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Jammu News: बांदीपोरा में 32 साल पूर्व दिनदहाड़े हत्या करने वाले आतंकी को उम्रकैद

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Life imprisonment to terrorist who committed murder in broad daylight 32 years ago in Bandipora
- सात दिसंबर 1993 को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी अब्दुल वाहिद मीर ने की थी हत्या
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- बांदीपोरा के ओनगाम निवासी बुनकर मोहम्मद शफी हज्जाम के सिर में मारी थी गोली
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। बांदीपोरा के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील सिंह 32 साल पहले उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में एक नागरिक की दिनदहाड़े हुई हत्या के मामले में नामजद आरोपी हिजबुल मुजाहिदीन के एक आतंकवादी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हत्यारा अब्दुल वाहिद मीर (55) मौजूदा समय यूपी के आगरा जेल में बंद है। उसने न्यायालय में सफाई दी कि आतंकवाद के चंगुल में फंस कर उसने हत्या की थी, लेकिन अब वह सुधर चुका है। उसे आरोपों से मुक्त किया जाए। कोर्ट ने उसकी सारी बातों को खारिज करते जघन्य अपराध के लिए सजा सुनाई।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील सिंह ने फैसले में कहा कि प्रत्यक्ष और दस्तावेजी दोनों ही तरह के साक्ष्यों पर गहन विचार करने के बाद यह न्यायालय इस निर्णय पर पहुंचा है कि सात दिसंबर 1993 को मोहम्मद शफी हज्जाम की गोली मारकर हत्या अब्दुल वाहिद मीर ने की थी। उन्होंने आगे कहा कि यह कृत्य मृतक के परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में दिनदहाड़े किया गया था। इस प्रकार अभियोजन पक्ष बिना किसी संदेह के यह साबित करने में सफल रहा है कि आरोपी आरपीसी की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध का दोषी है।
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अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने यह भी साबित कर दिया है कि हत्या अवैध हथियार से की गई, जिससे आर्म्स एक्ट की धारा 7/27 भी लागू होती है। मीर ने ऐसे सबूतों को गायब करने का भी प्रयास किया जिससे वह आरपीसी की धारा 201 के तहत और भी अधिक उत्तरदायी हो गया। अदालत ने हत्या के लिए आजीवन कारावास, साक्ष्यों को गायब करने पर तीन साल और आर्म्स एक्ट के तहत सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। सबूतों के अभाव में हत्यारे के साथी अली मोहम्मद ख्वाजा उर्फ खान को बरी कर दिया गया।
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घर में से खींचकर दिनदहाड़े की थी हत्या
बांदीपोरा पुलिस स्टेशन में दर्ज मुकदमें के मुताबिक सात दिसंबर 1993 को ओनगाम में अज्ञात हथियारबंद लोग पेशे से बुनकर मोहम्मद शफी हज्जाम पुत्र गफ्फार हज्जाम को घर से खींचकर जबरन उसी के स्कूटर से कब्रिस्तान में ले गए और सिर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। बांदीपोरा पुलिस स्टेशन ने आरपीसी की धारा 302, आर्म्स एक्ट 25/27 के तहत अज्ञात के खिलाफ एफआईआर 170/1993 दर्ज किया था। संदिग्धों की पहचान में नाकाम जांच अधिकारी ने कोई सुराग नहीं मिलने पर जांच को अज्ञात मानकर बंद कर दिया था।

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हत्या के 11 साल बाद परिजनों ने दर्ज कराया बयान
अभियोजन पक्ष के मुताबिक घटना के 11 साल बाद मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी पुलिस स्टेशन पहुंचे और अपना बयान दर्ज कराया। जिसमें उन्होंने दो आरोपियों को नामजद किया। तत्कालीन एसडीपीओ बांदीपोरा ने 29 नवंबर 2004 को मामले को फिर से खोलने का निर्देश दिया और जांच फिर से शुरू की गई। पता चला कि घटना के दिन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आरोपी हज्जाम के घर पहुंचे और उसका स्कूटर मांगा। डर के मारे हज्जाम स्कूटर लेकर उनके साथ चल दिए। कुछ दूरी पर मौजूद कब्रिस्तान में पहुंच कर आतंकी अब्दुल वाहिद मीर ने सिर में गोली मार दी। जांच के दौरान ओनगाम निवासी आतंकी अब्दुल वहीद मीर को हिरासत में ले लिया गया।
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