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उपराज्यपाल बोले- जम्मू कश्मीर में अब शांति खरीदी नहीं जाती, बल्कि स्थापित की जा रही
Tue, 27 Feb 2024 06:30 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Tue, 27 Feb 2024 06:30 PM IST
सार
उपराज्यपाल ने कहा कि केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर का प्रशासन अब शांति खरीदने में विश्वास नहीं रखता। अब स्थाई रूप से शांति स्थापित करने में भरोसा रखते हैं।
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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा
- फोटो : डीआईपीआर, जम्मू-कश्मीर
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विस्तार
उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर वह जगह थी जहां भारत के राष्ट्रपति भी एक इंच जगह नहीं ले सकते थे। देश का सैनिक प्रदेश की रक्षा के लिए अपनी जान तो दे सकता था, लेकिन वहां एक झोपड़ी भी नहीं बना सकता था। लेकिन अब इसमें बदलाव आया है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने प्रदेश में चार सालों में हुए बड़े बदलावों को लेकर यह बातें कहीं।
एलजी मनोज सिन्हा ने आगे कहा कि सामाजिक तौर पर सवा करोड़ लोगों को सशक्त करने का काम पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किया गया है। पाकिस्तान से या फिर पीओके से आने वाले शरणार्थियों को भारत के अन्य राज्यों में उन्हें भारत के नागरिक का दर्जा और सभी अधिकार मिले हुए थे, लेकिन जम्मू-कश्मीर में नहीं मिले थे। वो अब पूरी तौर से सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं। देश के साथ जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने सितंबर तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट जमा कराया है। इस पर फैसला चुनाव आयोग को करना है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर का प्रशासन अब शांति खरीदने में विश्वास नहीं रखता। अब स्थाई रूप से शांति स्थापित करने में भरोसा रखते हैं। पहले ऐसे लोग जिन्हें जेल में होना चाहिए था, उन्हें हवाई जहाज से श्रीनगर से दिल्ली बुलाकर बातचीत की जाती थी। आतंकवाद से 54 लोगों को सरकारी सेवा से बाहर किया गया है।
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जम्मू-कश्मीर की युवती अगर किसी अन्य राज्य के युवक से शादी करती थी तो वह सभी अधिकार खो देती थी, जिसमें बदलाव लाया गया है। ऐसे में 50 फीसदी आबादी को सशक्त किया गया है। महिलाओं को उनके अधिकार दिए गए हैं।
एलजी ने कहा कि कश्मीरी पंडितों ने लंबे समय तक दंश झेला था। आज वह खुद को ताकतवर महसूस कर रहे हैं। समाज के पिछड़े वर्ग (ओबीसी) को देश के दूसरे हिस्से में नौकरियों में, पंचायत चुनाव में और शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था थी, लेकर जम्मू-कश्मीर में नहीं थी। अव वो सब उन्हें मिल रहा है।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर बदल रहा है। कश्मीर का नौजवान तीन साल में डिग्री हासिल करता है। पत्थरबाजी इतिहास की बात हो गई है। पड़ोसी बंद की कॉल नहीं देता है। श्रीनगर में नाइट लाइफ का आनंद लेते हुए लोग दिखाई देते हैं।
लक्षित हत्या के सवाल पर उपराज्यपाल ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ केवल कार्रवाई ही नहीं आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र को समाप्त किया जा रहा है। जल्द वो दिन भी देखेगा जब ऐसी घटनाएं भी नहीं होंगीं। आतंकी अब बस अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए वारदातों को अंजाम देते हैं।
पाकिस्तान से वार्ता के सवाल पर मनोज सिन्हा ने कहा कि पाकिस्तान जब तक नहीं सुधरता, तब तक बातचीत नहीं करेंगे। हम कश्मीर के युवा और वहां के लोगों से बात करेंगे।
पिछले साल 92 हजार से ज्यादा प्रोजेक्ट पूरे हुए। इस साल एक लाख से अधिक प्रोजेक्ट पूरे होंगे। जम्मू कश्मीर में डेढ़ लाख करोड़ रुपये के हाईवे और टनल के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। 1100 से ज्यादा ऑनलाइन सर्विस दी जा रही है। पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट में आम आदमी को पंद्रह दिन में सेवा दी जानी है और ऐसा न होने पर आर्थिक पेनाल्टी लगी है।
