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Jammu News: जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र ने की शैक्षिक सहायता की पहल
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जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र ने पूर्वी लद्दाख के हेम्या गाँव में स्टेशनरी और आवश्यक शिक्षण सामग्र
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपने आउटरीच प्रयासों का विस्तार किया है। क्षेत्र के सबसे दूरस्थ सीमावर्ती गांवों के स्कूलों में मंगलवार को स्टेशनरी और आवश्यक शिक्षण सामग्री वितरित की गई।
मुख्य रूप से चुशुल निर्वाचन क्षेत्र में संचालित इस पहल का उद्देश्य उच्च-ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों के लिए बुनियादी शैक्षिक संसाधनों तक पहुंच में सुधार करके राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करना है। 2013 से जेकेएसी चंडीगढ़ चैप्टर अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सीमावर्ती समुदायों के बीच सक्रिय रूप से काम कर रहा है। जनता के योगदान से संचालित इसका वार्षिक स्टेशनरी दान अभियान इसके आउटरीच की एक पहचान बन गया है।
नोटबुक, रजिस्टर, पेंसिल, रबर, रंग भरने वाली किट और टिफिन बॉक्स जैसी वस्तुएं एकत्र की जाती हैं और दूरस्थ स्कूलों के छात्रों को वितरित की जाती हैं। संगठन के अनुसार एक लद्दाखी स्कूल में एक छोटे से प्रयास के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के 150 से ज्यादा स्कूलों तक फैल चुका है।
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लेह। जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपने आउटरीच प्रयासों का विस्तार किया है। क्षेत्र के सबसे दूरस्थ सीमावर्ती गांवों के स्कूलों में मंगलवार को स्टेशनरी और आवश्यक शिक्षण सामग्री वितरित की गई।
मुख्य रूप से चुशुल निर्वाचन क्षेत्र में संचालित इस पहल का उद्देश्य उच्च-ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों के लिए बुनियादी शैक्षिक संसाधनों तक पहुंच में सुधार करके राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करना है। 2013 से जेकेएसी चंडीगढ़ चैप्टर अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सीमावर्ती समुदायों के बीच सक्रिय रूप से काम कर रहा है। जनता के योगदान से संचालित इसका वार्षिक स्टेशनरी दान अभियान इसके आउटरीच की एक पहचान बन गया है।
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नोटबुक, रजिस्टर, पेंसिल, रबर, रंग भरने वाली किट और टिफिन बॉक्स जैसी वस्तुएं एकत्र की जाती हैं और दूरस्थ स्कूलों के छात्रों को वितरित की जाती हैं। संगठन के अनुसार एक लद्दाखी स्कूल में एक छोटे से प्रयास के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के 150 से ज्यादा स्कूलों तक फैल चुका है।
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