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Amar Ujala Samvad : LG सिन्हा बोले- जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने से पहले यहां से नहीं जाने वाला

Fri, 01 Dec 2023 06:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 01 Dec 2023 06:04 AM IST
सार

उप राज्यपाल मनोज सिन्हा बृहस्पतिवार को अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। 

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LG Sinha said - will not leave valley before holding assembly elections
जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने तमाम अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराकर ही यहां से जाएंगे। यहां का खाना भी पसंद आने लगा है और यहां के लोग भी रास आ रहे हैं। वह बृहस्पतिवार को अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। 

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एलजी ने संवाद में कहा कि उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं। इस वजह से यूपी को मिस तो करता हूं, लेकिन अब यहां के लोग और खाना पसंद आने लगा है। इसलिए जल्दी नहीं है। विधानसभा चुनाव कराने से पहले यहां से नहीं जाने वाला। यह पूछे जाने पर कि राज्यपाल या उप राज्यपाल बनने को राजनीति से रिटायरमेंट माना जाता है तो उन्होंने कहा कि वह इतना नहीं सोचते। यह पूछने पर कि चर्चा है कि वह लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए जाने वाले हैं तो कहा, मिला जुला खेल नहीं खेलता हूं। राष्ट्र सेवा का उन्हें सबसे बड़ा काम सौंपा गया है जिसे पूरा करना है। मैं इसे चुनौती नहीं मानता। 
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उप राज्यपाल ने कहा कि कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर भारी गफलत है। वह यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में सरकारी योजना बनी थी जिसमें 3000 नौकरियां तथा 3000 मकान बनाए जाने थे। मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी 3000 नौकरियों तथा 3000 आवास की घोषणा की गई।
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कश्मीरी पंडितों के लिए 3,000 मकान तैयार
मनोज सिन्हा ने कहा कि जब वह यहां आए तो 2,837 पदों पर नियुक्ति हो पाई थी। उन्होंने इसे गति देते हुए 38 पदों को छोड़कर करीब छह हजार पद भर दिए। यह 38 पद भी कानूनी अड़चन की वजह से नहीं भर पाए हैं। वह जब आए थे, तो केवल 700 मकान बने थे। 6000 आवास के लिए जमीन मुहैया करा दी गई है। इनमें से 3000 मकान बनकर तैयार हो गए। प्रयास किया जा रहा है कि केवल कश्मीरी पंडित ही नहीं जम्मू में रहने वाले लोग भी कश्मीर में जाकर रहे। 

उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर
उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू कश्मीर में अनेक जड़ता थी, अनेक खड्डे थे और जंजीर थी। 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद पिछले चार सालों में अंधेरे से निकलकर उज्ज्वल भविष्य की ओर जम्मू कश्मीर अग्रसर हुआ है। जब कोई बीज डालते हैं और वह वृक्ष बनने लगता है तो प्रसन्नता होती है। हर नागरिक की आकांक्षा को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मैं मिला जुला खेल नहीं खेलता। मुझे राष्ट्र सेवा का सबसे बड़ा काम सौंपा गया है, जिसे पूरा करना है। मैं इसे चुनौती नहीं मानता।
-मनोज सिन्हा, ले. गवर्नर 

देशभर के उद्यमी उद्योग स्थापित करने जम्मू-कश्मीर आएं 
उप राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर समेत अन्य पर्वतीय राज्यों में कृषि योग्य भूमि पर केवल वहां के नागरिकों का हक होता है। लेकिन विश्वविद्यालय, अस्पताल, संस्थान, आतिथ्य, उद्योग आदि क्षेत्रों के लिए सरकार भूमि दे रही है। उन्होंने देशभर के उद्यमियों से आग्रह किया कि वे जम्मू कश्मीर आएं और यहां उद्योग स्थापित करे, सरकार पूरी मदद करेगी।  

राजनीतिक शून्यता नहीं, निकाय चुनाव जल्द
जनता व सत्ता के बीच भरोसे की कमी तथा 2019 के बाद राजनीतिक शून्यता जैसे हालात नहीं है। जम्मू कश्मीर के पांच लोग संसद में हैं। पंचायती राज व्यवस्था चल रहा है। जम्मू-कश्मीर में सबसे देर से त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू हुई, लेकिन अब यह देश के किसी भी राज्य से कम नहीं है। 

  • उन्होंने कहा कि निकाय सभी जगह काम कर रहे थे। चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी। लेकिन कुछ सांविधानिक अड़चन आ गई। राज्य पुनर्गठन के बाद ओबीसी को आरक्षण का प्रावधान नहीं था, जबकि यह अनिवार्य है। ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था होने के तत्काल बाद चुनाव कराए जाएंगे। 

विदेश में हीरो क्रिएट करते हैं और भारत में हीरो पैदा होते हैं...

