहन तथा आवास उपलब्ध कराना चाहिए। इसके साथ ही प्रत्येक सदस्य को सुरक्षा भी मुहैया कराना चाहिए।
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कई महिलाएं पंचायत प्रतिनिधि हैं, जिन्हें सुरक्षा और वाहन की सुविधा न होने से क्षेत्र में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव हुए छह महीने से अधिक समय हो गया, लेकिन अब तक उन्हें मानदेय नहीं मिला है। उनका कहना था कि सरकार और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच एक रिक्तता उत्पन्न हो गई है, जिसे खत्म किया जाना चाहिए। इस दौरान मंडलायुक्त-आईजी और डीसी-एसपी भी जुड़े हुए थे। 
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आज पहली बार लगा कि सरकार गंभीर है। उनकी बातों को गंभीरता से सुना गया। ऐसा लगा कि सरकार पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करना चाहती है। विकास में उनकी भागीदारी भी सुनिश्चित करना चाहती है। यह शुभ संकेत है। -भारत भूषण-अध्यक्ष, जम्मू जिला विकास परिषद

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