जम्मू कश्मीर में भूमि रिकॉर्ड को डिजिटाइज किया गया है। जिससे लोगों को लाभ मिला है। हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में उपलब्ध कराया गया है। समग्र कृषि विकास योजना बनाई गई है। किसानों की आमदनी के मामले में देश में पिछले तीन सालों में 11 से पांचवे स्थान पर पहुंच गया है। इस योजना के लागू होने के बाद पंजाब और हरियाणा को भी किसान आमदनी के मामले में पीछे छोड़ेंगे।
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एलजी मनोज सिन्हा ने आगे कहा कि सामाजिक तौर पर सवा करोड़ लोगों को सशक्त करने का काम पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किया गया है। पाकिस्तान से या फिर पीओके से आने वाले शरणार्थियों को भारत के अन्य राज्यों में उन्हें भारत के नागरिक का दर्जा और सभी अधिकार मिले हुए थे, लेकिन जम्मू-कश्मीर में नहीं मिले थे। वो अब पूरी तौर से सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं। देश के साथ जम्मू कश्मीर में लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने सितंबर तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट जमा कराया है। इस पर फैसला चुनाव आयोग को करना है।
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उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर का प्रशासन अब शांति खरीदने में विश्वास नहीं रखता। अब स्थाई रूप से शांति स्थापित करने में भरोसा रखते हैं। पहले ऐसे लोग जिन्हें जेल में होना चाहिए था, उन्हें हवाई जहाज से श्रीनगर से दिल्ली बुलाकर बातचीत की जाती थी। आतंकवाद से 54 लोगों को सरकारी सेवा से बाहर किया गया है।
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जम्मू-कश्मीर की युवती अगर किसी अन्य राज्य के युवक से शादी करती थी तो वह सभी अधिकार खो देती थी, जिसमें बदलाव लाया गया है। ऐसे में 50 फीसदी आबादी को सशक्त किया गया है। महिलाओं को उनके अधिकार दिए गए हैं।
एलजी ने कहा कि कश्मीरी पंडितों ने लंबे समय तक दंश झेला था। आज वह खुद को ताकतवर महसूस कर रहे हैं। समाज के पिछड़े वर्ग (ओबीसी) को देश के दूसरे हिस्से में नौकरियों में, पंचायत चुनाव में और शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था थी, लेकर जम्मू-कश्मीर में नहीं थी। अव वो सब उन्हें मिल रहा है।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर बदल रहा है। कश्मीर का नौजवान तीन साल में डिग्री हासिल करता है। पत्थरबाजी इतिहास की बात हो गई है। पड़ोसी बंद की कॉल नहीं देता है। श्रीनगर में नाइट लाइफ का आनंद लेते हुए लोग दिखाई देते हैं।
लक्षित हत्या के सवाल पर उपराज्यपाल ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ केवल कार्रवाई ही नहीं आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र को समाप्त किया जा रहा है। जल्द वो दिन भी देखेगा जब ऐसी घटनाएं भी नहीं होंगीं। आतंकी अब बस अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए वारदातों को अंजाम देते हैं।
पाकिस्तान से वार्ता के सवाल पर मनोज सिन्हा ने कहा कि पाकिस्तान जब तक नहीं सुधरता, तब तक बातचीत नहीं करेंगे। हम कश्मीर के युवा और वहां के लोगों से बात करेंगे।
पिछले साल 92 हजार से ज्यादा प्रोजेक्ट पूरे हुए। इस साल एक लाख से अधिक प्रोजेक्ट पूरे होंगे। जम्मू कश्मीर में डेढ़ लाख करोड़ रुपये के हाईवे और टनल के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। 1100 से ज्यादा ऑनलाइन सर्विस दी जा रही है। पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट में आम आदमी को पंद्रह दिन में सेवा दी जानी है और ऐसा न होने पर आर्थिक पेनाल्टी लगी है।
जम्मू कश्मीर में भूमि रिकॉर्ड को डिजिटाइज किया गया है। जिससे लोगों को लाभ मिला है। हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में उपलब्ध कराया गया है। समग्र कृषि विकास योजना बनाई गई है। किसानों की आमदनी के मामले में देश में पिछले तीन सालों में 11 से पांचवे स्थान पर पहुंच गया है। इस योजना के लागू होने के बाद पंजाब और हरियाणा को भी किसान आमदनी के मामले में पीछे छोड़ेंगे।