कश्मीर घाटी अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद लाइट, कैमरा और एक्शन से फिर गूंज रही है। इस बात को और पुख्ता कर दिया बॉलीवुड अभिनेता विक्की कौशल ने। उन्होंने कहा कि पारंपरिक सिनेमा का भविष्य उज्ज्वल है। ओटीटी से इसे किसी तरह का खतरा नहीं है। पारंपरिक सिनेमा में आज भी कहानियां हीरो पर गढ़ी जा रही है जबकि ओटीटी में हीरो के हिसाब से।

जम्मू में बृहस्पतिवार को उमर उजाला संवाद जम्मू और कश्मीर में सफेद ब्लेजर और आधी घुंघराली दाढ़ी वाली लुक में विक्की ने जैसे ही मंच पर कदम रखा, तो हॉल दर्शकों की तालियों और हाउ इज द जोश से गूंज उठा। सैम बहादुर के बारे में उन्होंने बताया कि यह 1971 की जंग की कहानी है। साथ ही यह पहली फिल्म है जिसमें लड़ाई की दृश्यों में असली फौजी हैं।  

सबसे बड़ी आलोचक मां :
विक्की अपनी मां के बहुत करीब हैं। वह कहते हैं, उनका परिवार ही उनकी फिल्मों का सबसे बड़ा अालोचक है। मां इतनी साफ दिल हैं कि कुछ भी मुंह पर कह देती हैं। राम राघव फिल्म दिखाने के लिए वह मां को साथ ले गए। उस फिल्म में मेरा पुलिस का रोल था लेकिन मां को पसंद नहीं आया। मैंने पूछा फिल्म कैसी लगी तो मां ने बोला-बकवास। 

 

स्टार्टअप फेल हो जाए तो सीख लें और आगे बढ़ें : रजनीश

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन और भारत पे व मास्टर कार्ड के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि युवा स्टार्टअप तो शुरू करते हैं, लेकिन उसमें असफल हो जाने पर निराश हो जाते हैं। आइडिया फेल हो जाए तो घबराने की नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है। ऐसा कोई बिजनेस नहीं, जिसमें जोखिम न हो। अपने संघर्ष और बैंकर के रूप में शानदार कॅरिअर को साझा करते हुए रजनीश कुमार ने कहा कि आज देश डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ रहा है। 2000 से पहले किसी को पैसा ट्रांसफर करना बड़ी समस्या थी। आज चुटकियों में लाखों रुपये एक खाते से दूसरे खाते में भेजे जा सकते हैं। 

असुरक्षित निजी लोन में ग्रोथ ज्यादा पर जोखिम भी
रजनीश कुमार ने कहा, आज बैंक धड़ल्ले से असुरक्षित निजी लोन जारी कर रहे हैं। इससे बैंकों की ग्रोथ तो बढ़ रही है, लेकिन बैंकों के लिए एक बड़ा जोखिम भी है। बैंकों को यह देखना होगा कि भविष्य में कोई बड़ी समस्या न खड़ी हो जाए।

अमेरिकी टेक कंपनियों में भारत का दबदबा
तकनीक के क्षेत्र में आज विश्व भारत का लोहा मानता है। रजनीश ने कहा कि अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों में देश का दबदबा है। ऐसी कई कंपनियों में भारतवंशी सीईओ हैं या अन्य महत्वपूर्ण पदों पर। तकनीक भारतवासियों के स्वभाव व खून में है। यूपीआई कई देशों के लिए नजीर बन चुका है। देश में विकास में तीन महत्वपूर्ण कारक हैं- तकनीक-एडाॅप्शन और डेवलेपमेंट। भारत ने इसे अपनाया और आगे बढ़ रहा है। 

...आज भी याद है नोटबंदी वाली रात
नोटबंदी को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में रजनीश कुमार ने बताया कि 8 नवंबर 2016 की वह रात उन्हें आज भी याद है। उस वक्त रजनीश स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में बतौर मैनेजिंग डायरेक्टर थे, जबकि अरुंधति भट्टाचार्य चेयरपर्सन थीं। उन्होंने बताया कि वह डिनर कर रहे थे कि तभी प्रधानमंत्री की ओर से नोटबंदी की घोषणा हुई। अध्यक्ष ने उन्हें कार्यालय बुलाया और 48 करोड़ उपभोक्ताओं वाली हमारी पूरी टीम रात भर इसके लिए प्लानिंग करती रही।

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